सेना को सीधे युद्धक वाहन देंगे अशोक लीलेंड व टाटा

जबलपुर। सैन्य परिवहन में अहम भूमिका निभाने वाले स्टेलियन और एलपीटीए वाहनों को अब आर्मी सीधे मूल निर्माता कंपनियों से खरीदेगी। रक्षा मंत्रालय ने यह आकलंन लगाया है कि निजी फर्मों से वाहन खरीदने में लागत कम आएगी। इधर अब तक इन वाहनों को असेंबल कर रही वाहन निर्माणी जबलपुर का युद्धक टेंकों के उत्पादन में लगी निर्माणियों के सहयोगी के तौर पर वर्क दिया जाएगा।

ऑर्डिनेंस फैक्टरी बोर्ड (ओएफबी) ने रक्षा मंत्रालय की मौजूदा नीतियों की मंशा के अनुरूप वीएफजे के भविष्य को ध्यान रखते हुए प्लान तैयार कर लिया है। आयुध निर्माणी मेढ़क और गन कैरिज फैक्टरी में भारतीय सेना के लिए टेंकों को बनाया जाता है। जीसीएफ में 155 एमएम धनुष तोप परीक्षण में सफल होने के बाद विधिवत उत्पादन प्रारंभ हो जाएगा। जिससे जीसीएफ में वर्कलोड काफी बढ़ जाएगा। इसी तरह आयुध निर्माणी मेढक में तोपो के उत्पादन को लेकर दबाव बढ़ता जा रहा है। जिसको देखते हुए ओएफबी ने तय किया है कि उक्त निर्माणियों में वर्क लोड कम करने के लिए वीएफजे को उनकी सहयोगी निर्माणी के रूप में उपयोग किया जाएगा। साफ तौर पर कहा जाए तो मेढक और जीसीएफ का एक्स्ट्रा वर्क लोड को वीएफजे में शिफ्ट किया जाएगा।

गौरतलब है कि 27 अप्रैल को रक्षा मंत्रालय की ओर से आयुध कारखाना बोर्ड के अध्यक्ष को एक सर्कुलर भेजा गया। इसमें 143 नॉन कोर वस्तुओं की पहचान की गई थी, जिन्हें सेना खुले बाजार से खरीद सकती है। इसमें वर्दी से लेकर स्लीपिंग बोर और ट्रक तक शामिल हैं। इस सूची में वीएफजे के मुख्य उत्पाद स्टेलियन, एलपीटीए व उन पर आधारित वाटर बाउजरों को भी शामिल किया गया था। उक्त सर्कुलर के बाद से ओएफबी वीएफजे को नया प्रोडेक्शन वर्क देने के लिए माथा पच्ची कर रहा था।

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