एमनेस्टी इंटरनेशनल ने 1984 दंगा पीड़ितों के लिए न्याय की मांग की

चंडीगढ़। वैश्विक मानवाधिकार निकाय एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा कि यह ‘‘शर्मनाक’’ है कि 1984 के सिख विरोधी दंगों के हजारों पीड़ित और प्रभावित लोग अब भी न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं तथा जब तक दोषी लोगों को दंडित नहीं किया जाता, उनके लिए ‘‘मामले बंद नहीं’’ होंगे। दंगों के 33 साल होने पर एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया ने ‘‘चौरासी की नाइंसाफी’’ पर एक परिचर्चा का आयोजन किया था।

परिचर्चा में दंगों के पीड़ित 15 परिवारों के जीवन और न्याय के लिए तीन दशकों से भी ज्यादा समय के उनके संघर्ष के बारे में बताया गया।एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया में प्रोग्राम निदेशक अस्मिता बसु ने कहा, ‘‘यह शर्मनाक है कि हजारों पीड़ित और प्रभावित लोग अब भी न्याय की प्रतीक्षा में हैं। अगर सरकार चाहती है कि उन लोगों का न्यायिक प्रणाली में भरोसा बहाल हो तो वह दंगों के आरोपियों का क्षमादान समाप्त करे। ले. जनरल (अवकाशप्राप्त) एच एस पनाग ने अपने संबोधन में कहा कि दंगों के दौरान निर्दोष लोगों पर हमले किए जा रहे थे और राज्य का ध्यान कहीं और था।

पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता सुखपाल सिंह खैरा ने कहा कि वह ‘‘सिखों का नहीं बल्कि मानवता का नरसंहार’’ था। एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया ने अधिकारियों से मामले में प्रभावी जांच कराने की अपील की।

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