नेहरू-गांधी परिवार के ये नेता बन चुके हैं कांग्रेस के अध्यक्ष, राहुल के सामने एक नहीं होंगी कई चुनौतियां

नई दिल्ली: शहजाद पूनावालाकी बगावत के बीच  राहुल गांधी  का अध्यक्ष बनन तय है. गांधी परिवार के वह 6 वें सदस्य होंगे जो कांग्रेस की कमान संभालेंगे. पूरे देश में हमेशा से ही ये बात चर्चा का मुद्दा रहा है कि कांग्रेस क्या किसी परिवार की पार्टी है. शहजाद पूनावाला ने भी यह सवाल उठाया है. उन्होंने राहुल गांधी से पूछा है कि क्या हम किसी ‘फैमिली बिजनेस’ में हैं. 1885 में कांग्रेस की स्थापना की गई थी. इसके पहले अध्यक्ष व्योमेश चंद्र बनर्जी थे जो कि एक बैरिस्टर थे. इसके बाद करीब 80 लोग कांग्रेस के अध्यक्ष बन चुके हैं. इनमें से कुछ लोगों ऐसे भी हैं जो जिनके हाथों में कई बार कांग्रेस की कमान आ चुकी है. लेकिन आजादी के बाद गांधी-नेहरू परिवार की छाया से कांग्रेस पर पूरी तरह से हावी रही. विशेषज्ञों का कहना है कि गांधी परिवार के बिना कांग्रेस की ताकत आधी है.

मोतीलाल नेहरू को मिली थी जब कमान
देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के पिता मोतीलाल नेहरू को 1919 में अमृतसर के अधिवेशन में कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया था. इसके बाद 1928 में कोलकाता अधिवेशन में उनको अध्यक्ष चुना गया था. मोतीलाल नेहरू का कांग्रेस में काफी प्रभाव था.

जवाहर लाल नेहरू बने 8 बार अध्यक्ष
पंडित जवाहर लाल नेहरू कांग्रेस के 8 बार बनाए गए. 1929 में हुए लाहौर अधिवेशन में उनको पहली बार यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी. इसके बाद उनको 1930,1936,1937,1951, 1952, 1953 और 1954 में कांग्रेस के अध्यक्ष बनाए गए.

फिर बनीं इंदिरा की कांग्रेस
जवाहर लाल नेहरू के निधन के बाद उनकी बेटी इंदिरा गांधी को कांग्रेस की कमान सौंप दी गई. वह चार बार कांग्रेस की अध्यक्ष रह चुकी हैं. पहली बार उनको 1959 के विशेष अधिवेशन में अध्यक्ष बनाया गया था. इसके बाद इंदिरा ने कांग्रेस में ऐसा अधिपत्य जमाया गया कि पार्टी के नेता ‘इंदिरा इज इंडिया, इंडिया इज इंदिरा’ का नारा देने लगे.

राजीव गांधी को मिली अचानक कमान
इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उनके बेटे राजीव गांधी को कांग्रेस की कमान सौंपी गई. वह उस समय राजनीति से कोसों दूर थे. वह 1985 से 1991 के तक पार्टी के अध्यक्ष रहे. लेकिन एक रैली मे हुए हमले में उनकी भी मौत हो गई. गांधी परिवार इस झटके से कई सालों तक उबर नहीं पाया और राजनीति से दूरी बना ली. राजीव की मौत के समय राहुल और प्रियंका गांधी काफी छोटे थे और गांधी परिवार में कोई उस समय दमदार नेता भी नहीं था. संजय की पत्नी मेनका ने भी अपने परिवार से दूरी बना ली थी. इस बीच कांग्रेस की कमान पहली बार गांधी परिवार के हाथों में नहीं थी.

फिर राजनीति में आई सोनिया गांधी
राजीव की हत्या के बाद कांग्रेस की हालत बद से बदतर होती जा रही थी. 1997 में कोलकाता में हुए अधिवेशन में सोनिया गांधी ने कांग्रेस की सदस्यता ली और 1998 में वह कांग्रेस की अध्यक्ष बनीं. सच्चाई यह भी है कि कभी राजनीति में न आने की कसम खा चुकी सोनिया गांधी की वजह से कांग्रेस का पुर्नजन्म हुआ था.

राहुल गांधी के सामने है बड़ी चुनौती
कांग्रेस की कमान राहुल गांधी के हाथों में है. अभी वह कांग्रेस के उपाध्यक्ष हैं और सारे फैसले वही लेते हैं. वह ऐसे समय में अध्यक्ष बनने जा रहे हैं जब गुजरात के मैदान में राहुल गांधी नरेंद्र मोदी से जूझ रहे हैं. उनके सामने कांग्रेस को लेकर एक नहीं सैकड़ों चुनौतियां हैं. जो हालत कांग्रेस की सोनिया के अध्यक्ष बनने के समय थी उससे कहीं ज्यादा खराब अब है.राहुल पहली बार 2004 में अमेठी से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे. तब से वह अमेठी से ही चुनाव जीत रहे हैं 2006 से ही उनको कांग्रेस का अध्यक्ष बनाने की बात हो ही है.

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