मदरसों की शिक्षा, मोदी की तस्वीर और बुनियादी मसला

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यूपी और उत्तराखंड में अब मदरसों और राज्य सरकारों की बीच ठनी है। पहला कारण तो मदरसों से आतंकी निकलने वाले बयान को लेकर और दूसरा इस संस्थाअों द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तस्वीर लगाने से इंकार को लेकर। यूं मदरसे राष्ट्रवादियों के  निशाने पर शुरू से रहे हैं। लेकिन इस बार मामला ज्यादा संगीन दिखता है, क्योंकि राज्य की योगी सरकार इन्हें ‘सुधारना’ चाहती है और मदरसे हैं कि अपनी ही लीक पर चलने पर आमादा हैं। ताजा बवाल राज्य के मुस्लिम सेंट्रल शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वासिम रिजवी द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखी चिट्ठी के बाद मचा। इसमें रिजवी ने मदरसों को खत्म करने की पैरवी करते हुए कहा कि वक्त आ गया है जब मदरसा शिक्षा को मुख्यधारा से जोड़ा जाए। क्योंकि ये मदरसे जकात के और सउदी अरब के पैसे से चल रहे हैं और कुछ मदरसों में आतंकी तैयार करने की ट्रेनिंग दी जा रही है। वसीम की चिट्ठी पर प्रतिक्रिया देते हुए एमआईएमआईएम नेता असदुद्दीन अोवैसी ने रिजवी को सबसे बड़ा अवसरवादी करार देते हुए आरोप लगाया कि उन्होने अपना जमीर  आरएसएस को बेच दिया है।

मुस्लिम मदरसे और उनमे दी जाने वाली शिक्षा को लेकर सवाल हमेशा उठते रहे हैं। मदरसे का शाब्दिक अर्थ है वह स्थान जहां दीनी तालीम दी जाती हो। अगर यूपी की बात करें तो राज्य मदरसा बोर्ड में रजिस्टर्ड मदरसों की कुल संख्या 19 हजार 203 है। इनमें से केवल 560 मदरसे राज्य सरकार के अनुदान से चलते हैं। बाकी अपनी वित्तीय प्रबंधन से चलते हैं। इन मदरसों में तीन स्तरीय‍ शिक्षा दी जाती है। ये है- तहतानिया ( प्राइमरी), फौकानिया ( जूनियर हाईस्कूल) तथा आलिया ( उच्च शिक्षा)। मदरसों में अममून धर्मशास्त्र ( सुन्नी व‍ शिया), अरबी फारसी व उर्दू साहित्य, सामान्य अंग्रेजी व सामान्य हिंदी पढ़ाई जाती है। आधुनिक विषय इन मदरसों के कोर्स का हिस्सा नहीं होते। इसीलिए आरोप लगता है कि मदरसों से कट्टर पंथी विद्यार्थी निकलते हैं। क्योंकि उनका ज्ञान और दृष्टि संकुचित होती है। इसी के मददेनजर यूपी में योगी सरकार ने मदरसों में गणित, विज्ञान जैसे विषय पढ़ाने के आदेश दिए हैं। साथ ही मुस्लिम त्योहारों पर छुट्टियां कम करने तथा अन्य धर्मों के त्यौहारों  पर छुट्टियां रखने के आदेश भी दिए हैं।

वसीम रिजवी ने जो चिटठी लिखी है, लगता है वह सरकारी एजेंडे की ही अगली कड़ी है। 27 पेजी इस चिट्ठी में रिजवी ने कहा है कि मदरसे बच्चों को सामान्य शिक्षा की मुख्यधारा से दूर कर रहे हैं। इनकी शिक्षा का स्तर  निचली सतह का है। ऐसे बच्चे सर्व समाज से दूर होकर कट्टरपंथ की तरफ बढ़ रहे हैं। ऐसे में मदरसों को खत्म किया जाए और उसकी जगह सामान्य शिक्षा नीति बनाई जाए। रिजवी ने सवाल उठाया कि मदरसों ने ‍िकतने डाॅक्टर, इंजीनियर, आईएएस पैदा किए ? लेकिन कुछ आतंकी जरूर पैदा किए हैं। इन मदरसों की डिग्रियां भी मान्य नहीं हैं। रिजवी ने यह खुलासा भी किया कि मदरसों को आतंकी  फंडिंग हो रही है। इसकी जांच होनी  चाहिए।

रिजवी की यह चिट्ठी अपने आप में बम से कम नहीं है। इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए मुस्लिम नेता असदुद्दीन अोवैसी ने रिजवी को चुनौती  दी कि वह एक भी ऐसा मदरसा बता दें, जहां इस तरह (जैसा रिजवी ने पत्र में जिक्र किया है) की पढ़ाई हो रही है। यदि उनके पास सबूत है तो उन्हें गृहमंत्री को इसे सौंपना चाहिए।’ रिजवी आगे क्या करते हैं, यह देखने की बात है, लेकिन जो बात उन्होने कही, वह कई लोगों की बांछे खिलाने वाली जरूर है।

उधर योगी सरकार के मदरसों को ठीक’करने के अभियान से मदरसे और उनके संचालक परेशान हैं। एक और टशन पीएम मोदी की तस्वीर लगाने को लेकर है। उत्तराखंड सरकार ने आदेश जारी किया कि ‘सभी शैक्षणिक संस्थान 2022 तक पीएम मोदी के न्यू इंडिया विजन को साकार करने के लिए काम करने की प्रतिज्ञा लें। इसके अलावा अपने परिसर में पीएम मोदी की तस्वीर लगाएं।’  सतही तौर पर इस आदेश में कोई खोट नजर नहीं आती ‍कि हर सरकारी संस्थान की तरह शिक्षा संस्थाअों में भी देश के प्रधानमंत्री की तस्वीर लगनी चाहिए। लेकिन पहले उत्तराखंड और अब यूपी के मदरसों ने ऐसा आदेश मानने से इंकार कर ‍िदया है। देवबंद के मुस्लिम शैक्षिक संस्थानों ने तो सरकार से माफी मांगते हुए कहा है कि मदरसे में तस्वीर लगाना इस्लाम के खिलाफ है।  देवबंद के जामिया  हुसैनिया मदरसा के मुख्य मुफ्ती तारिक काजमी ने कहा कि उनके संस्थानों में वो कोई तस्वीर नहीं लगाते तो पीएम की कैसे लगा सकते हैं? नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं और उन्हें देश की एकता के लिए काम करना चाहिए। काजमी ने कहा कि सरकार को कोई भी आदेश इस तरह से देना चाहिए कि उससे किसी की भावनाएं आहत न हों। उसे विकास पर ध्यान देना चाहिए न कि लोगों को आपस में बांटने पर।
यहां सवाल भावना से भी ज्यादा नीयत का है। मदरसों में आधुनिक शिक्षा दी जाए, इससे शायद ही किसी को इंकार हो। भले ही मदरसो का मुख्य उद्देश्य धार्मिक शिक्षा देना ही क्यों न हों, लेकिन इसी के साथ वे ऐसी डिग्री या प्रमाण पत्र भी हासिल करें, जो उन्हें मुल्ला मौलवी से इतर भी कुछ बना सके तो क्या‍ दिक्कत है। इससे समाज में उनका योगदान व्यापक होगा। लेकिन यह काम भी मदरसों को विश्वास मे लेकर ही किया जाना चाहिए, उन्हें खत्म करने की धमकी देकर तो यह कतई संभव नहीं है। रहा सवाल पीएम की तस्वीर का तो जहां बुत और तस्वीर हराम हो, वहां जबरन फोटो लगवाने से भी क्या फायदा सिवाय अहम की तुष्टी के। वैसे भी पीएम की तस्वीर तो अन्य  दूसरे निजी स्कूलों में भी शायद ही दिखती हो। यह कुछ कुछ सिनेमाघरों में राष्ट्रगीत गाने की अनिवार्यता जैसा ही है। क्योंकि देशभक्ति केवल तस्वीरों और नारों में नहीं जीती, वह उस जज्बे में जीती है, जिसे देश का हर नागरिक भीतर से महसूस करता है। डंडा मारकर सबक भले याद कराया जा सकता हो, समर्पण भाव नहीं जगाया जा सकता।

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