कान्हा के बाहर बारहसिंगा की बढ़ती आबादी ने जगाई संरक्षण की आस

तीन साल पहले कान्हा से सतपुड़ा टाइगर रिजर्व और वन विहार आए थे बारहसिंगा

भोपाल। प्रदेश के कान्हा किसली नेशनल पार्क को हिरणों की लुप्तप्राय: प्रजाति बारहसिंगा का घर कहा जाता है, क्योंकि कुछ समय पहले तक बारहसिंगा सिर्फ यहीं पाए जाते थे। इनके संरक्षण के प्रयासों के तहत तीन साल पहले कुछ बारहसिंगा सतपुड़ा टाइगर रिजर्व और राजधानी भोपाल के वन विहार में लाए गए थे। इन दोनों ही जगहों पर विस्थापित बारहसिंगा की बढ़ती आबादी ने इनके संरक्षण की उम्मीद जगा दी है।

लगभग एक सदी पहले तक बारहसिंगा कान्हा किसली के अलावा वर्तमान सतपुड़ा टाइगर रिजर्व क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में पाए जाते थे। 1857 में पचमढ़ी की खोज करने वाले ब्रिटिश सेना अधिकारी कैप्टन जेम्स फोर्सिथ ने भी मटकुली के आसपास हार्ड ग्राउंड प्रजाति के बारहसिंगा देखे थे। वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार 1937 तक देलाखाड़ी के जंगलों में बारहसिंगा का शिकार किया जाता रहा है। आगे चलकर न सिर्फ इनका क्षेत्र कम हुआ, बल्कि संख्या भी लगातार घटती गई। 1970 तक तो इनकी आबादी सिर्फ कान्हा किसली नेशनल पॉर्क में ही सीमित हो गई थी और वहां भी 60 बारहसिंगा बचे थे। इनके वजूद पर आए खतरे को देखते हुए वन विभाग ने इनके संरक्षण के प्रयास शुरू किए।

संरक्षण के लिए चुना गया सतपुड़ा क्षेत्र:

बारहसिंगा के संरक्षण के लिए वन विभाग को कान्हा किसली के बाहर किसी क्षेत्र की तलाश थी। लंबे अध्ययन के बाद इसरो और अन्य संस्थाओं के वैज्ञानिकों ने इसके लिए सतपुड़ा के बोरी क्षेत्र को कान्हा किसली के अनुरूप पाया। यहां की भौगोलिक स्थिति और यहां का पर्यावरण तथा वनस्पतियां भी कान्हा किसली से मिलती-जुलती हैं। इसके बाद कान्हा से बारहसिंगा के विस्थापन के प्रयास शुरू हो गए।

सतपुड़ा और वन विहार लाए गए बारहसिंगा:

कान्हा से बारहसिंगा के विस्थापन की योजना 2014 में साकार हुई। तीन चरणों में कान्हा से 37 बारहसिंगा सतपुड़ा लाए गए। वहीं, राजधानी के वनविहार में भी 6 जनवरी, 2014 को 7 बारहसिंगा लाए गए। दोनों ही स्थानों पर इनके लिए विशेष एनक्लोजर बनाए गए थे। इनके भोजन, स्वास्थ्य की देखभाल के लिए विशेष इंतजाम किए गए। विभाग की मेहनत रंग लाई और बारहसिंगा की आबादी बढ़ने लगी।

तीन सालों में मिली खुशखबरी:

वन्य प्राणी संरक्षण विभाग को अपनी मेहनत का परिणाम मिलने में तीन साल लग गए। इन तीन सालों में कान्हा से आए बारहसिंगा ने न सिर्फ नए क्षेत्रों के मौसम और परिस्थितियों से अनुकूलन किया, बल्कि अपनी आबादी में भी आशातीत वृद्धि की। सतपुड़ा के बोरी क्षेत्र में बनाए गए विशेष एनक्लोजर में अब 64 बारहसिंगा चौकड़ी भरते दिखाई देते हैं, वहीं वन विहार में इनकी संख्या 12 हो गई है।

और आएंगे बारहसिंगा:

सतपुड़ा और वनविहार में बारहसिंगा की बढ़ती आबादी से उत्साहित वन्य प्राणी संरक्षण विभाग ने कान्हा से कुछ और बारहसिंगा लाने की योजना बनाई है। विभाग के प्रवक्ता ने हिस को बताया कि सतपुड़ा में जब इनकी संख्या 100 से ऊपर हो जाएगी, तो इन्हें चरणबद्ध तरीके से खुले जंगल में छोड़ा जाएगा। यानी जल्द ही अब सतपुड़ा टाइगर रिजर्व आने वाले पर्यटक अन्य वन्यजीवों के साथ-साथ चौकड़ी भरते बारहसिंगा के झुंड भी देख सकेंगे।

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