अडानी के कमजोर ‘सिस्टम’ में राजनीति और पैसे का मायाजाल

0
43

एबीपी न्यूज ने 21 फरवरी को लखनऊ में आयोजित उप्र इन्वेस्टर्स समिट पर अपनी एक रिपोर्ट में अडानी ग्रुप के प्रमुख गौतम अडानी के इस कथन को प्रमुखता से उद्धृत किया है कि ‘पीएनबी में 11,300 करोड़ का घोटाला सिस्टम की कमियों की देन है। इस बड़े घोटाले के लिए सब जिम्मेदार हैं।’ वित्तमंत्री अरूण जेटली ने भी अपनी पहली प्रतिक्रिया में अडानी के विचारों को लगभग ‘एंडोंर्स’ करते हुए हैरानी जताई थी कि ‘आश्चर्य है कि बैंक के ऑडिटर्स और मैनेजर इतने बड़े घोटाले को नही पकड़ पाए…?’ पिछले डेढ़-दो दशकों पर नजर डालें तो पता चलेगा कि घोटालों की कहानियों में मोटेतौर पर भाजपा राजनीतिक आरोपों के रूपक-अलंकारों और मुहावरों का ही इस्तेमाल करती रही है।
नीरव मोदी के घोटालों के सदमों के बीच राजनीतिक आरोपों की कहानी में ‘सिस्टम’ के व्याकरण का यह हस्तक्षेप चौंकाने वाला और आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति कि ‘रिदम’ तोड़ने वाला है। ‘सिस्टम’ की बखिया उधेड़ने वाला यह उपक्रम उन गौतम अडानी की ओर से ‘इनिशियेट’ हुआ है, जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सबसे चहेते उद्योगपतियों में गिने जाते हैं। इसलिए समझना जरूरी है कि गौतम अडानी ऐसे कौन से सिस्टम की बात कर रहे हैं, जिससे वो अनभिज्ञ है अथवा जिसका वो हिस्सा नही हैं? ‘फायनेन्शियल-सिस्टम’ की बात करें तो वो उसके बेताज बादशाह हैं, और ‘पोलिटिकल-सिस्टम’ से उनकी जुगलबंदियों की चर्चाएं तो आए दिन होती रहती हैं। उनकी वित्तीय हैसियत का अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि मार्च 2016 की एक रिपोर्ट के मुताबिक उनकी गिनती देश पहले चार बड़े बैंक-कर्जदारों मे होती थी। उस समय अनिल अंबानी की कंपनी पहले नम्बर पर थी।
वित्तीय सिस्टम मे पेंचबंदी के अलावा पोलिटिकल-सिस्टम में उनकी घुसपैठ का अनुमान इस बात से लग सकता है कि राज्यसभा में शून्यकाल में अडानी-समूह के व्यवसायिक-स्वाार्थों पर अक्सर चर्चाएं होती रहती हैं। राज्यसभा में जनता दल युनाइटेड के सांसद पवन वर्मा आरोप लगा चुके हैं कि गौतम अडानी पर मोदी-सरकार की अकल्पनीय कृपा का सबब क्या है? इस एक कंपनी पर इतना कर्ज बकाया है कि जितना देश भर में कुल किसानों पर बकाया है। इसके बावजूद प्रधानमंत्री के हर विदेशी दौरे में अडानी समूह के मालिक गौतम अडानी साथ नजर आते हैं। सवाल यह नहीं है कि यह कंपनी ऋण को चुका पाएगी या नहीं, लेकिन इस सवाल का उत्तर आना चाहिए कि पिछले दो-तीन सालों में इस कंपनी का मुनाफा 85 प्रतिशत तक कैसे बढ़ सका है?
गौतम अडानी पर प्रधानमंत्री की अकल्पनीय कृपा से संबंधित सांसद पवन वर्मा के आरोपों की पुष्टि राजस्व खुफिया निदेशालय के इस फैसले में होती दिखती है, जिसमे अडानी-समूह के खिलाफ चल रही जांच को खत्म करने के निर्देश दिये गए हैं। जनसत्ता की रिपोर्ट के मुताबिक अडानी पर कथित रूप से आयात की गई सामग्री के मूल्य में हेराफेरी करने और टैक्स कम देकर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने का आरोप था। अडानी-समूह ने आयातीत सामान का कुल मूल्य बढ़ाकर 3974.12 करोड़ घोषित करने और उस पर शुल्य या पांच प्रतिशत से कम टेक्स देने का आरोप था। इसके पहले जुलाई 2016 में केन्द्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय ने गुजरात के मुंद्रा स्थित प्रोजेक्ट में पर्यावरण को नुकसान पहंचाने के कारण आरोपित 200 करोड का जुर्माना माफ कर दिया था।
सत्ता के गलियारों में प्रधानमंत्री के प्रिय पात्र के रूप में मशहूर गौतम अडानी जैसे उद्योगपति जब सिस्टम में कमियों की बात करते हैं, तो मति-भ्रम होने लगता है। यह समझ नहीं आता कि कमियों को दुरूस्त कैसे किया जाए? यूपीए सरकार में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के आरोप भाजपा-सरकार में सिस्टम के कौन से डिटर्जेंट से धुल सकते हैं, यह सवाल अबूझ पहेली सा सिर पर मंडराता रहता है । समझना जरूरी है, जिस कमजोर सिस्टम की ओर गौतम अडानी इशारा कर रहे हैं, उसके बीज कहां पर छिपे हैं। यदि पोलिटिक्स और फायनेंस का नेटवर्क सिस्टम को कमजोर कर रहा है तो वे खुद भी वही कर रहे हैं। सोंचे, गौतम अडानी किसकी ओर इशारा कर रहे हैं…? राजनीति को झेलना उनकी मजबूरी है या उनको झेलना राजनीति की मजबूरी है? चुनावी राजनीति में यह समझना मुश्किल नहीं होना चाहिए…। ताली दोनों हाथों से बज रही है…।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY