मुकाबला सलमान के शर्ट और धनकड़ के कुर्ता उतारने का…!

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इसे हरियाणवी विनोद बुद्धि कहें, आत्ममुग्धता कहें या मूर्खता कहें कि मोदी सरकार के आम बजट पर हरियाणा की भाजपा सरकार के कृषि मंत्री की प्रतिक्रिया एकदम ‘शर्ट उतारू’ थी। हरियाणा के कृषि मंत्री अो.पी. धनकड़  हैं। उन्होने केन्द्रीय वित्त मंत्री जेटली द्वारा अपने ताजा बजट में किसानों को फसलों की लागत का डेढ़ गुना भाव देने की घोषणा तथा हरियाणा के किसानों को 3400 करोड़ की मुआवजा राशि मिलने का श्रेय अपने कुर्ता  उतारने  को दिया। इस मामले में धनकड़ ने फिल्म स्टार सलमान खान को आइकन मानते हुए कहा कि  शर्ट उतारने पर सलमान की फिल्में सौ करोड़ का बिजनेस ही कर पाती हैं, जब मैंने कुर्ता उतारा तो राज्य  को 3400 करोड़ मिल गए। यह राज्य के किसानों को ‍िमली मुआवजा राशि है। हालांकि उन्होने यह साफ नहीं किया कि यह उपलब्धि कितनी बार कुर्ता उतारने के कारण राज्य को हासिल हुई। जो भी हो, धनकड़ ने यह चमत्कारी समीकरण राज्य के निमाणा गांव में चर्चा  के दौरान पत्रकारों को समझाया। इसके पहले उन्होने राज्य में कृषि हालात की समीक्षा भी की थी। ‘तेरे कुर्ते से मेरा कुर्ता कीमती’ की तर्ज पर कृषि मंत्री ने यह बयान उस सवाल के जवाब में दिया, जिसमें पूछा गया था कि आप विपक्ष में रहते हुए कई बार कुर्ता उतारकर प्रदर्शन किया करते थे, उससे राज्य के किसानों को क्या लाभ हुआ? इस पर धनकड़ ने कहा कि मोदी सरकार के ताजा बजट से साफ हो है ‍कि मेरा कुर्ता उतारना सलमान के शर्ट उतारने से कहीं ज्यादा कीमती है। अर्थात उसका राजनीतिक और आर्थिक मूल्य सल्लू की शर्ट के उतारने  की तुलना में कई गुना ज्यादा है और इसे ठीक से समझने की जरूरत है। धनकड़ ने यह भी कहा कि जिस स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट को लागू करवाने  के लिए वे सड़क पर संघर्ष किया करते थे, वह भी इस बजट में पूरी हो गई। धनकड़ का तात्पर्य फसलों के डेढ़ गुना ज्यादा मूल्य की घोषणा से था।

वैसे भी धनकड़ हरियाणा में कृषि क्षेत्र में अपने काम से ज्यादा विवादित बयानों के लिए चर्चा  में रहते हैं। पिछले दिनों उन्होने  राज्य की प्रतिभाशाली महिला खिलाडि़यों को दुधारू गायें भेंट करने की पहल की थी। इसी तरह  धनकड़ ने राज्य किसान मोर्चा के अध्यक्ष के रूप में  पार्टी के किसान सम्मेलन को संबोधित करते हुए एक बार राज्य के कुंवारों को खुला आॅफर  दिया था कि अगर उन्होने चुनाव में भाजपा को जिताया तो वे उनके  लिए  बिहार से दुल्हनें  दिलवाएंगे। इस पर बिहारियों में तीखी प्रतिक्रिया हुई कि धनकड़ ने बिहारी लड़कियों को समझा क्या है?  लेकिन धनकड़ अपने बयान पर डटे रहे। इस बार बजट घोषणा के बाद भी वे खुशी के मारे सड़कों पर नाचते दिखाई दिए। लगा कि इस किसानोन्मुखी बजट की सबसे ज्यादा खुशी उन्हीं को हुई है। वे स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करवाने का श्रेय भी खुद ही ले रहे है। ध्यान रहे कि प्रसिद्ध  कृषि वैज्ञानिक स्वामीनाथन की अध्यक्षता में यह कमेटी यूपीए 1 सरकार के समय 2004 में बनी थी। उसे ‘नेशनल कमीशन आॅन फार्मर्स’ नाम दिया गया था। कमीशन ने दो सालों में 6 रिपोर्टें तैयार कीं थी। उसमें खेती को लाभप्रद बनाने और किसानों की माली हालत सुधारने  के लिए कई सिफारिशें  की गई थीं। इनमें  किसानों को फ़सल उत्पादन मूल्य से पचास प्रतिशत ज़्यादा दाम देने,  खेतिहर  जमीन और वनभूमि को गैर-कृषि उद्देश्यों के लिए कॉरपोरेट को न देने, फसल बीमा सुविधा पूरे देश में हर फसल के लिए देने तथा लगातार प्राकृतिक आपदाओं की सूरत में किसान को मदद पहुंचाने के लिए एक एग्रीकल्चर रिस्क फंड गठित करना आदि शामिल था।

धनकड़ का यह मानना ठीक हो सकता है कि वित्त मंत्री अरूण जेटली ने किसानों को फसलों की लागत का डेढ़ गुना मूल्य किसानों को देने का ऐलान स्वामीनाथन कमीशन की सिफारिशों की संदर्भ में किया। लेकिन उनके कुर्ता उतारने  के कारण हरियाणवी किसानों को भरपूर मुआवजा मिलने का दावा उस जोक की तरह है, जो हरियाणा के एक समुदाय विशेष पर किया जाता रहा है। अभी तक तो डिटर्जेंट पावडर के एक विज्ञापन में ही यह ईर्ष्या भरा सवाल पूछा जाता रहा है कि ‘उसकी  कमीज मेरी कमीज से उजली कैसे’? जवाब आता है कि वह फलां कारगर साबुन से धोई जाती है, इसलिए। लेकिन सलमान अपनी शर्ट केवल धोने के लिए अथवा उससे मुआवजा वसूलने के लिए नहीं उतारते। वे तो इसे अपनी सिक्स पैक बाॅडी दिखाने के लिए उतारते हैं। ‍सलमान की बाॅडी पर युवा और खासकर युवतियां फिदा रहती हैं। वैसे मैदान में शर्ट तो अन्य कई खिलाड़ी भी उतारते रहे  हैं, लेकिन उन्होने इस क्रिया में कोई राजनीतिक लाभ नहीं सूंघा। सलमान भी केवल यह जताना चाह रहे होते हैं कि वे अभी भी युवा हैं। इसका न तो छप्पन की इंच की छाती से कोई लेना-देना है और न ही इससे किसी मुआवजे की रसीद कटती है। लेकिन धनकड़ ने जो दावा किया, उससे लगता है कि उन्होने जब जब कुर्ता उतारा , सरकारें टेंशन में आ गईं। हो सकता है कि उन्होने धनकड़ को वापस कुर्ता पहनाने के लिए कुछ राशि किसानों  के मुआवजे के रूप में मंजूर कर दी हो।

अब सवाल यह है कि धनकड़ द्वारा कुर्ता उतारने भर से राज्य को अगर 3400 करोड़ मिल रहे हैं तो बाकी भाजपा शासित राज्यों के कृषि मंत्री क्या कर रहे हैं? उन्हें भी इस फंडे पर जल्द से जल्द अमल करना चाहिए ताकि किसानों के लिए ज्यादा से  ज्यादा पैसा निकलवाया जा सके। इसी के साथ एक कौतुहल भरा संतोष भी है कि मंत्री धनकड़ ने केवल कुर्ता ही उतारा। अगर वो कुछ और भी उतारने का दुस्साहस करते तो वित्त मंत्री जेटली को मुआवजे के तौर पर हरियाणा के ‍िकसानों को न जाने कितना पैसा और देना पड़ता?

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