खेतों में मजदूरी करने वाली ममता ने तीन हजार महिलाओं को बनाया सशक्त

टीकमगढ़ । कभी खेतों में मजदूरी करने वाली ममता ने कुछ कर दिखाने के जज्बे से न सिर्फ अपनी फैमिली इनकम बढ़ाई, बल्कि 3 हजार महिलाओं को भी सेल्फ-हेल्फ से जोड़ा और उन्हें अपने परिवार के भरण-पोषण में सक्षम बनाते हुए सशक्त बनाया। वर्ष 1999 में पढ़ाई छूट गई थीं। शादी के बाद खेतों में काम किया, लेकिन वर्ष 2011 से फिर से एजुकेशन की ओर कदम बढ़ाए, जिसके बल पर आज वह 10 हजार रूपये प्रतिमाह वेतन पा रही है।

दरअसल, निवाड़ी तहसील के ग्राम केना निवासी ममता प्रजापति की वर्ष 1999 में हायर सेकंडरी परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद शादी हो गई, जिससे उनकी पढ़ाई छूट गयी थी। ससुराल में खेती के अलावा अन्य कोई आय का स्रोत नहीं था। इसलिए ममता भी परिजनों के साथ खेत में काम करने लगी, लेकिन उम्मीद की किरण मिलते ही ममता ने आत्मविश्वास के साथ कदम बढ़ाए और अपना मुकाम हासिल किया। दिन भर खेत में काम करने वाली ममता को जब महिला स्व सहायता समूह के बारे में जानकारी लगी तो उन्हें इसमें जिज्ञासा जगी। तेजस्विनी टीम के संपर्क में आने के बाद वर्ष 2007 में ममता स्व सहायता समूह की सदस्य बनी, इसके बाद उसने पीछे मुडक़र नहीं देखा।2011 में फिर से शुरू की पढ़ाई

ममता बताती है कि समूह ज्वाइन करने के बाद प्रशिक्षण के दौरान मुझे और शिक्षित होने की जरूरत महसूस हुई। उसने बताया कि समय बीतने के साथ मैंने वर्ष 2011 में स्नातक शिक्षा की शुरूआत की और वर्ष 2013 में इसे पूर्ण किया। आज ममता इसके अलावा बीएसडब्लयू और बीएड भी कर चुकी हैं। उन्होंने बताया कि तेजस्विनी प्रोग्राम से जुडऩे के बाद हमेशा से आगे बढऩे की इच्छा रही है। वह सखी सहेली संगिनी समूह निवाड़ी की अध्यक्ष रहीं। इसी बीच संगिनी तेजस्विनी महासंघ में इंटरव्यू के बाद एलसी के तौर पर उनका चयन किया गया।10 हजार रूपये पा रही मासिक वेतन

इसके बाद से ममता पूरी निष्ठा के साथ अपने दायित्व का निर्वहन कर रही हैं तथा प्रतिमाह 10 हजार रूपये वेतन पा रही हैं। इससे पूरी तरह से खेती पर आश्रित परिवार की इनकम बढऩे के साथ आर्थिक स्थिति भी बदल गयी। अब ममता क्षेत्र की अन्य महिलाओं को सेल्फ-हेल्फ के प्रति जागरूक रही हैं। कई स्थानों पर प्रशिक्षण दे चुकी ममता ने क्षेत्र की करीब तीन हजार महिलाओं को स्व सहायता समूहों से जोड़ा है।हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश

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