प्रदेश का न्यारा गांव सिहोरा, जहां न अपराध होते हैं, न कोई शराब पीता है

जबलपुर। जबलपुर जिले में बसा गांव सिहोदा प्रदेश का सबसे अलग और एक न्यारा-सा गांव है। यह गांव कई मायनों में दूसरे गांवों से भिन्न है। पूरे गांव में कोई भी शराब नहीं पीता, न ही इस गांव में अरसे से कोई अपराध हुआ है। इतना ही नहीं, सरकार की लगभग सभी कल्याणकारी योजनाओं का ग्रामवासियों को लाभ मिला है। लोक कल्याण के क्षेत्र में स्थानीय सरपंच की पहल से पंचायत में कई नवाचार भी किए गए हैं।
सिहोदा की सरपंच हैं मीरा बाई पटेल। वे बताती हैं कि पिछले दो वर्षों से इस गांव में कोई भी अपराध नहीं हुआ है। गांव में जो भी लोग शराब पीते थे उन सभी ने शराब से हमेशा के लिए तौबा कर ली है। गांव के लोगों को इन बुराईयों से मुक्त होने के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले टीआई भेड़ाघाट एम.डी.नागोतिया भी गांव में पिछले दो वर्षों के दौरान किसी भी प्रकार का अपराध कायम न होने की पुष्टि करते हैं। गांव वाले बताते हैं कि टीआई साहब ने पूरे गांव के लोगों को एकत्रित कर शराब के आदी ग्रामीणों को शराब छोडऩे की समझाईश दी। वे अक्सर इस गांव में पहुंचकर शराब के कारण स्वयं व्यक्ति तथा उसके परिवार को होने वाले नुकसान के बारे में बताते थे और अन्य ग्रामीणों को भी शराब के आदी लोगों पर एक प्रकार का नैतिक दबाव बनाने के लिए प्रेरित करते थे।

यहां से कमान संभाली सरपंच मीरा जी ने। उन्होंने गांव की महिलाओं को अपने साथ लेकर उनके माध्यम से शराब के आदी ग्रामीणों पर लगातार दबाव बनाया। महिला सरपंच पूरे गांव में शराबखोरी के खिलाफ ऐसा माहौल बनाने में कामयाब हुई जिसमें शराबियों को हीन दृष्टि से देखा जाने लगा। यही नहीं शराब पिए हुए पाए जाने पर अथवा किसी प्रकार के अपराध से जुड़े होने की स्थिति में ऐसे लोगों को तमाम शासकीय योजनाओं के लाभों से वंचित कर दिए जाने की चेतावनी दी गई। नशे के आदी लोगों को गांव के हनुमान मंदिर में ले जाकर शराब छोडऩे की शपथ दिलाए जाने का सिलसिला शुरू किया गया। इस प्रकार के सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक और नैतिक दबाव के चलते गांव में एक तरह की क्रांति हुई और आज गांव का कोई भी व्यक्ति शराब को हाथ तक नहीं लगाता। नशा छोडऩे वालों को स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर सम्मानित भी किया जाता है।
57 वर्षीय कुंवरलाल कोरी बताते हैं कि वे पिछले 35 वर्षों से शराब पीते आ रहे थे पर लोगों की समझाईश और भगवान की कृपा से उनकी शराब छूट गई। 55 वर्षीय एक अन्य बुजुर्ग बर्मन कहते हैं कि सरपंच जी की प्रेरणा से गांव के हनुमान मंदिर में नारियल चढ़ाकर उन्होंने सदा के लिए शराब का त्याग कर दिया। सरपंच श्रीमती पटेल तथा उनके पति पूर्व सरपंच परशुराम पटेल के ईमानदार प्रयासों और टीआई नागोतिया की प्रेरणा से ग्रामीणों की मानसिकता में आए सकारात्मक परिवर्तन के चलते गांव आखिरकार शराब के अभिशाप से पूरी तरह मुक्त हो गया।

गांव में बही सामाजिक परिवर्तन की इस बयार से और भी सुपरिणाम सामने आए। उनमें सबसे महत्वपूर्ण था गांव का पूरी तरह अपराध शून्य होना। सिहोदा गांव में गंभीर अपराध तो दूर की बात है, बीते दो वर्षों में यहां छोटी-मोटी भी आपराधिक घटना नहीं हुई है। सिहोदा के लोग अपने गांव के पूरी तरह अपराधमुक्त होने को लेकर स्वयं को गौरवान्वित महसूस करते हैं। ग्रामीण इस बड़ी उपलब्धि में नगर निरीक्षक पुलिस नागोतिया के योगदान का जिक्र करना नहीं भूलते।
सरपंच मीरा पटेल बताती हैं कि सिहोदा में ग्राम कन्यादान योजना भी आरंभ की गई है। इसके अन्तर्गत गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए गांव के हनुमान मंदिर में होने वाली आरती से एकत्र राशि दी जाती है। इसके लिए बाकायदा ऐसी बेटियों के नामों की पर्चियां तैयार कर उनमें से रैण्डमली एक पर्ची चुनी जाती है। गांव की जिस बेटी की पर्ची निकलती है उसके विवाह के लिए 25 हजार रूपए की एफडी बनवाई जाती है। सरपंच गर्व से बताती हैं कि नर्मदा सेवा यात्रा से लौटते हुए मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने रात्रि 12 बजे भी पर्ची निकालने का उनका अनुरोध मानते हुए अपने हाथों से पर्ची निकाली। मुख्यमंत्री ने योजना की सराहना भी की।

मीरा जी कहती हैं कि गांव के किसी परिवार के सामने आपात् स्थिति आने पर उसकी मदद के लिए पूरा गांव एकजुट हो जाता है और मंदिर की एक बार की आरती में ही 15 से 20 हजार रूपए एकत्र हो जाते हैं। वे याद करती हैं कि दुर्घटना में घायल ग्रामवासी के इलाज में मदद के लिए गांव की ओर से एक बार 15 हजार रूपए मुहैया कराए गए थे। इसी प्रकार एक अन्य ग्रामीण को हार्ट अटैक होने पर उसकी चिकित्सा के लिए समवेत प्रयासों से परिवार को 30 हजार रूपए की राशि सौंपी गई थी।
यह गांव और भी कई मायनों में दूसरे गांवों से भिन्न है। सिहोदा को जबलपुर जिले का पहला खुले में शौच से मुक्त गांव होने का श्रेय प्राप्त है। दिलचस्प यह है कि ग्रामीणों की प्रबल इच्छाशक्ति के चलते यह काम तीन माह से पहले ही पूरा कर लिया गया। गांव का सरकारी स्कूल स्वच्छता के मामले में जिले में पहले स्थान पर है। ग्राम पंचायत को निर्मल ग्राम पंचायत पुरस्कार मिल चुका है और गांव की आंगनबाड़ी स्मार्ट आंगनबाड़ी के रूप में पुरस्कृत हो चुकी है। सरपंच मीरा जी सिहोदा को कुपोषण मुक्त ग्राम बनाने के लिए संकल्पित हैं और इस काम में अप्रैल तक सफलता प्राप्त करने के प्रति आशान्वित भी। उन्होंने गांव को स्मार्ट न्यूट्रि-विलेज बनाने की दिशा में कदम भी उठाए हैं। पंचायत के अलग-अलग वार्डों में स्वच्छता का जिम्मा सम्बन्धित पंचों को सौंपा गया है और खास तौर पर महिलाएं स्वच्छता बनाए रखने के लिए लगातार प्रयासरत् रहती हैं।

सरपंच मीरा पटेल ने बताया कि गांव के 99 फीसदी घरों में उज्ज्वला गैस कनेक्शन उपलब्ध है और अप्रैल माह तक यह आंकड़ा 100 फीसदी हो जाएगा। वे प्रधानमंत्री आवास योजना में 110 आवास निर्माण किए जाने का जिक्र करते हुए इस योजना को गांव के लिए वरदान बताती हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री आवास योजना और इंदिरा आवास योजना के अन्तर्गत भी सौ से अधिक आवासों का निर्माण कराया है। वे आशान्वित हैं कि दिसम्बर 2018 तक वे अपने गांव को पूरी तरह खपरैल मुक्त बनाने में सफल होंगी तथा गांव में आगे केवल पक्के मकान ही बनेंगे। सिहोदा में हर चौराहे पर रोशनी के इंतजाम हैं। सरपंच श्रीमती पटेल की योजना है कि गांव के घर-घर की छत पर सोलर पैनल लगाए जाएं ताकि गांव में ही बिजली का उत्पादन हो सके। वे तैयार बिजली से केवल गांव के घरों को ही रोशन नहीं करना चाहती बल्कि उनका इरादा अतिरिक्त बिजली को बिजली कम्पनी को बेचने का भी है।
सिहोदा गोकुल ग्राम है, निर्मल ग्राम है, जैविक ग्राम है, अपराधमुक्त ग्राम है, शराबमुक्त ग्राम है। कुल मिलाकर यह नि:संकोच कहा जा सकता है कि सिहोदा केवल आदर्श ग्राम ही नहीं वरन् अपने आप में एक अद्भुत ग्राम है जिसकी मिसाल आसानी से मिलनी असंभव नहीं तो मुश्किल जरूर है।

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