जैविक खेती के मामले में मप्र बनेगा देश का अग्रणी प्रदेश : शिवराज

बालाघाट। फसलों के अधिक उत्पादन के लिए रासायनिक कीटनाशकों का अधिक उपयोग होने ने हमारे भोजन में शामिल होने वाला अनाज प्रदूषित होकर जहरीला हो रहा है। रासायनिक कीटनाशकों एवं उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से नदियों एवं तालाब का पानी भी प्रदूषित हो रहा है और हमारे चारों ओर का पर्यावरण भी बिगड़ रहा है। इससे बचने के लिए हमें जैविक खेती की ओर बढ़ना होगा। मध्यप्रदेश को जैविक खेती के मामले में देश का अग्रणी राज्य बनाया जायेगा। प्रदेश में जैविक खेती करने वाले किसानों को प्रोत्साहित किया जायेगा और उनके जैविक उत्पादों की मार्केटिंग के लिए भी अच्छी व्यवस्था की जायेगी। उक्‍त बातें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को बालाघाट में तीन दिवसीय राज्य स्तरीय जैविक-आध्यात्मिक कृषक सम्मेलन में किसानों को संबोधित करते हुए कही।

शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय बालाघाट के मैदान में आयोजित इस जैविक-आध्यात्मिक कृषक सम्मेलन का शुभारंभ आर्ट आफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमेन सिंह एवं मध्यप्रदेश शासन के किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने गौपूजन कर किया।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में कृषि मंत्री बिसेन द्वारा जैविक-आध्यात्मिक कृषक सम्मेलन के आयोजन की प्रशंसा करते हुए कहा कि हमें वसुधैव कुटुंबकम की भावना के साथ समाज का हर व्यक्ति स्वस्थ्य रहे, सबका कल्याण हो इस मिशन के साथ कार्य करना है। मध्यप्रदेश में किसानों को जैविक खेती के लिए आगे आना होगा। मध्यप्रदेश में अभी 5 लाख 80 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में जैविक कृषि की जाती है। इस रकबे को बढ़ाने के प्रयास किये जायेंगें। जैविक खेती एवं जैविक कीटनाशकों के उपयोग को प्रोत्साहित किया जायेगा । किसान जैविक फसलों की खेती करे तो उसके उत्पाद को बाजार में बिकने की व्यवस्था भी की जायेगी। जैविक खेती से एकदम से लाभ नहीं मिलता है। इसका लाभ धीरे से मिलता है और किसान को इसके लिए इंतजार करना होगा।

उन्‍होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 5 साल में किसानों की आय को दोगुना करने का संकल्प लिया है। मध्यप्रदेश की सरकार इस संकल्प को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। प्रदेश सरकार ने किसानों को धान एवं गेहूं के समर्थन मूल्य पर 200 रुपये प्रति क्विंटल की प्रोत्साहन राशि देने का निर्णय किया है। पिछले वर्ष जिन किसानों ने समर्थन मूल्य पर गेहूं एवं धान की बिक्री की है उन्हें भी 200 रुपये प्रति क्विंटल की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जायेगी। उन्होंने बालाघाट जिले में इस वर्ष कीट व्याधि के कारण धान फसल को हुए नुकसान की चर्चा करते हुए कहा कि इससे प्रभावित किसानों को राहत पहुंचाने के लिए 12 करोड़ 66 लाख रुपये की राशि प्रदान की गई है। इसका किसानों को वितरण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा से फसल खराब होने पर दी जाने वाली सहायता राशि बढ़ाकर 30 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर कर दी गई है।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने बालाघाट में जैविक आध्यातिम्क कृषक सम्मेलन को एतिहासिक बताते हुए कहा कि इसका लाभ बालाघाट जिले के साथ ही आसपास के क्षेत्रों के किसानों को भी मिलेगा। इस सम्मेलन में उन्नत कृषि यंत्रों के साथ ही जैविक उत्पादों को भी प्रदर्शित किया गया है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर जी का मार्गदर्शन किसानों को मिलेगा तो निश्चित रूप से मध्यप्रदेश जैविक खेती में देश का अग्रणी राज्य बनेगा।

आर्ट आफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर जी ने इस अवसर पर कहा कि भारत ऋषि एवं कृषि का देश है। ऋषि ज्ञान देता है और कृषि अन्न देती है। वर्तमान समय में लोग खेती करना पसंद नहीं करते है। इससे हमारी कृषि पिछड़ती जायेगी। हमें जैविक खेती को अपनाने के साथ ही किसानों को सम्मान देना होगा। किसानों का सम्मान नहीं होगा तो देश विकास की दौड़ में पिछड़ जायेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नतृत्व में मध्यप्रदेश में जैविक खेती के लिए किये जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि किसानों को जहरीला अनाज पैदा करने से बचने के लिए जैविक खेती को अपना होगा।

तीन दिन के इस जैविक एवं आध्यात्मिक कृषक सम्मेलन के दौरान उन्नत कृषि यंत्रों एवं जैविक उत्पादों के 170 स्टाल लगाए गये हैं। मेले में आने वाले किसानों के लिए भोजन की व्यवस्था भी की गई है। इस आयोजन में 11 वैज्ञानिक भी शामिल होने आये हैं, जो जैविक कृषि पर किसानों के समक्ष अपने विचार रखने के साथ ही किसानों को जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित कर रहे है।

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