जनता प्रदेश में बदलाव चाहती है, लेकिन भाजपा का विकल्प नहीं: मुनमुन

भोपाल। मध्यप्रदेश में राज्य सरकार विकास के दावे तो खूब करती है, लेकिन वास्तविक हकीकत क्या है, इसकी सही जानकारी वहां तक पहुंच ही नहीं पाती है। अधिकारी जो जानकारी मुहैया कराते हैं, उसके हिसाब से सरकार को प्रदेश में सब कुछ अच्छा ही अच्छा दिख रहा है, लेकिन प्रदेश में न तो स्वास्थ्य की स्थिति अच्छी है और न ही शिक्षा की। किसानों को भी सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल रहा है। इसीलिए जनता प्रदेश में बदलाव चाहती है, लेकिन यहां अभी भाजपा का कोई विकल्प नहीं है। कांग्रेस बिखरी हुई है, आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता केवल चंदा उगाही में जुटे हैं, सपा और बसपा भी कमजोर है। ऐसे में जनता को भाजपा से अच्छा विकल्प नहीं मिल पा रहा है। यह कहना है सिवनी विधानसभा क्षेत्र के निर्दलीय विधायक दिनेश राय ‘मुनमुन’ का। उन्होंने यह बातें हिन्दुस्थान समाचार से विशेष चर्चा के दौरान कही।

उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता अब राज्य सरकार से ऊब चुकी है, इसलिए वह बदलाव चाहती है। मगर, विपक्ष में कांग्रेस संगठित नहीं है। जनता वोट बीजेपी के खिलाफ देना चाहती है, इसका यह मतलब नहीं है कि वह कांग्रेस को वोट देना चाहती है। कांग्रेस भी विकल्प के रूप में नहीं दिख रही है। बसपा और सपा बेहद कमजोर है। आम आदमी पार्टी में कुछ लोग अच्छे हैं, लेकिन इसके अधिकांश लोग दिनभर भाषण देते हैं और शाम को गमछा बिछाकर चंदा उगाही करने में जुट जाते हैं। ऐसे में आप पार्टी भी प्रदेश में विकल्प के रूप में नहीं उभर सकती।

वहीं, यह पूछने पर कि अल्पेश-जिग्नेश और हार्दिक भी मध्यप्रदेश में कांग्रेस को सपोर्ट करने की बात कह रहे हैं, इसके जवाब में विधायक दिनेश राय का कहना है कि मध्यप्रदेश की जनता बहुत समझदार है और वह बाहरी लोगों की बात में नहीं आएगी। ये लोग चुनाव को प्रभावित नहीं कर पाएंगे। इनके यहां आने से न कांग्रेस को फायदा होगा और न भाजपा को कोई नुकसान। इसलिए अभी मजबूत विकल्प केवल भाजपा ही है। उनका कहना है कि विपक्ष कितना भी मजबूत हो, वह सत्ता को कभी नहीं हरा सकता। सत्ता में बदलाव जनता करती है, फिर वह यह नहीं देखती कि सामने कौन है, किसी पार्टी से है या निर्दलीय। अगर जनता के मन में सरकार की विफलताएं आ गई हैं, तो निश्चित ही वह बदलाव कर सकती है। ऐसे निर्दलीय उम्मीदवार जो पिछले चुनावों में दूसरे-तीसरे नम्बर पर रहे हैं, वे अगर संगठित हो जाएं, तो भाजपा का विकल्प बन सकते हैं।

विधायक दिनेश राय मुनमुन का मानना है कि निर्दलीय उम्मीदवार होने के कारण वे अपने क्षेत्र की जनता के लिए बेहतर काम कर रहे हैं। उन्होंने हिन्दुस्थान समाचार से बातचीत करते हुए कहा कि उन्होंने अपने क्षेत्र के लिए तीन बड़े मद्दों पर काम किया और उनमें सफलता पाई। इनमें एक मुद्दा फोरलेन का है, जो लम्बे समय से रूका हुआ था। उनके प्रयास से 800 करोड़ का टेंडर जारी होकर फोरलेन का काम शुरू हो गया और यह जल्द पूरा होने वाला है। उन्होंने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अपने वकील के माध्यम से केस लड़ कर फोरलेन पर लगे स्टे को हटवाया। दूसरा मामला पेंच के पानी है। उन्होंने बताया कि पेंच का पानी अपने क्षेत्र में लाने वे सफल हुए हैं। हालांकि, अभी लालमाटी क्षेत्र में पेंच का पानी आना बाकी है, लेकिन इसके लिए वे लगातार प्रयास कर रहे हैं। वहीं पूरे जिले में जगह-जगह स्टाप डेम बनाए गए हैं, जिससे उनके क्षेत्र में पंचाब-हरियाणा जैसी फसलें लहलहाने लगी हैं। तीसरा मामला रेलवे लाइन का है। उन्होंने बताया कि सिवनी क्षेत्र में पहले नेरोगेज लाइन थी। मेरे विधायक बनने के बाद क्षेत्र में बड़ी लाइन का काम शुरू हुआ और आज बालाघाट से छिंदवाड़ा तक काम पूरा हो गया है। अभी सिवनी से छिंदवाड़ा के बीच रेल लाइन का चल रहा है, जो जल्द ही पूरी हो जाएगी। उनका कहना है कि हो सकता है कि यह काम मेरे प्रयास से नहीं हुआ है, लेकिन मेरे विधानसभा में आने के बाद सरकार का ध्यान इस ओर गया और द्रुत गति से यहां रेल लाइन का काम चल रहा है।

निर्दलीय होने के फायदे बताते हुए उन्होंने कहा कि मैं निर्दलीय हूँ, इसलिए अपने क्षेत्र की जनता के लिए अच्छा काम पा रहा हूँ। अगर किसी पार्टी में होता, तो कई तरह की दिक्कतें होतीं। पहले पार्टी के हित देखने पड़ते, कार्यकर्ताओं का ध्यान रखना पड़ता, उनके निर्देशों का पालन करना पड़ता। पार्टी और सरकार जो कहती, वह करना पड़ता। मतलब पूरी तरह पार्टी के अधीन होते। निर्दलीय हूं, इसलिए न तो मुझे पार्टी से मतलब है और न सरकार से। हम केवल जनता के प्रति जवाबदेह हैं, क्योंकि जनता हमारी मालिक है। हमारा कर्तव्य बनता है कि हम जनता के लिए अच्छा काम करें, उसकी आवाज सुनें।
उन्होंने कहा कि 14-15 साल के शासनकाल में मंत्री-नेता अपने को सर्वोपरि मान रहे हैं, उनको लगने लगा है कि हम जो निर्णय लेते हैं, उनको सब स्वीकर करते हैं। आप अपने क्षेत्रों में जाकर देखेंगे, तो वास्तविक हकीकत सामने आ जाएगी कि जनता आपके बारे में क्या सोच रही है। अधिकारी-कर्मचारी क्या कर रहे हैं। कितना भ्रष्टाचार हो रहा है। इस समय सरकार के पास ऐसे चाटुकार अधिकारी आ गए हैं, जो सब कुछ अच्छा ही अच्छा बता रहे हैं। सरकार को भी सुब कुछ अच्छा ही अच्छा लग रहा है। जनता की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। जनता जो कह रही है, उसे नजरअंदाज किया जा रहा है। इस समय मध्यप्रदेश के जो मंत्री भी डरे हुए हैं और सरकार की जो विकास योजनाएं हैं, उन्हें अपने क्षेत्रों में ले जा रहे हैं। विकास योजनाओं का 230 विधानसभाओं का पैसा केवल 30 विधानसभा क्षेत्रों में जा रहा है। इसलिए प्रदेश के अन्य क्षेत्र पिछड़ रहे हैं। सरकार प्रदेश में कई योजनाएं चला रही हैं, लेकिन उनका भी ठीक से क्रियान्वयन नहीं हो पा रही है।

किसानों के हित में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई भावान्तर योजना को लेकर निर्दलीय विधायक दिनेश राय का कहना है कि मैं मानता हूं कि यह योजना बहुत हद तक एक अच्छी योजना है, लेकिन इसका किसानों तक पूरा लाभ नहीं मिल रहा है। इस साल हमारे क्षेत्र में मक्का का भावान्तर भाव 1435 रुपए रखा, लेकिन मक्का बिकी 900 से 1000 रुपए तक। सरकार ने इस योजना के तहत किसानों को 235 रुपए का भावान्तर मूल्य दिया। इससे किसानों को सीधे 200 रुपए का नुकसान हुआ। भावान्तर का मतल है सरकार ने जो रेट तय किया और जितने में फसल बिकी, उसका अंतर। सरकार को देना था, 435 लेकिन दिया 235। किसानों के हित की इस योजना का भी प्रदेश में सही क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है। इस साल बजट में भी सरकार ने किसानों के लिए खूब घोषणाएं की हैं, लेकिन उनको इसका पूरा फायदा मिलेगा, यह कहना मुश्किल है।

प्रदेश में स्वास्थ्य एवं शिक्षा के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं संविदा कर्मियों के भरोसे चल रही हैं। अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में कहीं पर्याप्त स्टॉफ नहीं है, आवश्यक उपकरणों का अभाव है। हालांकि, उन्होंने यह स्वीकार किया कि प्रदेश में सबसे ज्यादा चिकित्सीय स्टॉफ सिवनी जिले में हैं, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि इतना स्टॉफ होने के बावजूद डॉक्टरों-स्टॉफ नर्सों के सैकड़ों पद खाली पड़े हैं। हमारे क्षेत्र में अभी एक 300 बिस्तर का अस्पताल बन रहा है और कई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खोले गए हैं, लेकिन डॉक्टर-नर्स व अन्य स्टॉफ के बिना ये किस काम के। सरकारी अस्पतालों से ज्यादा लोग निजी अस्पतालों में जा रहे हैं। यही हालत शिक्षा की है। संविदा और अतिथि शिक्षकों के भरोसे स्कूल और कॉलेज चल रहे हैं, जबकि पढ़े-लिखे लोगों की प्रदेश में कमी नहीं हैं, लेकिन सरकार भर्तियां नहीं कर पा रही है। सैकड़ों सरकारी पद खाली पड़े हैं। ऐसे में हम मध्यप्रदेश को कैसे स्वर्णिम प्रदेश या अग्रणी राज्य बना पाएंगे? एक रुपए किलो गेहूं-चाबल बांट देने से विकास नहीं होता। आप वोट बैंक की राजनीति कर रहे हैं। सब्सिडी का लाभ भी गरीबों को नहीं मिल रहा। यह फायदा भी अमीर ही ले रहे हैं। सरकार पेट्रोल-डीजल पर सब्सिडी देती है, लेकिन गरीब तो पैदल या सायकिल से चलता है। इस सब्सिडी का लाभ भी अमीर गाडिय़ों में पेट्रोल-डीजल का उपयोग कर उठाते हैं।

कुपोषण के सवाल पर विधायक दिनेश राय ने कहा कि हमारा क्षेत्र सिवनी भी कुपोषण की चपेट में है। यह पूरे प्रदेश में है और इस मामले में हम नम्बर वन हैं। अपराधों में भी मध्यप्रदेश नम्बर एक पर है। सरकार कहती है कि हम कृषि के मामले में अव्वल है, तो हमें यह भी गर्व से कहना पड़ेगा कि हम कुपोषण में नम्बर एक पर हैं, अपराधों में भी नम्बर एक पर हैं। भ्रष्टाचार में भी नम्बर एक पर हैं। यह हमारे लिए गर्व की बात होनी चाहिए, क्योंकि लगातार कृषि कर्मण अवार्ड लेकर कृषि में अपनी उपलब्धि गिनाते हैं, तो इन मामले में भी हमें अपनी नाकामी स्वीकार करनी होगी।

विधायक दिनेश राय मुनमुन नोटबंदी और सीएसटी को देश के हित में बताते हैं, लेकिन इस मामले में उनका यह कहना है कि इन दोनों ने प्रदेश की जनता काफी परेशान हुई है। लोगों को लाइन में लगना पड़ा, जबकि जिन लोगों के पास नोट थे, उन्होंने तो आसानी से बदल लिए। हां, इसका नोटबंदी और सीएसटी से देश को फायदा हुआ है। आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर पूछे सवाल पर उन्होंने कहा कि इस मामले में मैं जनता से पूछकर अगले चुनाव की तैयारी करूँगा। जनता के बीच जाऊंगा और पूछूंगा कि मुझे चुनाव लडऩा चाहिए या नहीं, लडऩा है तो किसी पार्टी से या निर्दलीय। जनता अगर कहेगी कि मैं चुनाव नहीं लडूं, तो मैं अगला चुनाव नहीं लडूंगा। मैं जनता के बीच जनमत कराऊंगा और जो जनता निर्णय लेगी, वही मैं करूंगा। अगर मैं अगला चुनाव लडूंगा, तो मेरा मुख्य मुद्दा रोजगार होगा। बेरोजगारी सिवनी विधानसभा क्षेत्र में ही नहीं, प्रदेश और देशभर में लगातार बढ़ रही है। यह एक राष्ट्रीय मुद्दा है। पढ़े-लिखे लोगों की प्रदेश में कमी नहीं है और सरकारी पद खाली पड़े हुए हैं, लेकिन सरकार भर्ती नहीं करने में विफल है। ऐसे में रोजगार का मुद्दा अहम होगा। इसके अलावा अभी अपने क्षेत्र के कुछ गांवों में स्टाप डेम बनवाकर और पेंच का पानी पूरे क्षेत्र में लाकर उसे हरा-भरा बनाने का काम भी करना है। यह काम विधानसभा में पहुंचकर ही संभव हो सकेंगे।

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