उम्‍दा कहानी और इरफान के दमदार अभिनय से सजी ब्‍लैकमेल

इस सप्ताह प्रदर्शित ‘ब्लैकमेल’ कथानक के लिहाज से बेहद उम्दा फिल्म है। फिल्म का पहला भाग थोड़ा धीमी गति से आगे बढ़ा है लेकिन इंटरवेल के बाद कहानी इतनी तेज भागती है कि दर्शकों को कुछ और सोचने का अवसर ही नहीं मिलता। फिल्म क्वीन और बजरंगी भाईजान के लेखक परवेज शेख ने यह फिल्म लिखी है और इसमें ह्यूमर इतना है कि आपको यह फिल्म पैसा वसूल लगेगी। इरफान खान तो मंझे हुए अभिनेता हैं ही अन्य कलाकारों ने भी कमाल का काम किया है।
फिल्म की कहानी देव (इरफान खान) और उसकी पत्नी के इर्दगिर्द घूमती है। देव टॉयलट पेपर सेल्‍समेन है। आम जिंदगी की दुश्वारियों से वह भी जूझ रहा होता है। नौकरी में पैसे नहीं बढ़ने, ईएमआई समय पर देने की टेंशन, परिवार का बढ़ता खर्च आदि दिक्कतों से वह परेशान रहता है लेकिन एक दिन शाम को सोचता है कि क्यों ना पत्नी को खुश करने के लिए घर जल्दी चला जाये। वह गुलाब का गुलदस्ता लेकर घर पहुँचता है तो देखता है कि उसकी पत्नी बिस्तर पर किसी और के साथ संबंध बना रही है। वह यह देखकर आश्चर्य और गुस्से से भर जाता है लेकिन कुछ ऐसी घटनाएं घटती हैं कि अपनी पत्नी के प्रेमी रंजीत (अरुणोदय सिंह) को ब्लैकमेल करने लग जाता है। इसके बाद कहानी ऐसे घूमती है कि हर पात्र एक दूसरे को ब्लैकमेल कर रहा होता है और जब अंत में सारी गुत्थियां सुलझती हैं तो दर्शकों का हंसना नहीं रुकता।
देव के रोल में इरफान खान जमे हैं। एक आम आदमी की परेशानी को उन्होंने बड़े सहज तरीके से पर्दे पर उतारा है। वह वाकई कमाल के अभिनेता हैं। अरुणोदय सिंह का काम भी दर्शकों को पसंद आयेगा। वह गुस्सैल की भूमिका में जमे हैं और उनकी अब तक प्रदर्शित फिल्मों में यह अभिनय के लिहाज से उनकी सर्वश्रेष्ठ फिल्म है। दिव्या दत्ता और कीर्ति कुल्हारी का काम भी अच्छा रहा। अमित त्रिवेदी का संगीत ठीकठाक बन पड़ा है। ‘डेल्ही बैली’ के बाद निर्देशक अभिनव देव की यह एक और उम्दा फिल्म है।
कलाकार- इरफान खान, कीर्ति कुल्‍हारी, अरुणोदय सिंह, दिव्‍या दत्‍ता, ओमी वैद्य, उर्मिला मातोंडकर, अतुल काले, गजराज राव और निर्देशक अभ‍निव देव।

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