एनटीसीए को सौंपे प्रदेश में हुई बाघों की गणना के साक्ष्य

भोपाल। वन विभाग ने प्रदेश में हुई बाघों की गणना के दौरान मिले साक्ष्य राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) को सौंप दिए हैं। इसके लिए राज्य वन अनुसंधान के वैज्ञानिकों और वन कर्मचारियों की टीम नागपुर गई है, जहां एनटीसीए के क्षेत्रीय कार्यालय में आयोजित बैठक के दौरान ये साक्ष्य सौंपे गए। प्रदेश के वन क्षेत्र, नेशनल पार्क एवं टाइगर रिजर्व में बाघों की गणना 06 फरवरी से 26 मार्च तक आयोजित की गई थी।

प्रदेश में 6 फरवरी से शुरू हुई बाघों की गणना के पहले चरण में बाघों एवं अन्य वन्य जीवों की मौजूदगी के साक्ष्य जुटाए गए थे। इस दौरान बाघों की विष्ठा, पेड़ों पर किया गया स्प्रे एवं खरोंच के निशान, पगमार्क आदि एकत्रित किए गए थे। प्रदेश के हर वनमंडल, नेशनल पार्क एवं टाइगर रिजर्व से जुटाए गए इन साक्ष्यों की जानकारी राज्य वन अनुसंधान संस्थान को भेजी गई। इसके बाद इन साक्ष्यों को डब्लूडब्लूआई (वर्ल्ड वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट) द्वारा तैयार किए गए एक एप में अपलोड किया गया। राज्य वन अनुसंधान संस्थान में 04 अप्रैल से शुरू हुआ यह काम 10 मई तक चला। इसी जानकारी को लेकर राज्य वन अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों की टीम नागपुर गई है। इस टीम के साथ प्रदेश के हर टाइगर रिजर्व एवं प्रत्येक वन संरक्षक वृत्त से एक-एक अधिकारी भी नागपुर गया है।

कैमरा ट्रेपिंग की महत्वपूर्ण भूमिका
कैमरे द्वारा लिए गए चित्रों को बाघों की गणना की दृष्टि से सबसे उपयुक्त साक्ष्य माना जाता है। प्रदेश में कैमरा ट्रेपिंग बाघों की गणना के तीसरे चरण में की गई। प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय के प्रवक्ता का कहना है कि कैमरा ट्रेपिंग के लिए विभिन्न वन क्षेत्रों में लगाए गए कैमरों का राज्य वन अनुसंधान संस्थान आना शुरू हो गया। इसके बाद इन कैमरों से मिले डाटा को भी डब्लूडब्लूआई के एप पर अपलोड किया जाएगा। फिर यह जानकारी भी एनटीसीए को भेज दी जाएगी। फिर साक्ष्यों एवं कैमरा ट्रेपिंग के नतीजों को प्रोसेस करके एनटीसीए गणना के नतीजों की घोषणा करेगा।

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