प्लेसमेंट सेंटर बनेंगे प्रदेश के 15 रोजगार कार्यालय

भोपाल । प्रदेश के 15 रोजगार कार्यालय जल्द ही सर्वसुविधायुक्त प्लेसमेंट सेंटर में तब्दील हो जाएंगे। यहां रोजगार के इच्छुक युवाओं का सिर्फ रजिस्ट्रेशन ही नहीं होगा, बल्कि उनमें उद्योगों की मांग के अनुरूप कौशल का विकास भी किया जाएगा। प्रदेश के रोजगारों कार्यालयों के विकास के लिए मध्यप्रदेश शासन के तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार मंत्रालय ने यशस्वी एकेडमी फॉर टेलेंट मैनेजमेंट प्रा.लि. के साथ एक एमओयू साइन किया है।

प्रदेश के रोजगार केंद्रों के सर्वसुविधायुक्त प्लेसमेंट सेंटर्स के रूप में विकास के लिए मध्यप्रदेश शासन के तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार मंत्रालय तथा यशस्वी एकेडमी के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार रोजगार मंत्रालय के राज्य मंत्री दीपक जोशी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा के अनुरूप युवाओं में कौशल के विकास के लिए यह नवाचार देश के सभी राज्यों में किया जा रहा है, लेकिन मध्यप्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य है, जहां इस परियोजना को लागू किया गया है। उन्होंने बताया कि ये प्लेसमेंट सेंटर पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत चलाए जाएंगे और इनमें पंजीकृत होने वाले युवाओं में कौशल विकास तथा उनकी काउंसिलिंग का काम यशस्वी एकेडमी करेगी। इस अवसर पर आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में उपस्थित राज्य कौशल विकास एवं रोजगार निर्माण बोर्ड के अध्यक्ष हेमंत देशमुख ने इन प्लेसमेंट सेंटर्स की कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कौशल विकास, काउंसिलिंग एवं रोजगार मिलने तक की प्रकिया में युवाओं को कोई फीस नहीं देनी होगी। उन्होंने बताया कि इस परियोजना के तहत एक साल में 1 लाख युवाओं को रोजगार दिलाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रेस कांफ्रेंस में विभाग के प्रमुख सचिव अशोक वर्णवाल, संचालक संजीव सिंह, कौशल विकास एवं रोजगार निर्माण बोर्ड के सीईओ सुखबीर सिंह, यशस्वी एकेडमी के प्रोजेक्ट मैनेजर सुनील नैवे भी उपस्थित थे।

ये होंगी सुविधाएं
यशस्वी एकेडमी के प्रोजेक्ट मैनेजर सुनील नैवे ने बताया कि कंपनी सबसे पहले चयनित जिलों में स्थित रोजगार केंद्रों की अधोसंरचना में सुधार करेगी। इसके बाद हर केंद्र में आईटी लैब, सेल्फ हेल्फ किओस्क, साइकोमैटिक लैब्, काउंसलिंग रूम आदि सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने बताया कि ये प्लेसमेंट सेंटर्स जून माह से अपना काम शुरू कर देंगे।
ये होंगे उद्देश्य:

-बाजार की मांगों का आकलनश्लेषण।
-बेरोजगार युवाओं की काउंसलिंग एवं बाजार की जरूरत के मुताबिक उनकी तैयारी।
-रोजगार मेलों तथा कॅरियर काउंसलिंग सत्रों का आयोजन।
-नियोजकों के समन्वय से युवाओं को उनके जिले में रोजगार दिलाना।
-पीपीपी मॉडल का प्रभावी क्रियान्वयन।

पहले चरण में ये जिले शामिल: भोपाल, उज्जैन, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, देवास, सतना, सिंगरौली, धार, खरगोन, रीवा, होशंगाबाद, शहडोल, कटनी एवं सागर।

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