प्रधानमंत्री के न्यौते पर आई विदेशी कंपनी, काम नहीं करने दे रहे ठेकेदार

सागर जिले में अटल ज्योति योजना का काम कर रही ओमान की कंपनी परेशान

सागर/भोपाल । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 में पद संभालते ही सारी दुनिया की कंपनियों से भारत में आकर काम करने का आग्रह किया था। फरवरी, 2018 में अपनी ओमान यात्रा के दौरान भी प्रधानमंत्री ने वहां के कारोबारियों से मुलाकात कर उन्हें भारत आने का न्यौता दिया था। लेकिन मध्यप्रदेश के सागर जिले में अटल ज्योति योजना का काम कर रही ओमान की ही एक कंपनी को जिन हालातों का सामना करना पड़ रहा है, वे भविष्य में भारत आने का मनसूबा बनाने वाली कंपनियों के कदम रोकने के लिए काफी हैं। मस्कट की इस कंपनी को एकतरफ स्थानीय ठेकेदार काम नहीं करने दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विद्युत वितरण कंपनी द्वारा लगाई जा रही पेनाल्टी और काम की बढ़ती लागत के कारण उसके लिए काम करना घाटे का सौदा बनता जा रहा है।

कंस्ट्रक्शन और इनफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के क्षेत्र की मस्कट (ओमान) की कंपनी अल अद्रक ट्रेडिंग एंड कांट्रेक्टिंग एलएलसी ने भारत में काम करने के लिए अद्रक इंजीनियरिंग एंड कंस्ट्रक्शन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड नाम से नई कंपनी बनाई थी। कंपनी के चीफ एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. थामस एजेक्जेंडर के निर्देशन में कंपनी ने वर्ष 2017 में मध्यप्रदेश के सतना, रीवा,सीधी और छतरपुर जिलों में स्थानीय कंपनी प्रवीण इलेक्ट्रिकल्स के साथ मिलकर अटल ज्योति योजना का काम लिया था। इसी के साथ कंपनी प्रवीण इलेक्टिकल्स के साथ हुए करार के अनुसार सागर जिले में भी अटल ज्योति योजना का काम कर रही है। इनमें से छतरपुर, सतना, रीवा, सीधी जिलों में तो कंपनी का काम काफी तेजी से चल रहा है और बहुत जल्द इसके पूरा हो जाने की उम्मीद है। लेकिन सागर में स्थानीय ठेकेदारों के रवैये के कारण कंपनी की राहें मुश्किल होती जा रही हैं।

कोई धमकी दे रहा, कोई लाखों का सामान ले गया
सागर जिले में काम करने से पहले अल अद्रक कंपनी के अधिकारियों को यह आभास नहीं रहा होगा कि उन्हें इस तरह की दिक्कतें भी आ सकती हैं। कंपनी के डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर व्यास कुमार झारिया बताते हैं कि सागर जिले में कंपनी में वर्ष 2017 में ही काम शुरू किया और मकरोनिया रोड पर पेराडइस होटल के सामने गौरनगर में अपना ऑफिस खोला। लेकिन काम शुरू करते ही मुसीबतें आने लगीं। पहले जो स्थानीय पेटी कांट्रेक्टर प्रवीण इलेक्ट्रिकल्स के साथ काम कर रहे थे, उनमें से कुछ का हिसाब होना बाकी था। ये ठेकेदार अद्रक इंडिया के ऑफिस में आकर रोज बखेड़ा करने लगे। कभी ये कर्मचारियों को धमकाते, तो कभी कंपनी का कीमती सामान हथिया लेते। किसी तरह कंपनी ने इनका हिसाब सेटल किया। कंपनी पूरे जिले में काम कर रही थी और इसके लिए पूरे जिले में ही सामान भी रखा गया था। कंपनी के इन डिपो में से कीमती उपकरण और अन्य सामान चोरी होने लगा। जब भी कहीं चोरी होती, स्थानीय पुलिस को सूचना दी जाती लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकलता था।

आखिरकार फरवरी, 2018 में कंपनी ने एआईजी सागर एवं पुलिस अधीक्षक सागर से लगातार हो रही चोरियों तथा ठेकेदारों की धौंसधपट की लिखित शिकायत की। इसका असर यह हुआ कि इससे पहले कंपनी ने जिन-जिन थानों में चोरियों की शिकायत की थी, सभी में एफआईआर दर्ज कर ली गई। लेकिन पेटी कांट्रेक्टर्स की मनमानी फिर भी चलती रही। फरवरी, 2018 में ही कंपनी ने धीमी गति से काम करने और उपयुक्त तरीके से काम न करने के आरोप में दो पेटी कांट्रेक्टरों को हटा दिया। इसके बाद तो कंपनी की परेशानी और भी बढ़ गई। इनमें से भोपाल का एक ठेकेदार तो कंपनी के चार ट्रांसफार्मर निकाल कर ले गया। हड़पे गए ट्रांसफार्मर और अन्य सामान की कीमत 40-50 लाख रुपए होती है। मार्च, 2018 में कंपनी ने सागर के ही एक ठेकेदार को हटा दिया। यह ठेकेदार भी कंपनी द्वारा दिए गए सामान का हिसाब देने की बजाय झगड़े पर उतर आया। यही नहीं, बल्कि ठेकेदार के गुंडों ने कंपनी के ऑफिस के एक कर्मचारी राहुल मोहन से कार्यालय परिसर में ही बुरी तरह मारपीट भी की। हालांकि बाद में इस ठेकेदार ने माफी मांग ली। लेकिन इस बीच बताया जा रहा है कि एक करोड़ से अधिक की सामग्री चोरी की जा चुकी है।

हर महीने पेनाल्टी भर रही कंपनी
लगातार हो रही चोरियों, स्थानीय ठेकेदारों की गुंडागर्दी और झगड़े-झांसों के चलते कंपनी को दोहरा नुकसान झेलना पड़ रहा है। इस तरह की घटनाओं से कंपनी के काम में देर तो हो ही रही है, लागत बढ़ने से नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर झारिया बताते हैं कि कंपनी को अपना काम अप्रैल, 2018 तक पूरा करना था, लेकिन ठेकेदारों की दबंगई और चोरियों के चलते कंपनी को काम पूरा करने में देर हो गई। इसके चलते कंपनी को हर महीने 5 प्रतिशत की दर से पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी को पेनाल्टी चुकाना पड़ रही है। अद्रक इंडिया के सीनियर इंजीनियर जॉन ने हिन्दुस्थान समाचार को बताया कि फिलहाल जितना काम बाकी है, उसे सामान्य स्थिति में पूरा करने में एक से दो माह लगेगा, लेकिन स्थानीय ठेकेदारों के षडयंत्र और गुंदागर्दी इसी तरह चलती रही, तो फिर एक साल का समय भी कम पड़ सकता है।

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