इंग्लैंड पेनल्टी शूटआउट में तो स्वीडन सामान्य खेल कर अंतिम आठ में आए

मास्को। इंग्लैंड के जांबाज़ युवा खिलाड़ियों ने कोलंबिया से एक-एक की बराबरी के बाद पेनल्टी शूटआउट में चार-तीन गोल से हरा कर वह करिश्मा कर दिखाया, जिसकी उम्मीद नहीं थी। कहते हैं, इंग्लैंड की टीम पर एक जिन्न का साया मंडरा रहा था। वह पिछले 28 सालों में किसी भी बड़े टूर्नामेंट के पेनल्टी शूटआउट में जीत ही नहीं पा रहा था। इस बार इंग्लैंड के मिड फ़ील्डर एरिक डीयर ने ईशु को याद कर निर्णायक शाट को गोल में बदल कर इंग्लैंड के फ़ुटबाल प्रेमियों के मन में जगह बना ली। इस से दो शाट पूर्व इंग्लैंड के जॉर्डन पिकफ़ोरड ने अवश्य मौक़ा गंवाया, जब कोलंबिया के गोल रक्षक कार्लोस बुका ने दाएँ और गोता खा कर एक ख़ूबसूरत बचाव किया था।

इंग्लैंड के गोलरक्षक जॉर्डन पिकफ़ोर्ड की सराहना करनी होगी कि उसने संयम और धैर्य का परिचय देते हुए दो ख़ूबसूरत बचाव किए। इंग्लैंड की ओर से हैरी केन ने पेनल्टी शूट आउट में पहला गोल करने से पहले खेल के 57वें मिनट में बढ़िया फ़ील्ड गोल कर अपनी टीम को बढ़त दिलाई थी। केन का इस टूर्नामेंट में यह छठा गोल है और वह सर्वाधिक गोल करने के लिए मिलने वाले गोल्डन बूट की ओर बढ़ रहे हैं। केन के पेनल्टी शाट के बाद मार्कस रशफ़ोर्ड और करियन ट्रिपर ने गोल किए, जबकि जॉर्डन हैंडरसन के शाट को कोलंबियाई गोली ओसपीना ने बचा लिया।

इस मैच में जीत पर हैरी केन ने कहा, ‘इंग्लैंड के लिए यह बड़ी सफलता है।’ एक तेज़ तर्रार मैच के कड़े मुक़ाबले में कोलंबिया को अधिक मौक़े मिले, पर यह उसका दुर्भाग्य रहा कि वह नब्बे मिनट के फ़ुल टाइम के अंतिम क्षणों में ही गोल की बराबरी कर पाया था। यह गोल येरी मीना ने किया था, जब उसे गोल रेखा पर एक क्रास के बाद सिर से गोल करने का मौक़ा मिला। उसने बड़े संयम से सिर पर आई गेंद को बाएं और नेट में डाल दिया। क्वार्टर फ़ाइनल में इंग्लैंड का मुक़ाबला स्वीडन से होगा, जिसने आज के पहले मैच में स्विट्जरलैंड को एक मात्र गोल से हरा कर 1994 के बाद पहली बार क्वार्टर फ़ाइनल में जगह बनाई है।

यह गोल एमिल फ़ोर्सबर्ग ने किया था। स्विट्जरलैंड ने अपेक्षाकृत आक्रामक और बढ़िया खेल का प्रदर्शन किया, पर स्वीडन की रक्षा पंक्ति ने एक मज़बूत दीवार का काम किया। खेल के66वें मिनट में एमिल फ़ोर्सबर्ग ने बाक्स के ऊपर एक के बाद एक पास के दौरान चंद्राकार से बंदियां शत लिया था, जो गोलरक्षक को छकाता हुआ नेट में चला गया। यों स्विटजरलैंड को बेहतर गेंद नियंत्रण (64-36) और गोल के लिए 18 मौक़े मिले, पर भाग्य आज उसके साथ नहीं था।

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