बारिश में विलम्ब से किसानों में मायूसी

रीवा । प्रदेश के कुछ हिस्सों में भले ही अब तक औसत और औसत से अधिक बारिश हुई हो, रीवा जिले में बारिश की स्थिति अब तक चिंताजनक बनी हुई है। सबसे अधिक चिंता अन्नदाता के लिए है।
किसान आसमान की तरफ टकटकी लगाए हुए हैं कि कब बारिश हो और वह लेउ तथा रोपा लगाएं। कुछ किसान तो मायूस होकर झुरिया की ही खेती कर रहे हैं। पिछले दो तीन दिनों से काफी किसान 80 से 90 दिवस में पकने वाली धान जैसे आई आर 50, 64, 1010, लोचई, नीलम, थ्री आदि धानों की बुवाई करने लगे हैं। यह धान के बीज परंपरागत तरीके से बोए जा रहे हैं। धान का सूखे खेतों में छिटाव करने के बाद ट्रेक्टर से जुताई की जा रही है। खेतों में दूर दूर तक कहीं पानी के नामोनिशान नहीं है।

इस वर्ष अब तक जिले में बारिश नहीं हुई है। कुछ इलाकों में हल्की-फुल्की बारिश हुई भी है तो ऐसे में किसानों के लिए जो विकल्प बचा हुआ है, वह मात्र झुरिया की खेती का ही है। सूखे खेत में बीज डालकर हल चलाना झुरिया खेती कहलाता है। झुरिया खेती के लिए पानी की कम मात्रा भी ठीक रहती है। 

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