लोकसभा चुनाव में विकलांग मतदाताओं की सौ प्रतिशत सहभागिता पर चुनाव आयोग ने बनाई योजना

शिमला। भारतीय चुनाव आयोग द्वारा आगामी लोकसभा चुनाव में विकलांग मतदाताओं की 100 प्रतिशत सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए तैयार की गई व्यापक रणनीति के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश में भी अनेक कदम उठाए जाएंगे।
इनमें विशेष मोबाइल ऐप लॉन्च करना, सभी शैक्षणिक संस्थानों में चुनाव साक्षरता क्लब बनाना एवं उनमें विकलांगों को जोडऩा, दृष्टिबाधित मतदाताओं को ब्रेल लिपि में वोटर पहचान पत्र देना और ज्यादा विकलांगता वाले सभी मतदाताओं को घर से मतदान केंद्र तक लाने-ले जाने के लिए यातायात की सुविधा देना आदि शामिल है।
दिल्ली में चुनाव आयोग द्वारा ‘सुगम्य निर्वाचन’ पर आयोजित पहले राष्ट्रीय कंसल्टेशन में हिमाचल प्रदेश का प्रतिनिधित्व करके लौटे उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. अजय श्रीवास्तव ने यह जानकारी दी। यह कार्यक्रम 3 व 4 जुलाई को आयोजित किया गया, जिसमें भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ओपी रावत, निर्वाचन आयुक्त अशोक लवासा एवं अशोक सूरी एवं वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त उमेश सिन्हा दोनों दिन शामिल रहे।
सभी राज्यों व केंद्र शासित क्षेत्रों से एक-एक विकलांगता विशेषज्ञ और राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारी भी अपनी तरह के इस पहले आयोजन में शामिल हुए।
प्रो. अजय श्रीवास्तव ने बताया कि सभी राज्यों के विकलांगता विशेषज्ञों के सहयोग से मंथन कर बाधारहित चुनावों के लिए एक राष्ट्रीय रणनीति तैयार की गई। ‘कोई भी मतदाता न छूटे’ के घोष वाक्य के साथ यह तय किया गया कि लोकसभा चुनाव और भविष्य के सभी विधानसभा चुनावों में मतदान केंद्रों के भवनों को बाधारहित बनाया जाएगा। चुनाव जागरूकता सामग्री ब्रेल में भी छापी जाएगी।
इसके अलावा आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके सूचनाओं को सुगम्य बनाया जाएगा। एक मोबाइल ऐप लॉन्च करना भी इसमें शामिल है।
उन्होंने बताया कि चुनाव आयोग की रणनीति के तहत सभी शैक्षणिक संस्थानों में निर्वाचन साक्षरता क्लब बनाकर 14 से 18 वर्ष के बीच के भावी मतदाताओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़ऩे के लिए तैयार किया जाएगा। इससे अधिक आयुवर्ग के विद्यार्थियों को वोटर के तौर पर अपना नाम पंजीकृत कराने तथा वोट डालने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
इन क्लबों में दृष्टिबाधित, शारीरिक विकलांग, मूकबधिर, थैलेसेमिक बच्चों एवं अन्य विकलांग विद्यार्थियों को प्रमुखता से शामिल किया जाएगा। यही नहीं, विकलांग युवाओं में से ‘यूथ आइकॉन’ और ब्रांड अम्बेसडर भी नियुक्त किए जाएंगे। इससे विकलांगजनों एवं अन्य युवाओं को मतदान के लिए प्रेरित किया जाएगा।

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