याद कीजिए वो खास पल जब भारत के जांबाज़ों ने रचा था इतिहास

साल 2018 में पोखरण परमाणु परीक्षण-2 के 20 वर्ष पूरे हुए हैं। इस घटना भारत को एक परमाणु महाशक्ति के रूप में पेश किया था। अब नए इंडिया का ब्लाकबस्टर मूवी चैनल एंड पिक्चर्स शनिवार, 22 सितंबर को रात 8 बजे फिल्म ‘परमाणु – द स्टोरी ऑफ पोखरण‘ के प्रीमियर के जरिए इन्हीं गुमनाम नायकों की कहानी करने जा रहा है, जिन्होंने इतिहास रचने का साहस किया यानी ‘देश के वो जांबाज़ जिन्होंने बदला इतिहास‘। अभिषेक शर्मा के निर्देशन में बनी इस फिल्म में जॉन अब्राहम, बोमन ईरानी, डायना पेंटी और अनुजा साठे समेत कई अन्य कलाकारों ने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। यह फिल्म भारत के दूसरे परमाणु मिशन से जुड़ी सच्ची घटनाओं से प्रेरित है। 1998 में पोखरण में भारतीय सेना ने देश के भावी राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के नेतृत्व में गुप्त रूप से यह मिशन पूरा किया था। उस समय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का कार्यकाल था।
फिल्म ‘परमाणु‘ कुछ छिपी सच्चाइयों और नाकामियों की तरफ इशारा करती हैं, जिन पर किसी ने भी ध्यान नहीं दिया था। साथ ही यह उस प्रयोग में शामिल गुमनाम हीरोज़ को याद करती है, जिसने भारत को एक परमाणु महाशक्ति के रूप में स्थापित किया था। इस फिल्म में कलाकारों के शानदार अभिनय के साथ-साथ जबर्दस्त रोमांच भी है, साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के भावुक भाषण की ओरिजिनल न्यूज फुटेज और अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो के भाषणों के अंश भी शामिल किए गए हैं।
वर्ष 1995 में जब चीन के परमाणु परीक्षण की चर्चा हो रही थी, तब आईएएस ऑफिसर अश्वत राणा (जॉन अब्राहम) ने सलाह दी कि भारत को भी एक परमाणु शक्ति बनना चाहिए। हालांकि उनकी योजनाओं का पालन पूरी तरह नहीं किया गया जिसके कारण 1995 में पोखरण में हुए परमाणु परीक्षण नाकाम रहे। उधर अमेरिका ने भी भारत पर कई प्रतिबंध लगा दिए। इसके बाद साल 1998 में जब सरकार बदलती है, तो नए प्रधानमंत्री और उनके प्रधान सचिव हिमांशु शुक्ला (बोमन ईरानी) अश्वत को बुलाकर इस मिशन को दोबारा शुरू करने को कहते हैं। इस मिशन के लिए टीम का गठन करने के लिए महाभारत से प्रेरणा ली जाती है। जिस तरह पांच पांडव और भगवान श्रीकृष्ण मिलकर 100 कौरवों पर विजय हासिल करते हैं, इसी तरह अश्वत भी 5 सदस्यों की टीम का गठन करते हैं और पोखरण में दूसरी बार परमाणु परीक्षण करने के लिए सभी को एक कोड नेम देते हैं। जब गतिविधियां तेज होती हैं, तो अमेरिका और पाकिस्तान के जासूस अपनी सरकारों को आगाह करने की कोशिश करते हैं। हालांकि सफलता की राह में आगे कई मुश्किलें आती हैं, जिसमें सीआईए, अश्वत का परिवार और गठबंधन सरकार की राजनीतिक अस्थिरता जैसी दिक्कतें शामिल होती हैं।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY