उम्‍मीदवार टिकट मिलने से पहले बागियों से खौफजदा

होशंगाबाद । भाजपा और कांग्रेस में बेशुमार बागियों का खौफ उन उम्‍मीदवारों को सता रहा है, जो टिकट की दौड में है और उन्‍हें भय है कि ये बागी राजनीति का खेल बिगाडकर उनका तथा पार्टी का गणित बिगाड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।

देखा जाये तो होशंगाबाद, सिवनीमालवा, सोहागपुर एवं पिपरिया सीट पर कांग्रेस के समीकरण पार्टी के बगावती लोगों ने बिगाड़कर इस पार्टी को बैकपुट पर ला खड़ा किया है। वहीं इस बार लोगों की यह धारणा भी ध्‍वस्‍त हो गयी जिसमें कहा जाता है कि भाजपा में बगावत नहीं होती, लेकिन जिस तरह होशंगाबाद में वर्तमान विधायक डाक्‍टर सीताशरण शर्मा की अपनी ही पार्टी के लोगों और नगरपालिका अध्‍यक्ष अखिलेश खण्‍डेलवाल सहित जिला सहकारी बैंक अध्‍यक्ष भरतसिंह राजपूत को शह और मात देने का काम किया है, उससे स्‍पष्‍ट हो गया है कि अब भाजपा भी इस बार अपने ही लोगों से कड़ी चुनौती झेलने को विवश होगी। कांग्रेस ने भाजपा से निष्‍कासित पूर्व विधायक एवं डाक्‍टर सीताशरण शर्मा के भाई गिरिजाशंकर शर्मा को टिकट देने की वकालत सुरेश पचौरी और दिग्विजय सिंह खेमे से की है, तब से यह परिवार बैकफुट पर आ गया है, डा. सीताशरण शर्मा भले ही विधानसभा अध्‍यक्ष बन गये हों, लेकिन उन्‍होंने अपने पद एवं गरिमा पर अपने भतीजे पीयूष शर्मा जो कांग्रेस से आये हैं, को भाजपा में स्‍थान देने के बाद उनकी राजनीति स्‍थापित करने के लिये पार्टी के लोगों को नाराज किया और गुटबाजी को बढावा देकर पार्टी को नुकसान पहुंचाया है।
हाल ही में सिवनीमालवा सीट से भाजपा में अब तक अविजित रहे सरताज सिंह ने मीडिया के समक्ष यह कहकर कि भाजपा में उनका दम घुट रहा है, यह दोहरे चरित्र की पार्टी है, अब इस पार्टी का संगठन पहले जैसा नहीं रहा और यहॉ अच्‍छे लोगों की पूछ नहीं है। अब तक टिकट की मांग करने के बाद शनिवार को सिवनीमालवा के विधायक एवं पूर्व मंत्री सरताजसिंह ने आगे चुनाव न लड़कर राजनीति से सन्‍यास लेने की बात कह डाली। वहीं होशंगाबाद विधायक डा. सीताशरण शर्मा भाजपा की उम्‍मीदवारी तो करते हैं, पर वे होशंगाबाद सीट पर उनके सामने अपने भाई पूर्व विधायक गिरिजाशंकर शर्मा से कांग्रेस से टिकट मिलने पर सामना करने को तैयार नहीं है, ऐसी स्थिति में भाजपा से उनकी टिकट कटने की अटकले हैं और होशंगाबाद से सोहागपुर विधायक विजयपाल को टिकट देकर सोहागपुर से पहली बार महिला प्रत्‍याशी के रूप में राजो मालवीय को टिकट दिये जाने की संभावना है। यह इससे भी पुष्‍ट होता है कि राजो मालवीय अपने क्षेत्र में दौरा कर भ्रमण में लगी हैं।

होशंगाबाद जिले में बागियों ने कैसे बिगाड़े दिग्‍गजों के भाग्‍य –

पिछले 5-6 चुनावों में साल 1990 से देखा जाये तो होशंगाबाद विधानसभा से विनय दीवान और इटारसी विधानसभा से विजय दुबे काकू भाई मैदान में थे जिनके खिलाफ कॉग्रेस के बागी रहे जिनमें गोप पहलवान को जितने वोट मिले थे उतने से कांग्रेस के विजय दुबे काकू भाई चुनाव हार गये थे और होशंगाबाद सीट पर कांग्रेस के बागी शरीफ राईन के कारण देनवा के गांधी कहाये जाने वाले विनय दीवान को चुनाव हारना पडा था।
अगर वर्ष 1993 के विधानसभा चुनावों की बातें की जाये तो गजेन्‍द्रसिंह पटेल को निर्वाचन अधिकारी की चूक का लाभ मिलने से पार्टी का चुनावचिन्‍ह आवंटित हो गया था जिसके कारण चुनाव बढ़ाये गये थे। चुनाव परिणाम के समय होशंगाबाद सीट पर मतदान होने पर कांग्रेस की जीत होने पर कांग्रेस के अम्बिका शुक्‍ला सहजता से चुनाव जीत गये थे और मधुकर राव हर्णे की हार का कारण भाजपा के बागी निर्दलीय गजेन्‍द्रसिंह का चुनाव लड़ना था जिनके वोट कटने के कारण भाजपा जीती हुई इस सीट को हा गयी थी।
इसी प्रकार वर्ष 1998 के चुनाव थे जिसमें भाजपा के बागी प्रशांत तिवारी ने निर्दलीय चुनाव लडकर कुल्‍हाडी चुनाव चिन्‍ह से 13000 से अधिक वोट प्राप्‍त किये परिणाम स्‍वरूप भाजपा के वरिष्‍ठ नेता मधुकर राव हर्णे की महज 13 वोटों से हार हुई और उस समय कांग्रेस की श्रीमतिसविता दीवान शर्मा यह चुनाव जीती, स्‍पष्‍ट है बागियों के कारण उम्‍मीदवारों पर संकट आया है।
वर्ष 2003 के चुनाव पर नजर डाले तो पिपरिया विधानसभा सीट पर स्‍थानीय दंबग नेता अर्जुन पलिया ने कांग्रेस से टिकिट मॉगा लेकिन उनकी दावेदारी को निरस्‍त कर पूर्व सांसद रामेश्‍वर नीखरा को टिकिट दिया गया तब पलिया ने सपा का दामन थामकर चुनाव लडाऔर जीत दर्ज की तब कांग्रेस के नेता नीखरा तीसरे नंबर पर रहे थे। साल 2008 में हुये विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के दिग्‍गज नेता हजारीलाल रघुवंशी जो अब तक एक भी बार चुनाव नहीं हारने का रिकार्ड रखे हुये थे को उनकी ही पार्टी के बागी उम्‍मीदवार हरिपटेल के 8 हजार से ज्‍यादा वोटों को काटने के कारण भाजपा के सरताजसिंह से उतने ही वोटों से हार का मुंह देखना पड़ा।

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