उल्लास में हुआ बाल फ़िल्म हीरे की तितली का प्रदर्शन

भोपाल| मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में प्रत्येक गुरुवार को आयोजित बाल फ़िल्मों के प्रदर्शन की साप्ताहिक श्रृंखला ‘उल्लास’ में आज शांति पी. चौधरी द्वारा निर्देशित बाल फ़िल्म ‘हीरे की तितली’ का प्रदर्शन संग्रहालय सभागार में हुआ|
यह फ़िल्म पिशी माँ और हीरे की तीतली के इर्द गिर्द घूमती है| फ़िल्म की शुरुआत पिशी माँ से होती है, जो अपने छोटे भाई गणेश घोष के घर जा रही हैं| पिशी माँ वहाँ पहुँचकर हीरे की तीतली को एक गमले में छुपा देती हैं, लेकिन एक व्यक्ति अनजाने में, उस गमले को ले जाता है| फिर गमला कभी इधर तो कभी उधर सभी के पास जाता रहता है, परन्तु सभी अनजान हैं कि इसमें हीरे की तीतली है| फ़िल्म के अंत में पिशी माँ को पुनः वह हीरे की तीतली मिल जाती है| इसी के साथ फ़िल्म का अंत होता है| यह फ़िल्म जीवन के विभिन्न आयामों के प्रति दर्शकों को सकारात्मक सोच रखने और लालच न करने की प्रेरणा देती है| इस फ़िल्म की अवधि लगभग 1 घंटा 58 मिनट है|
शांति पी. चौधरी भारतीय फ़िल्मी जगत के जाने माने निर्देशक हैं| शांति पी. चौधरी ने इस फ़िल्म का निर्माण सन् 1980 में चिल्ड्रेन फ़िल्म सोसाइटी के सहयोग से किया|

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