जिस सीट पर सिंधिया के चर्चे, वहां मुस्लिम विवादों के दर्रे

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बहुत चर्चा है कि इस बार कांग्रेस के दिग्‍गज नेता ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया विधानसभा चुनाव में उतरेंगे। आकलन है कि मालवा क्षेत्र में सिंधिया परिवार के दबदबे का फायदा उठाने के लिए ज्‍योतिरादित्‍य गुना की चंदेरी के साथ मालवा की किसी एक सीट पर चुनाव लड़ेंगे और यह सीट उज्‍जैन उत्‍तर होगी। उज्‍जैन उत्‍तर वह सीट है जहां महाकाल मंदिर आता है और इस सीट पर वर्तमान में मंत्री पारस जैन विधायक हैं। यह मुस्लिम बहुल सीट है और मुस्लिमों का हमेशा कांग्रेस का समर्थन रहा है। इस बार कुछ नाराज इमामों ने मुस्लिम उम्‍मीदवार की मांग रखी है। यह गुपचुप रखी गई यह मांग अब मुखर हो रही है। ऐसे में मंत्री पारस जैन तो ठीक इस सीट से यदि सिंधिया मैदान में होते हैं तो मुस्लिमों को संतुष्‍ट करना बड़ी चुनौती होगी।

कुछ दिनों पहले मंदसौर सर्किट हाउस में पत्रकारों से चर्चा में सिंधिया ने विधानसभा चुनाव लड़ने की संभावना पर कहा था कि अगर कार्यकर्ताओं की इच्छा हुई तो वह उज्जैन संभाग की किसी भी सीट से चुनाव लड़ने को तैयार है। इसके बाद कहा गया कि सिंधिया उज्जैन (उत्तर) विधानसभा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार होंगे। इसलिए कि उज्जैन पुरानी सिंधिया रियासत का हिस्सा रहा है, यहाँ से उन्हें चुनाव लड़ाया जाता है, तो इसका प्रभाव पूरे मालवा-निमाड़ पर पड़ेगा। उज्जैन (उत्तर) से अभी भाजपा के पारस जैन विधायक हैं। इस सीट में वोटों का गणित समझा जाए तो यहां 2 लाख 20 हजार मतदाता हैं। इनमें से 65 हजार मुस्लिम, 40 हजार ब्राह्मण, 35 हजार जैन, करीब 20 हजार अजा तथा शेष अन्‍य हैं। मंत्री जैन ने नगरीय निकाय चुनाव में क्षेत्र से 5 मुस्लिमों को पार्षद टिकट दिलवा कर अपना पाया मजबूत कर लिया था। मगर सपाक्‍स के सक्रिय होने के बाद राजनीतिक समीकरण एकदम बदल गए। सूत्रों के अनुसार कुछ इमामों ने एकजुट हो कर मुस्लिम उम्‍मीदवार की मांग उठा दी। यह मांग आम आदमी पार्टी से विनोद शर्मा का टिकट पक्‍का होने के बाद अधिक तीव्र हुई।

असल में, यहां आप से नासिर बेलिम का टिकट पक्‍का था मगर अंतिम समय में आप ने विनोद शर्मा को अपना उम्‍मीदवार बना दिया। पूरी तैयारी कर चुके बेलिम का टिकट कटने पर उन्‍हें कांग्रेस की नीतियों से खफा इमामों का साथ मिल गया है। माना जा रहा है कि बेलिम निर्दलीय उम्‍मीदवार बन उतरेंगे और उन्‍हें इन नाराज इमामों का साथ मिलेगा। ये इमाम अजा मतदाताओं को अपने साथ लाने का प्रयास कर रहे हैं। 2 अप्रैल के बंद के दौरान दिखाई दी मुस्लिम-दलित एकता तथा सपाक्‍स की उपस्थित से यह गठबंधन होने के आसार हैं। ऐसे में सिंधिया भले मैदान में न आ कर अपने समर्थक राजेन्‍द्र भारती को भी टिकट दिलवाते हैं तो उन्‍हें तगड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा।

इनका कहना है :

विवाद तो नहीं है लेकिन हम चाहते हैं कि कांग्रेस सहित अन्‍य पार्टियां मुस्लिम बहुल क्षेत्र में मुस्लिम उम्‍मीदवार खड़े करें। पार्टियां भेदभाव न करें। उन्‍हें सभी को एक चश्‍मे से देखना चाहिए। – खिलीकर्रहमान, शहर काजी, उज्‍जैन

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