नवीन न्यायालय भवन चंदेरी को लोकार्पण का इंतजार

चंदेरी । विगत 4 वर्षों से नवीन न्यायालय भवन चंदेरी का निर्माण कार्य चल रहा है जिसमें वर्तमान न्यायालय भवन की असुविधा को देखते हुए नवीन न्यायालय भवन को बनाने के लिए सरकार द्वारा भवन एवं भूमि आवंटित कर ठेकेदारों के माध्यम से नवीन भवन बनाने हेतु आवेशित किया गया और नवीन भवन जो की पूर्णता सर्व सुविधा युक्त है वर्तमान में एक सुव्यवस्थित भवन बनकर तैयार है किंतु क्या कारण है कि करोड़ों रुपए की लागत से तैयार यह भवन आज भी कुछ अव्यवस्थाओं के कारण लोकार्पण के कगार पर नहीं पहुंच पाया है।।
लगभग ₹2करोड़40लाख रुपए की लागत से नवीन न्यायालय भवन का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है किंतु कुछ कमियां होने के कारण उच्च न्यायालय भवन की लागत का रीशेड्यूल तैयार किया गया और उच्च लागत को बढ़ा 3 करोड रुपए से अधिक हो चुकी है और वर्तमान में जब न्यायालय भवन के ठेकेदार नीरव हाथी शाह ने बताया कि हमारे द्वारा भवन का निर्माण कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है और आगामी 15 नवंबर तक इस भवन को सरकार के सुपुर्द कर दिया जाएगा।
एक अन्य विद्युत ठेकेदार यशवंत सेंगर द्वारा बताया गया कि कुछ समय पूर्व हमारा भुगतान नहीं हो पाया था इस कारण काम में अविलंब हुआ है और शीघ्र ही लगभग 15 दिवस के भीतर इस कार्य को पूर्ण कर भवन का लोकार्पण हेतु सरकार को सुपुर्द कर दिया जाएगा।।
नवीन न्यायालय भवन की आवश्यकता।।
अभी हाल ही में कुछ समय पूर्व अपर जिला एवं सत्र न्यायालय की स्थापना होने एवं अन्य व्यवहार न्यायालय वर्ग 1 एवं वर्ग 2 तहसील परिसर चंदेरी में संचालित हैं जिससे न्यायालय की न्यायालय व्यवस्था प्रभावित होती है।
यदि करोड़ों रुपए की लागत से तैयार नवी न्यायालय भवन का लोकार्पण शीघ्र हो जाता है तो इस प्रकार की अव्यवस्था से निजात मिल सकेगा।
तहसील परिसर चंदेरी में न्यायालय भवनों के अतिरिक्त अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय, निर्वाचन विभाग, कोषालय विभाग, खाद्य विभाग, लोक सेवा गारंटी केंद्र, स्टांप वेंडरों की बैठक व्यवस्था ,रजिस्ट्रार कार्यालय एवं अन्य विभाग भी उसी छोटे से परिसर में संचालित है जिस कारण भीड़ अधिक मात्रा में एकत्रित हो जाती है और न्यायालय व्यवस्था से जुड़े पक्षकारों को इधर-उधर बैठक व्यवस्था ना होने के कारण, उचित पेयजल व्यवस्था ना होने के कारण इधर उधर भटकना पड़ता है।
साथ ही अभिभाषको को भी बैठक व्यवस्था के अभाव में परेशानी का सामना करना पड़ता है साथ ही न्यायालय संचालित होने के लिए भी उचित वातावरण युक्त कक्षों से काम चलाना पड़ता है जिसमें न्यायालय प्रक्रिया से जुड़े सभी अधिकारी एवं कर्मचारियों के ऊपर शांतिपूर्ण वातावरण के अभाव में प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है यदि इस नवीन न्यायालय भवन का लोकार्पण शीघ्र हो जाता है तो इन सभी समस्याओं से निजात मिल सकेगी।
नवीन न्यायालय भवन की विशेषताएं
नवीन न्यायालय भवन में विशाल भवन परिसर शांतिपूर्ण वातावरण अभिभाषकों के लिए मीटिंग हॉल पृथक से अभिभाषक केंपस न्यायाधीशों के लिए प्रथक प्रथक सर्व सुविधा युक्त चेंबर प्रथक न्यायालय व्यवस्था हवा ,बिजली ,पानी ,की उचित व्यवस्था।
गौरतलब यह है कि चंदेरी में भव्य न्यायालय भवन जब निर्माण प्रक्रिया पूर्ण कर चुका है तब इसका लोकार्पण अविलंब किया जाना नितांत आवश्यक है जिससे अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय तथा अन्य व्यवहार न्यायालय वर्ग 1 एवं वर्ग 2 व्यवस्थित रूप से अपने नवीन भवन में संचालित हो सके और करोड़ों रुपए की लागत से निर्मित भवन अपने वास्तविक रूप को प्रदर्शित कर सके
इनका कहना है।।
(1) न्यायालय भवन का टेंडर जब हुआ था तब उस भवन की लागत दो करोड़ चालीसलाख रूपये थी किन्तु कार्य बढ़ने से टेंडर का रीशेड्यूल हुआ और यह राशि 3 करोड़ से अधिक हो गई थी हमारे द्वारा कार्य 15 नवंबर तक पूर्ण करके भवन सरकार को सुपुर्द कर दिया जायेगा ।
सिविल ठेकेदार नीरव हाथीशाह

(2) कार्य का भुगतान समय पर ना होने के कारण अभी कुछ समय के लिए कार्य रोका गया था किंतु अब अगले 15 नवंबर तक समस्त कार्य पूर्ण कर भवन सुपुर्द कर दिया जायेगा।
विद्युत ठेकेदार यशवंत सेंगर
अभिभाषक संघ के अध्यक्ष एडवोकेट अशोक शर्मा ने बताया कि
व्यवहार न्यायधीश वर्ग 1,2के न्यायालय चन्देरी में स्थापित हैं इसी वर्ष लंबे प्रयास के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायालय स्थापित हुआ है जोकि नियमित संचालित है किंतु अपर जिला एवं सत्र न्यायालय में सहायक लोकअभियोजक( एजीपी) की नियुक्ति विधि विभाग भोपाल में अभिभावकों के पैनल से की जाने की प्रक्रिया लंबित है किंतु विधि मंत्रालय द्वारा अध्यक्ष अभिभाषक संघ चंदेरी द्वारा निम्न समस्याओं से अवगत कराने के उपरांत भी उक्त पैनल से कोई भी अधिवक्ता को नियुक्त नहीं किया गया है जिससे प्रचलित प्रकरणों में शासन की ओर से एवं अन्य प्रकरणों में पक्ष समर्थन हेतु नियमित अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश चंदेरी के न्यायालय में सहायक लोक अभियोजक उपस्थित नहीं हो पाते हैं सप्ताह में केवल 3 दिन ही वह उपस्थित होते हैं जिससे प्रकरण की सुनवाई एवं साक्ष्य आदि में एजीपी की उपस्थिति ना होने से पक्षकारों एवं प्रकरणों के निराकरण की कार्यवाही प्रभावित हो रही है

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