बाल स्वयंसेवकों ने नगर में फैलाई हिन्दुत्व की लहर

शाजापुर । मन में देशभक्ति का अपार उत्साह, चाल में सिंह शावकों जैसा जोश व उमंग, हाथों में राष्ट्ररक्षा हेतु दंड तथा गौरवशाली संघ गणवेश धारण किए हुए नन्हे-मुन्ने हिन्दुत्व धर्मध्वज रक्षक बाल शुरवीरों का विशाल काफिला संगठनात्मक एकता के रूप में घोषध्वनी के साथ अनुशासनपूर्ण संदेश दने के लिए जब रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बाल पथसंचलन के रूप में नगर में निकला तो छोटे-छोटे स्वयंसेवकों की विशाल सिंहवाहिनी का शोर्य और सामथ्र्य देखने वालों का रोम-रोम राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत हो गया।

उक्त पथसंचलन सांय 5 बजे स्थानीय किला रोड़ स्थित किला परिसर से प्रारंभ होकर छोटा चौक, आजाद चौक, कसेरा बाजार, पीपली गली, नईसडक़, सोमवारिया बाजार, कंस चौराहा, बालवीर हनुमान मंदिर, वजीरपुरा, धानमंडी चौराहा होते हुए पुन: किला परिसर पहुंचकर सम्पन्न हुआ। पथसंचलन के दौरान छोटे-छोटे बाल स्वयंसेवकों ने अपनी वाहिनी के माध्यम से कदमताल करते हुए अनुशासन और साहस का अतिसुंदर परिचय देकर शहरवासियों का मन मोह लिया। उनकी इस शोर्यपूर्ण राष्ट्रभक्ति को नगरवासियों द्वारा भी अनेक स्थानों पर पुष्पवर्षा कर सम्मानित किया गया।

पथसंचलन के पूर्व संघस्थान पर एकत्रित बाल स्वयंसेवकों की राष्ट्र सेवा को प्रेरित करने के लिए बौद्धिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में नगर बौद्धिक प्रमुख जीवनसिंहजी परिहार ने बाल स्वयंसेवकों को प्रेरणादायी उद्बोधन देते हुए कहा कि मां भारती की भूमि को अपने मस्तक पर शिरोधार्य करने की सनातन परम्परा सदैव सपूतों का यशगान करती रही है। मातृभूमि की रक्षा के लिए जहां वीर शिवाजी और महाराणा प्रताप जैसे वीर योद्धाओं ने भीषण संघर्ष करते हुए इतिहास की नई गाथाएं रची वहीं सनातन हिन्दू परम्परा को निभाते हुए मां भारती के वैभव को उन्नत करने का संकल्प लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनगिनत स्वयंसेवकों ने भी अपना सर्वस्व इस देवभूमि को अर्पण कर दिया। राष्ट्र सेवा से बढक़र कोई दूसरा कर्तव्य नहीं है, इसलिए हमें अपनी मातृभूमि के उत्थान और कल्याण के साथ मानव समाज के हित हेतु जो भी प्रयास हो सके निरन्तर करना चाहिए। बौद्धिक कार्यक्रम के दौरान मंचासीन अन्य अतिथियों के रूप में मा.नगरसंघचालक रामकृष्णजी गोठी एवं सांयभाग सहकार्यवाह प्रफुल्लजी गवली भी उपस्थित थे। बौद्धिक कार्यक्रम के पश्चात् घोषध्वनी पर लयबद्ध कदमताल के साथ विशाल पथसंचलन प्रारंभ किया गया।

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