मप्र वनाधिकार अधिनियम लागू करने वाला देश का पहला प्रदेश

भोपाल : मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज ग्वालियर में एकता परिषद के कार्यक्रम में बताया कि देश में वनाधिकार अधिनियम लागू करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला प्रदेश है। मध्यप्रदेश में अभी तक 2 लाख 25 हजार से भी अधिक वनवासियों को वनाधिकार पट्टे प्रदान किये जा चुके हैं। अकेले डिण्डोरी जिले में विशेष अभियान चलाकर अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों को 23 हजार हेक्टेयर जमीन के पट्टे दिये गये हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने प्रदेश के हर जरूरतमंद व्यक्ति को आवासीय जमीन उपलब्ध करवाने के लिये विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर अब तक 30 लाख आवासीय पट्टे वितरित कर दिये हैं। श्री चौहान ने बताया कि पिछले 2 साल के भीतर प्रदेश में आवासहीनों के लिये 15 लाख आवास बनवा कर उन्हें उपलब्ध करवा दिये गये हैं। अगले 4 वर्ष में प्रदेश में कोई भी व्यक्ति आवासहीन नहीं रहेगा।

श्री चौहान ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा गरीबों के कल्याण कार्यक्रमों के लिये उनकी आबादी के अनुपात में बजट आवंटन सुनिश्चित किया गया है। मध्यप्रदेश में विभिन्न संगठनों से सलाह-मशवरा करने के बाद भू-सुधार आयोग का गठन किया गया है और महिलाओं को जमीन का उत्तराधिकार देने के बारे में स्पष्ट कानूनी प्रावधान किये गये हैं। उन्होंने कहा कि संबल योजना के रूप में राज्य सरकार ने प्रदेश के प्रत्येक गरीब और जरूरतमंद व्यक्ति के लिये मजबूत सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित की है। इस योजना में हितग्राहियों के बच्चों की पहली कक्षा से उच्च शिक्षा तक की पढ़ाई का पूरा खर्चा राज्य सरकार दे रही है। इन परिवारों को संकट की घड़ी में 2 लाख से 4 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जा रही है। इसी के साथ नि:शुल्क इलाज और रोज़गार भी उपलब्ध करवाया जा रहा है।

एकता परिषद के डॉ. एस.एन. सुब्बाराव ने कहा कि अधिकारों और शक्ति की प्राप्ति बंदूक से नहीं, अपितु त्याग, अहिंसा और शांति से होती है। परिषद के संस्थापक श्री राजगोपाल ने मुख्यमंत्री श्री चौहान की सहज और सुलभ उपलब्धता तथा समय-समय पर दिये गये सहयोग की सराहना की।

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