शक्ति की महिमा पर केन्द्रित समारोह सिद्धा 12 अक्टूबर से

भोपाल। संस्कृति विभाग द्वारा नवरात्रि के अवसर पर शक्ति की महिमा पर केन्द्रित एक तीन दिवसीय सांस्कृतिक समारोह का आयोजन जनजातीय संग्रहालय में किया जा रहा है। आदिवासी लोककला एवं बोली विकास अकादमी के संयोजन में आयोजित इस समारोह का शुभारम्भ 12 अक्टूबर को शाम 6:30 बजे मुक्ताकाश मंच पर होगा।

विभाग पहली बार यह प्रयोग करने जा रहा है जिसमें देश के सुप्रतिष्ठित कलाकार सहभागी होने जा रहे हैं। गायन एवं शास्त्रीय नृत्यों के माध्यम से सिद्धिदात्री की महिमा की अभिव्यक्ति का यह तीन दिवसीय पर्व भोपाल एवं उज्जैन में क्रमशः होगा तथा यहाँ प्रस्तुति देने वाले कलाकार अगले दिन उज्जैन के सिद्धा समारोह में प्रदर्शन करेंगे। 12 अक्टूबर को पहले कोलकाता के सुविख्यात कलाकार नभोदीप चक्रवर्ती माता चण्डी के गीत एवं श्यामा संगीत की अभूतपूर्व रचनाओं को संगीतमय करेंगे। उनकी प्रस्तुति के उपरान्त भरतनाट्यम की विख्यात नृत्यांगना लता सिंह मुंशी द्वारा देवी के स्वरूप सती पर केन्द्रित नृत्य नाटिका स्वयं सहित शिष्याओं के साथ प्रस्तुत करेंगी। पुराणों में सती की कथा को भरतनाट्यम शैली में उनके द्वारा विभाग के लिए तैयार किया गया है।

समारोह के दूसरे दिन 13 अक्टूबर को शाम 6;30 बजे पहले उदयपुर की कलाकार नेहा चारण द्वारा अपने साथियों के साथ चिरजा गायन प्रस्तुत किया जायेगा। चिरजा गायन में देवी की महिमा को आंचलिक गीत एवं संगीत के माध्यम से वे अभिव्यक्ति देंगी। इसके उपरान्त खैरागढ़ से रायगढ़ घराने की निष्णात कथक नृत्यांगना एवं गुरु माण्डवी सिंह इन्दिरा कला एवं संगीत विवि खैरागढ़ के कलाकारों के साथ साध्वी पर एकाग्र देवी के स्वरूप एवं प्रचलित कथा पर नृत्याभिव्यक्ति देंगी।
समारोह के तीसरे एवं अन्तिम दिन 14 अक्टूबर को शाम 6:30 बजे देवध्वनि एवं दुर्गा स्तुति के लिए गुवाहाटी की कलाकार मोनी कुन्तला भुयाँ को निमंत्रित किया गया है। वे समूह में देवी वन्दना की प्रभावी अभिव्यक्ति के लिए देश भर में जानी जाती हैं। उनकी प्रस्तुति के बाद कटक की वरिष्ठ ओडिसी नृत्यांगना मीरा दास अपनी शिष्य परम्परा के साथ देवी के प्रचलित एक और स्वरूप भवप्रीता को समूह नृत्य के माध्यम से अपनी नृत्य विधा में प्रस्तुत करेंगी। इस समारोह में प्रवेश निशुल्क है।

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