क्या पिता की हार का बदला ले पाएंगी फातिमा

भोपाल । भाजपा ने भोपाल उत्तर सीट से कांग्रेस के दिवंगत नेता रसूल अहमद सिद्धकी की बेटी फातिमा रसूल सिद्दीकी को उतार कर कांग्रेस के आरिफ अकील के तिलिस्म को तोड़ने की कोशिश की है । फातिमा एक दिन पहले ही दोपहर को भाजपा में शामिल हुई थी और देर रात उन्हें भाजपा ने उत्तर सीट से टिकट थमा दिया। आरिफ अकील 1998से लगातार इस सीट से विधायके हैं । मुस्लिम बाहुल्य इस सीट पर उनकी पकड़ का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि 2013 की मोदी लहर में भी वे अपराजेय रहे ।


फातिमा के पिता रसूल अहमद सिद्धकी 90 के दशक में दो बार कांग्रेस के विधायक रहे ।1992 में जनता दल पार्टी से खड़े आरिफ अकील ने उन्हें हरा दिया था। बाद में आरिफ कांग्रेस में शामिल हो गए । मुस्लिम इलाका होने के कारण यहां से हर दल मुस्लिम उम्मीदवार को ही उतारता रहा है । 1957, 1962, 1967 और 1972 में इसका नाम भोपाल सीट था। जिस पर कम्युनिस्टों का कब्जा था। यह सीट 1977 में अस्तित्व में आई । तब पहली बार चुनाव हुआ । जनता पार्टी के हमीद कुर जीते थे। इस पर चार बार सीपीआई के शाकिर अली ने जीत हासिल की। 1980 और 1985 के चुनाव में कांग्रेस के रसूल अहमद जीते।
1990 में कांग्रेस के उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा और निर्दलीय उम्मीदवार आरिफ अकील ने उन्हें धूल चटा दी। भाजपा का खाता 1993 में खुला। 2008 के चुनाव में आरिफ अकील ने भाजपा के आलोक शर्मा को 4000 से ज्यादा मतों से हराया था। वही 2013 के चुनाव में उन्होंने भाजपा के आरिफ बेग को 6000 से ज्यादा वोटों से परास्त किया।
भोपाल उत्तर सीट का इलाका शहर का सबसे पिछड़ा इलाका माना जाता है । इलाके की जनता मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रही है । इलाके के लोग इसे अपने जनप्रतिनिधि की नाकामी मानते हैं । देखना यह है कि फातिमा रसूल सिद्दीकी अपने पिता की हार का बदला चुनावी जीत के रूप में ले पाती हैं या नही।

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