आईएएस मोहंती : तब ‘विजन’ दिया था, अब ‘वचन’ पूरा करने बन सकते हैं सारथी

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मप्र के मुख्यमंत्री कमलनाथ जब प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष बनाए गए थे तब उनकी कार्ययोजना के बारे में कई सवाल हुए थे। वे हर सवाल के उत्तर में यही कहा करते थे कि मेरे पास वक्त कम हैं और काम कई हैं। अब जब कि कमलनाथ मुख्यमंत्री बन चुके हैं तो उनके पास आराम का मौका नहीं है। अगले आम चुनाव सिर पर हैं और उन्हें उतनी ही रफ्तार से काम करना होगा जितनी तेजी से कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए कार्य किया था। ऐसे में आईएएस सुधी रंजन मोहंती उनकी टीम के वे सारथी हो सकते हैं जो नाथ के ‘मिशन मप्र’ को बेहतर ‘टेकऑफ’ दे सकता है। 31 दिसंबर को प्रदेश के मुख्य सचिव बसंत प्रताप सिंह सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उनके उत्तराधिकारी के रूप में 1982 बैच के आईएएस एसआर मोहंती का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। अतिरिक्त मुख्य सचिव तथा माध्यमिक शिक्षा मंडल के अध्यक्ष मोहंती मप्र के उन अफसरों में शुमार किए जाते हैं जो सदा एक विजन के साथ काम करते हैं। वे जिस भी पोस्ट पर रहे, लक्ष्य तय किया और हर काम उस लक्ष्य को पूरा करने के लिए ही किया। इस कार्यप्रणाली का एक दोष यह है कि धूनी व्यक्ति पर मनमानी और तानाशाह हो जाने का आरोप लग जाता है। अपने संकल्प को पूरा करने में ऐसे व्यक्ति कई महत्व पूर्ण पहलुओं को नजरअंदाज भी करते चलते हैं। मगर वे अपनी टीम के ऐसे ‘मिस्टर रिलायएबल’ होते हैं तो दिए लक्ष्य को पूरा करने के बाद ही चैन लेते हैं।मोहंती के साथ काम करने वाले जानते हैं कि वे जो ठान लेते हैं उसे हर सूरत में करते हैं। उनकी कार्यप्रणाली का एक किस्सा याद आता है। कुछ बरसे पहले उनसे सीहोर की युवती मेघा परमार ने मुलाकात की। साधारण से परिवार में जन्मी मेघा ने सपना भी देखा तो माउंट एवरेस्ट की चोटी पर तिरंगा लहराने का। एवरेस्ट पर जाने के लिए 23 लाख की जरुरत होती है, जिसके लिए मेघा पूरे एक साल तक अलग-अलग सरकारी दफ्तरों में भटकती रही, लेकिन उसे एक रुपए की भी मदद नहीं मिली। मेघा किसी की सलाह पर मोहंती के पास पहुंची। जब उन्होंने मेघा की जिद देखी तो उसे सही रास्ता दिखाया और 23 लाख रुपए जुटाने के लिए एक फंड बनाने का आइडिया दिया। मेघा ने एवरेस्ट फतह किया और मोहंती ने अपनी फितरत को साबित किया कि जो उचित लगा उस काम को हर हाल में पूरा किया।बहुत कम लोग जानते हैं कि पूर्व मुख्यामंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने तीसरे कार्यकाल की शुरुआत में मोहंती को ही मप्र सरकार का ‘विजन डाक्यूमेंट’ बनाने का जिम्मा दिया था। यह बात अलग है कि तंत्र ने उस डाक्यू्मेंट को भूला कर जैसे एक गुनाह ही किया। यह बात स्वीकारने में मोहंती ने कभी गुरेज नहीं किया। सरकार के अपने ही विजन डॉक्यूूमेंट को भूल जाने पर उन्होंने एक परिचर्चा में साफगोई से कहा था कि विकास के लिए सरकार को एक रोडमैप तय कर उस पर काम करना चाहिए। लेकिन हमारे यहां बनाए गए ‘दृष्टिपत्र 2018’ को भी भुला दिया गया है। हम उसे पूरा लागू करने की जगह पंसदीदा मुद्दों पर काम करने लगते हैं। कभी उद्योग की चिंता करते हैं तो कभी कृषि को बढ़ावा देने लगते हैं। कभी चौक की सड़क की बात करते हैं तो कभी किसी अस्पताल में सुधार पर ध्यान देते हैं। हम परिस्थितियों पर प्रतिक्रिया देते हैं। यह तरीका ठीक नहीं है। कार्यप्रणाली के इस दोष को रेखांकित करते हुए मोहंती ने गुजरात और ओडिसा का उदाहरण दिया था। जैसे, एक कैंसर रोग विशेषज्ञ ने मप्र को ढ़ाई साल पहले प्रस्ताव दिया था कि वह जिलों में कैंसर चिकित्सा के विशेष केन्द्र खोलना चाहता है। यह प्रस्‍ताव हमारे यहां फाइलों में ही पड़ा रहा जबकि ओडिसा ने इस पर तुरंत कार्य किया। वहां ये इकाइयां कार्यरत हैं। मोहंती की कार्यप्रणाली को देखते हुए उनका ‘टीम नाथ’ में होना उचित भी लगता है आखिर मप्र में मुख्यमंत्री कमलनाथ को फिलहाल ऐसे ही अफसरों की जरूरत है जो हथेली में सरसों जमा दे।

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