गुरुवार को कांग्रेस प्रत्याशी भोपाल में लेंगे प्रशिक्षण

उज्जैन, । गुरुवार को प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने प्रदेशभर के कांग्रेस प्रत्याशियों को भोपाल बुलाया है। भोपाल में आयोजित बैठक में इन प्रत्याशियों को 11 दिसंबर को होने वाली मतगणना को लेकर प्रशिक्षण दिया जाएगा। वे बातें बताई जाएंगी जहां ध्यान रखकर किसी भी गड़बड़ी को रोकने के लिए वे तैयार हो सकें। इधर जिले के सातों कांग्रेस प्रत्याशी अपने साथ विशेष फाइलें लेकर जा रहे हैं। इन फाइलों में अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र में पार्टी के विरूद्ध काम करने वाले कांग्रेस नेताओं, पार्षदों का ब्यौरा है, ऐसा प्रत्याशियों के नजदीकी सूत्रों का दावा है। हालांकि प्रत्याशी इस संबंध में पूछने पर ठहाका लगा रहे हैं। इस ठहाके में क्या रहस्य छुपा है, वे ही जानें।


प्रदेश कांग्रेस कमेटी को इस बार यह भय सता रहा है कि मतगणना वाले दिन ईवीएम मशीनें धोखा न दे जाएं, गड़बड़ी का शिकार न हो जाएं। यदि ऐसा होता है तो सरकार बनते-बनते कांग्रेस के हाथ से फिसल जाएगी। इसी बात को ध्यान में रखते हुए पहली बार प्रदेश कांग्रेस कमेटी अपने सभी विधानसभा प्रत्याशियों की सामूहिक बैठक गुरुवार को भोपाल में लेने जा रही है। इस बैठक में जिले की सातों विधानसभा सीटों से पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी राजेन्द्र भारती, राजेन्द्र वशिष्ठ, दिलीप गुर्जर, मुरली मोरवाल, रामलाल मालवीय, महेश परमार और सरदारसिंह चौहान शामिल होंगे। सूत्रों के अनुसार कुछ प्रत्याशी बुधवार शाम भी भोपाल रवाना हो गए, वहीं कुछ गुरुवार सुबह रवाना होंगे।


कुछ प्रत्याशी अपने समर्थकों के साथ गए हैं वहीं कुछ अपने एक-दो अभिन्न मित्रों के साथ। इन सभी के पास कुछ दस्तावेज भी रहेंगे, जिनमें अपनी-अपनी विधानसभा सीटों पर पार्टी के विरूद्ध काम करने वाले, भीतरघातियों के बारे में विस्तृत जानकारी होगी।


सूत्र बताते हैं कि कुछ प्रत्याशियों ने अपनी रिपोर्ट के साथ प्रूफ भी नत्थी किए हैं। ताकि उनकी बात को नकारा न जा सके। सूत्र बताते हैं कि कुछ प्रत्याशियों ने तय कर लिया है कि चुनाव तो वे जीत ही रहे हैं, कांग्रेस की सरकार आ ही रही है, ऐसे में भीतरघातियों के खिलाफ पांच साल की निष्कासन कार्रवाई करवाना ही है। इसी आधार पर वे दमदारी के साथ अपनी बात रखने जा रहे हैं। हालांकि इस प्रतिनिधि ने जब चर्चा की तो कुछ प्रत्याशी ठहाका लगाकर हंस दिए। वहीं कुछ ने कहा कि यदि पार्टी के खिलाफ काम किया है तो जवाब देना ही पड़ेगा। साथ ही दावा किया कि हम जीत भी रहे हैं, सरकार भी बना रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार जिले की सातों विधानसभा सीटों में कांग्रेस के विधानसभावार क्षेत्रीय नेताओं में से कुछ ने पार्टी के विरूद्ध काम किया है। इधर असंतुष्टों का कहना है कि उन्होंने पार्टी के विरूद्ध काम नहीं किया बल्कि प्रत्याशी चयन में हुई गड़बड़ी का चुप रहकर विरोध किया है। ऐसे में भीतरघात का प्रश्न ही नहीं उठता।
मतगणना के बाद बूथ अनुसार वोटों का ब्यौरा आने पर तस्वीर साफ हो जाएगी। इधर कुछ ने कहा कि वे अन्य विधानसभा क्षेत्र में काम करने चले गए थे। ऐसे में यह आरोप लगाना कि उन्होंने पार्टी के खिलाफ काम किया है, गलत है। उन्हें प्रत्याशियों के साथ पूर्व से चल रहे वैचारिक विरोध की सजा भीतरघाती के रूप में दिलाने का प्रयास कुछ प्रत्याशी कर रहे हैं। इस सबके बीच नजरें गुरुवार को होने वाली बैठक पर है। यहां प्रत्याशियों की कितनी सुनी जाती है, यह गौरतलब बात होगी। क्योंकि पीसीसी के सभी नेता इस समय प्रत्याशियों को प्रशिक्षित कर उनके क्षेत्र में भेजने तथा 11 दिसंबर के पूर्व हर तरह की लॉबिंग करने में लगे हुए हैं। इसकी पुष्टि पीसीसी के एक बड़े नेता ने की। चर्चा में उनका कहना था कि अभी तो सरकार बनाना मुख्य उद्देश्य है। पार्टी के विरोध में काम करने वालों को बाद में देख लेंगे।
निर्दलीय प्रत्याशी भी कांग्रेस के रडार पर
सूत्रों ने दावा किया उज्जैन उत्तर, उज्जैन दक्षिण और महिदपुर से कांग्रेस के खिलाफ बगावत करके चुनाव लडऩे वाले तीनों निर्दलीय प्रत्याशी भी कांग्रेस के बड़े नेताओं के रडार पर हैं। सूत्रों के अनुसार इन तीनों प्रत्याशियों से भी किसी न किसी स्तर पर बातचीत कर तालमेल बैठाया जा रहा है। ताकि बाजी पलटने पर ये बागी प्रत्याशी विधायक बनें तो कांग्रेस के पाले में ही रहें। सूत्र बताते हैं कि तीन में से दो ऐसे बागी प्रत्याशियों ने समन्वय के लिए हरी झंडी दे दी है। अब बड़े कांग्रेस नेता चुनाव परिणाम के इंतजार में हैं।

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