गैस त्रासदी की 34वीं बरसी पर पीडि़तों ने निकाला जुलूस

भोपाल । विश्व की भीषणतम औद्योगिक त्रासदी माने जाने वाले यूनियन कार्बाइड गैस कांड की 34 वीं बरसी पर सोमवार को राजधानी भोपाल में विभिन्‍न सामाजिक संगठनों एवं गैस पीडि़तों ने मुंह पर काली पट्टी बांधकर और हाथों में मशाल लेकर जुलूस निकाला। हजारों लोगों ने सरकारों के खिलाफ धरना-प्रदर्शन कर मुआवजे की मांग की।
जानकारी के अनुसार राजधानी में सोमवार को सरकारी छुट्टी होने की वजह से सुबह से खासकर पुराने शहर में खामोशी सी छाई रही । एक तरफ जहां सरकारी कार्यालयों में ताले लटके रहे तो दूसरी ओर रोडों पर भी सुनसान छाया रहा। वहीं कुछ जगह गैस पीडि़तों ने हाथों में मशाल जुलूश लेकर धरना प्रदर्शन कर अपना गुस्‍सा निकाला तो कई सामाजिक संगठनों एवं गैस पीडि़तों ने सरकार के खिलाफ जमकर अपना गुस्‍सा भी निकाला।
गैस पीडि़तों का कहना है कि सरकार द्वारा जितना मुआवजा दिया गया है वह मात्र ऊंट के मुह में जीरा है। उनका कहना है कि पीडितों के लिए 25-25 हजार रूपए दिए गए है, जबकि यह राशि लाखों रूपए में आवंटित हुई थी, लेकिन नेताओं और अधिकारियों की मिलीभगत से पैसों का बंदरबांट कर लिया गया। वास्‍तविक गैस पीडि़तों के आज तक मुआवजा नहीं दिया है।
गौरतलब है कि 34 साल बीत गए हैं, हजारों पीडि़त अब भी उन गुनाहगारों को सजा मिलने के इंतजार में हैं जिनकी वजह से यहा यूनियन कार्बाइड कारखाने से जहरीली गैस मिथाइल आइसोसाइनेट का रिसाव हुआ और हजारों लोग मौत के मुंह में चले गए। सरकारी आंकड़ों में महज पांच हजार की मौत बताते हैं, लेकिन गैस संगठनों से जुड़े लोगों को कहना है इसमें करीब दस हजार से ज्‍यादा लोगों की मौत हो गई थी जबकि हजारों जानवर भी मौत के आगोश में समा गए थे।
वहीं सरकार की उदासीनता के चलते राजधानी भोपाल के कार्बाइड परिसर में पड़े कचरे को आज तक नष्ट नहीं किया जा सका है और निकट भविष्य में इसके निपटान की कोई उम्मीद भी नजर नहीं आ रही है। कई सरकार आई और कई गई, परंतु कचरा जहां था वहीं है।
1984 की 2 और 3 दिसंबर की दरम्यानी रात्रि में मिक के रिसाव से प्रभावित हजारों व्यक्ति आज भी उसके दुष्प्रभाव झेलने को मजबूर हैं। उस त्रासदी की वजह से सबसे ज्यादा पीड़ा शायद महिलाओं को ही उठानी पड़ी थी। महिलाओं को अपने पिता, पति और पुत्र के रूप में सैकड़ों लोगों को खोना ही पड़ा, लेकिन अनेक महिलाओं को हमेशा के लिए मातृत्व सुख से भी वंचित रहना पड़ा। भोपाल के कार्बाइड परिसर के आसपास की अभी भी कॉलोनियों के कुंआ और हेंडपंपों से दूषित पानी निकलता, हालांकि पिछले डेढ़ सालों से सरकार द्वारा कोलार के पानी की सप्‍लाई की जा रही है जिससे पानी की तो सुविधा हो गई है, लेकिन उचित इलाज नहीं मिलने से पीडि़त अभी परेशान हैं। गैस पीडि़तों का कहना है कि जब भी अस्‍पताल में जाते है वहां डाक्‍टरों द्वारा महज दो गोली थमा देते हैं। जवाब में कहते हैं कि अभी बड़े डाक्‍टर नहीं है।
पहचान कर रहे थे। यह मंजर ऐसा था जो जिंदगी भर याद रहेगा।

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