ताक पर नियम निर्देश, जांच की फुर्सत नहीं

हरदा । जिला स्वास्थ्य महकमा ने निजी अस्पतालों को मरीजों से लूट की खुली छूट रखी है। आधी अधूरी सुविधाओं के बीच संचालित निजी नर्सिंग होम्स में बड़े शहरों की तर्ज पर सेवा शुल्क तो लगता है लेकिन सुविधाओं की अनेदखी की जा रही है। विभागीय अधिकारियों को अब इतनी भी फुर्सत नही कि ये साल 6 महीने में कभी दो पांच मिनट ऽभी अस्पताल का औचक निरीक्षण कर सकें। आलम यह है कि नगर व आसपास संचालित निजी अस्पताल संचालक ने शासन की तय गाइडलाइन को दरकिनार करते हुये अपने बनाये नियम ही अमल में लाये जा रहे है। मरीजों को गैरजरूरी सेवाओं के नाम पर भी लंबी रकम ऐंठी जा रही है। मेडीसन के खुले विकल्पों के बावजूद ज्यादातर मोटा कमीशन देने वाली कंपनियों की ही दवायें लिखी जा रही है। दरअसल कई बार यह पढ़ने-सुनने में आदा कि अब शासन द्वारा निजी अस्पतालों की मनमानी पर अब शिकंजा कसा जाएगा। बेहतर इलाज के नाम पर मरीजों से लगातार मिल रही लूट-खसोट की शिकायतों के बाद सूबे के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने हर महीने आॅनलाइन जानकारी उपलब्ध कराने के दिशा-निर्देश तो दिये गये थे जिसकी खानापूर्ति घालमेल से की जा रही है। पालन न होने की स्थिति में संचालक पर जुर्माना के साथ ही प्रकरण दर्ज करने के दिशा-निर्देश थे लेकिन आज तक किसी भी अस्पताल की धांधली या अनियमितता उजागर नहीं हुई। गौरतलब है कि सरकारी अस्पतालों में साधन संसाधनों की उपलब्धता के बावजूद मरीजों का संतोषजनक इलाज न होने की स्थिति में निजी नर्सिंग होम चांदी काट रहे है। लेकिन मरीजों की ठीक से देखभाल न करने के एवज में इन निजी अस्पतालों द्वारा इतनी ऊंची कीमत वसूली जा रही है जिससे प्रभावित विसंगतियों के मद्देनजर शासन द्वारा फैसला तो लिया गया लेकिन उसका पालन होता नजर आ रहा है। नियमों की अनदेखी करने वाले नर्सिंग होम्स पर संचालनालय स्वास्थ्य द्वारा सख्ती बरतने के निर्देश दिये गये थे। नर्सिंग होम्स एक्ट के तहत निजी अस्पतालों को अब आॅनलाइन साफ्टवेयर के तहत मासिक रिपोर्ट जारी करने के निर्देश दिये गये थे जिसमें मरीजों और बीमारियों के बारे में जानकारी शामिल रहेगी। अगर नर्सिंग होम्स ऐसा नही करते है तो जुर्माना के साथ ही प्रकरण भी दर्ज कराया जा सकेगा। संयुक्त संचालक स्वास्थ्य अस्पताल प्रशासन द्वारा तदाशय के आदेश आधा साल पहले जारी होने के बावजूद जिले में जिम्मेदारों के लचर रवैये की वजह से सब कुछ पुराने ढर्रें पर चल रहा है। विभागीय मुख्यालय की ओर से पूर्व में भी ऐसे प्रयास किये गये है। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा मरीजों की बेहतरी के लिये गाइडलाइन जारी की गई है। इससे पहले भी नियम निर्देश होने के बावजूद उस पर कही पर भी अमल नहीं देखा जा रहा है। नगर व आसपास दर्जनों ऐसे नर्सिंग होम्स है जो बगैर पंजीयन ही संचालित हो रहे है इसके अलावा तय मापदंडों का पालन नहीं हो पा रहा है। नर्सिंग होम्स द्वारा तय फार्मेट में जानकारी न दिये जाने की वजह से बीमारियों को नियंत्रण पाने और योजनाएं बनाने में शासन को तो दिक्कत है ही मरीजों की भी जैसे काटी जा रही है। विभागीय दिशा निर्देशों के मुताबिक निजी अस्पतालाकं को हर महीने की पांच तारीख के पहले निर्धारित प्रपत्र में जानकारी सीएमएचओ को ऽभोजने का प्रावधान किया गया था। लेकिन नर्सिंग होम्स इसकी अनदेखी कर रहे थे। अधिकारियों के मुताबिक नर्सिंग होम में भर्ती किये गये मरीज और जन्म लेने वाले शिशुओं की जानकारी परीक्षण और इलाज किये गये मरीजों की जानकारी अब एचएमआईएस आप्शन के तहत ली जायेगी। निजी अस्पतालों को अब हर महीने अस्पताल में रोगी की मौत होने, संक्रामक और नोटिफाइड रोगो के बारे में जानकारी, राष्ट्रीय कार्यक्रमों की जानकारी, टीवी अब नोटिफाइड बीमारी का तत्काल जानकारी देना। सभी गर्भवती महिलाओं, प्रसव और नवजात शिशु की सूचना तुरंत शिशु की सूचना देना जरूरी है।
क्या कहते जबावदार –
इस संदर्भ में अभी तक किसी ने शिकायत नहीं की, शिकायत आने पर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. केके नागवंशी, सीएचएमओ जिला चिकित्सालय हरदा।

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