नरसिंहपुर के नितेंद्र हुए मुनि निराश्रव सागर

नरसिंहपुर के नितेंद्र हुए मुनि निराश्रव साग

नरसिंहपुर। स्थानीय निवासी नितेंद्र जैन अब मुनि श्री 108 निराश्रव सागर के नाम से जाने जाएंगे। विगत दिवस उत्तर प्रदेश के ललितपुर में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ने उन्हें मुनि दीक्षा देकर निराश्रव सागर नाम दिया। नितेंद्र जैन का जन्म नरसिंहपुर में 28 अप्रैल 1981 को पिता तुलसीराम जैन व माता श्रीमती प्रेमलता जैन के घर हुआ। बाल्यकाल से ही धर्म प्रेमी होने के कारण उनकी धार्मिक आस्था बढ़ती गई और आज मुनि श्री निराश्रव सागर की उपाधि से नवाजे गए। नितेंद्र बचपन से ही खेलकूद और शिक्षा में निपुण रहे। उन्होंने नरसिंहपुर के पीजी कॉलेज से स्नातकोत्तर किया। उनके जीवन में एक घटना ने उन्हें और उनके परिवार को झकझोर दिया जिससे उनके जीवन में नया बदलाव आया।
चमत्कारिक ढ़ंग से ठीक हुआ था कैंसर
वर्ष 2005 में इलाज के लिए नागपुर गये नितेंद्र को पता चला कि उन्हे कैंसर है। तब परिवार ने मुंबई मे इलाज कराने का निर्णय लिया। वहां भी जांच में कैंसर की पुष्टि हुई तो उनका उपचार प्रारंभ हुआ और कीमियोथैरेपी में उनके बाल झड़ गये। वे इस गंभीर बीमारी को भी शांति से झेलते रहे। इसी दौरान कंदेली दिगंबर जैन मंदिर में 105 आर्यिका श्री अनंत मति माताजी का चतुर्मास हुआ तो माता जी ने उन्हे अपने गुरू आचार्य विद्यासागर जी महाराज के पास बीना बाराह जाने को कहा। जब नितेंद्र सपरिवार महाराजश्री के दर्शन करने बीना वाराह गये तो आचार्य श्री ने उन्हे रात्रि का आहार त्याग करने यहां तक कि दवा भी शाम 7 बजे के पहले सेवन करने के निर्देश दिये। महाराजश्री ने कहा कि यह रात्रि भोजन त्याग करना ही औषधि है। नितेंद्र ने इस नियम का पालन करने के साथ-साथ 5 वर्ष का ब्रह्मचर्य व्रत भी धारण किया। जिसका नतीजा यह हुआ कि 8 नवम्बर को मुंबई मे हुए आॅपरेशन के बाद उनके शरीर से एक गांठ निकली, पर आश्चर्य यह कि उसमें कैंसर का रोग नही निकला। इसे आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के आर्शीवाद का चमत्कार मानकर नितेंद्र ने खुद को आचार्य श्री को समर्पित कर दिया।
नरसिंहपुर से पहले मुनि हैं नितेंद्र
सन्यास की ओर जाते नितेंद्र जैन ने 15 जुलाई 2015 को आचार्य श्री के समक्ष अजीवन ब्रह्मचर्य व्रत लिया एवं 1 जुलाई 2016 को गृह त्याग कर सत्संग के सानिध्य में रहे। बुधवार 28 नवंबर 2018 को ब्रह्मचारी नितेंद्र जैन को आचार्य श्री विद्यासागर जी ने मुनि की दीक्षा के साथ नया नाम दिया। निराश्रव सागर नरसिंहपुर से पहले जैन मुनि हैं। पहले माता श्री 105 आर्यिका श्री अनंतमूर्ति माताजी एवं 105 आर्यिका श्री शाश्वतमति जी है जो आचार्य श्री की ही शिष्या है उनकी दीक्षा से समस्त नरसिंहपुर जैन समाज अत्यंत हर्ष है और मुनि आचार्य श्री और मुनि श्री के आगमन की प्रतीक्षा में है।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY