पूर्व मुख्यमंत्री ने जताई आशंका, कैसे चल पाएगी इतनी खींचतान वाली सरकार

भोपाल। कांग्रेस सरकार के मंत्रियों की शपथ तो हो गई, लेकिन विभाग अब तक तय नहीं हुए हैं। बिना विभाग तय हुए, कैबिनेट की बैठकें हो रही हैं। मंत्री तय हो गए, तो अब विभागों के लिए पार्टी में रस्साकशी और मारकाट मची है। हर नेता कहता है, मेरे मंत्री को ये विभाग चाहिए। इसी खींचतान के चलते अब तक विभाग तय नहीं हो सके। प्रदेश के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ। यदि ऐसा ही चलता रहा, तो सरकार कौन चलाएगा ? मुख्यमंत्री चलाएंगे या उनके पीछे से अलग-अलग गुटों के नेता ? या फिर वे मंत्री चलाएंगे, जिनकी डोर अलग-अलग नेताओं के हाथ में है। जब इतने सारे लोग सरकार को नियंत्रित करेंगे, तो सरकार कैसे चलेगी ? यह बात गुरुवार को पूर्व मुख्यमंत्री व विधायक श्री शिवराजसिंह चौहान ने मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा के दौरान कही। उन्होंने कहा कि मंत्रियों को जल्द ही विभाग दिए जाना चाहिए और सरकार को तेजी से काम करना चाहिए।

अलग-अलग गुटों के नेता बना रहे मंत्री

 पूर्व मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि हम चाहते हैं कि प्रदेश में विकास की निरंतरता बनी रहे, कल्याणकारी योजनाएं चालू रहें, कांग्रेस ने जनता को जो वचन दिए हैं, उन्हें निभाया जाए, लेकिन जो चल रहा है, उसे देख मैं चिंतित हूं। पहले उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री की शपथ के बाद तत्काल मंत्री तय होंगे और शपथ हो जाएगी, लेकिन मुख्यमंत्री और मंत्रियों की शपथ के बीच में जो अंतराल आया, वह चिंता का विषय है। मंत्री तय करना मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है, लेकिन इस सरकार में मुख्यमंत्री मंत्री नहीं बना रहे, बल्कि अलग-अलग गुटों के नेता मंत्री बना रहे हैं। सभी का कोटा तय हो गया है, किसके कितने मंत्री होंगे। एंदल सिंह, बिसाहूलाल, के.पी. सिंह जैसे उन लोगों की दुर्गति हो रही है, जो किसी गुट के नहीं हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के विशेषाधिकार पर इस कदर डाका डले कि मंत्री कोई और बनाए, यह चिंता का विषय है। 

जो कहा है, वो करना पड़ेगा

            पूर्व मुख्यमंत्री श्री चौहान ने किसानों की कर्ज माफी की चर्चा करते हुए कहा कि कांग्रेस ने इसे लेकर अपने वचन पत्र में जो लिखा है, उसका पालन होना चाहिए। कर्ज माफी की राह में कोई बैरियर या छन्ना नहीं लगाना चाहिए। कांग्रेस ने सभी किसानों का दो लाख तक का कर्ज माफ करने की बात कही है, इसमें कोई अगर-मगर नहीं होना चाहिए। सरकार 30 नवंबर तक के सभी किसानों के कर्ज माफ करे। श्री चौहान ने कहा कि यही हमारी मांग भी रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने जो कहा है, उसे वो करना पड़ेगा।

हमारी नजर जनहित के कामों पर

            श्री चौहान ने कहा कि हमारी नजर इस बात पर है कि जनता के काम हों। विकास एक निरंतर प्रक्रिया है और प्रदेश का विकास बाधित न हो। उन्होंने कहा कि चुनाव परिणाम आने के बाद हमारा मत यही था कि बहुमत हमें नहीं मिला है, हालांकि उनको भी नहीं मिला। लेकिन उनके पास नंबर ज्यादा थे, इसलिए उनकी सरकार बनी। अगर हम ऐसा-वैसा सोचते तो तत्काल सरकार बनाने का दावा ठोंकते। हमारी सदइच्छा है कि सरकार ठीक से चले। उन्होंने सरकार बना ली, लेकिन सरकार ठीक से चलती रहे, इसकी परिस्थितियां बनाना भी तो उनका ही काम है। 

किसी के कहने से बंद नहीं होंगी संघ की शाखाएं

            पूर्व मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उसकी शाखाओं पर पहले स्व. पं. नेहरू जी ने प्रतिबंध लगाया, लेकिन हटाना पड़ा। फिर स्व. इंदिरा जी ने प्रतिबंध लगाया, उसे भी हटाना पड़ा। श्री चौहान ने कहा कि संघ देशभक्त नागरिकों का दुनिया का सबसे बड़ा संगठन है, जो ईमानदार, चरित्रवान, परिश्रमी और देशभक्त नागरिक तैयार करता है। उन्होंने कहा कि किसी के कहने से न संघ का काम रुकेगा न शाखाएं रुकेंगी। मीसाबंदी पेंशन की बात पर श्री चौहान ने कहा कि हम यह चाहते हैं कि सरकार राजनीतिक विद्वेषवश कोई कार्रवाई न करे। मीसाबंदियों ने लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई लड़ी। ये लोग 19 महीने जेल में रहे, उनके परिवार तबाह हो गए। उन्होंने कहा कि बात सिर्फ लोकतंत्र सेनानियों की पेंशन की नहीं है, बल्कि हम यह चाहते हैं कि कोई भी लोक कल्याणकारी योजना बंद न हो।

गुटों के नेता कर रहे विभागों पर खींचतान

 पूर्व मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि कांग्रेस में कितने गुट और कितने नेता हैं, सबको पता है। मंत्रियों को विभागों का आवंटन मुख्यमंत्री को करना चाहिए, लेकिन जवाब दिग्विजयसिंह देते हैं। इससे पता चला जाता है कि मंत्रियों को विभाग कौन बांट रहा है। श्री चौहान ने कहा कि मंत्रियों में ज्योतिरादित्य जी के अलग नाम हैं, दिग्विजय जी के अलग नाम हैं, अरुण यादव जी के तो भाई मंत्री बन गए हैं, सुरेश पचौरी जी का अभी कोई दिख नहीं रहा है। कमलनाथ मंत्रिमंडल में सभी को कैबिनेट मंत्री बनाए जाने पर श्री चौहान ने कहा कि नेताओं के बीच यह झगड़ा मचा होगा कि मेरे आदमी को राज्यमंत्री क्यों, कैबिनेट मंत्री बनाओ। इस झंझट से बचने के लिए मुख्यमंत्री ने सभी को कैबिनेट मंत्री बना दिया। इससे प्रदेश पर आर्थिक बोझ पड़ना तो अलग बता है, मगर ऐसी सरकार चलेगी कैसे?

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