मिशेल की गिरफ्तारी : एक तीर से दो शिकार

-सुरेश हिन्‍दुस्‍थानी
अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाले के आरोपी क्रिश्चियन मिशेल को भारत को सौंपने के बाद ऐसा लग रहा है कि भारत की सरकार ने एक तीर से दो निशाने साधे हैं। इतना ही नहीं यह निशाना पूरी तरह से सही जगह पर ही लगा है। जहां क्रिश्चियन मिशेल की गिरफ्तारी से अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले की परतें खुलने का रास्ता साफ होता दिख रहा है, वहीं शराब कारोबारी विजय माल्या भी इस बात से भय खाने लगा है कि जैसे क्रिश्चियन मिशेल का प्रत्यर्पण हुआ है, वैसे ही उसका भी हो सकता है। इसलिए ही विजय माल्या ने लंदन से ही यह स्पष्ट संदेश दिया है कि वह बैंक और जनता के पैसे का भुगतान करने को तैयार है। इसके बाद निश्चित रुप से यह सवाल भी उठता है कि अगर विजय माल्या जनता के पैसों का भुगतान करने की मानसिकता रखता है तो वह देश छोड़कर क्यों भागा? इससे यह भी पता चलता है कि विजय माल्या की नीयत में भारी खोट है।
अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर सौदा मामले में क्रिश्चियन मिशेल की गिरफ्तारी के बाद कांगे्रस के बड़े नेता बचाव की भाषा बोलते दिखाई दे रहे हैं। इतना ही नहीं कांगे्रस के कई बड़े नेता और उसके अधिकारिक प्रवक्ता यह भी स्वीकार कर रहे हैं कि अगस्ता खरीद मामले में भ्रष्टाचार हुआ है। भ्रष्टाचार के पर्याप्त प्रमाण मिलने के बाद ही सरकार ने मामले का रफा दफा करने के लिए कार्यवाही की। भारत की राजनीति में अगस्ता वैस्टलैंड घोटाले को लेकर जिस प्रकार से बयानबाजी की जा रही है, उससे संदेह के बादल उमड़ते घुमड़ते दिखाई देने लगे हैं। कांग्रेस द्वारा जिस प्रकार से केन्द्र सरकार के मुखिया नरेन्द्र मोदी को घेरने की कवायद की जा रही है, वह प्रथम दृष्टया यह प्रमाणित करती दिखाई दिखाई दे रही है कि देश के प्रमुख राजनीतिक दलों द्वारा इस भ्रष्टाचार वाले मामले में देश की जनता को गुमराह करने का भरपूर प्रयास किया जा रहा है। इस मामले में सबसे खास बात यह भी थी कि इस मामले में कई बड़े पत्रकारों के भी नाम सामने आए थे, जिसमें राजदीप सरदेसाई और बरखा दत्त के नाम शामिल थे।
मिशेल का भारत के हाथ लगना इसलिए उल्लेखनीय है, क्योंकि एक तो वह हेलीकॉप्टर खरीद घोटाले में मुख्य आरोपी है और दूसरा वह ब्रिटिश नागरिक है। इसी प्रकार ब्रिटेन में विजय माल्या मामला भी प्रत्यर्पण की कार्यवाही के लिए अटका हुआ है। मिशेल के प्रत्यर्पण के बाद विजय माल्या पर दुधारी तलवार लटक रही है। समझा जा रहा है कि विजय माल्या भी भारत को सौंपा जा सकता है। क्योंकि प्रत्यर्पण मामले में विजय माल्या का पक्ष बहुत कमजोर होता जा रहा है, इसलिए अब विजय माल्या के बचने की उम्मीद भी नहीं के बराबर ही नजर आ रही है। इसके बाद भी ब्रिटेन एक ऐसा देश है जो अपने यहां शरण पाए संदिग्ध लोगों का प्रत्यार्पण कठिनाई से करता है और दुनिया में कहीं से भी अपने लोगों को अन्य देशों को सौंपने में मुश्किलें खड़ी करता रहता है। संभवत: यही वजह रही कि भारत के लंबे प्रयासों के बाद भी मिशेल भारत के हाथ नहीं लगा।
अगस्ता वेस्टलैंड हैलीकाप्टर के मामले में यह तो कांग्रेस की सरकारों के दौरान ही तय हो गया था कि इस सौदे में सब कुछ ठीक नहीं है। अब कांग्रेस की ओर से यह बयान भी आया था कि सरकार के पास प्रमाण हों तो सरकार कार्यवाही करे। लेकिन सबसे बड़ा प्रमाण तो कांग्रेस ने ही अपनी सरकार के कार्यकाल में ही दे दिया था। कांग्रेस ने जब डील निरस्त की, तब उसका आधार ही पर्याप्त प्रमाण माना जा सकता है। इटली की न्यायपालिका ने जब इस प्रकरण में कार्यवाही की, तब क्या यह भ्रष्टाचार का प्रमाण नहीं था। इसलिए बचाव में अब कांग्रेस का कहना है कि राफेल सौदे की हकीकत से ध्यान बांटने व अगस्ता मामले में मनगढ़ंत प्रमाण एकत्रित करके सरकार मामले को हवा दे रही है। लेकिन इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती कि इस मामले में वायुसेना के पूर्व प्रमुख एसपी त्यागी को गिरफ्तार किया गया था और कांग्रेस के कई नेताओं के नाम भी सामने आए थे। बहरहाल, मिशेल के भारत की गिरफ्त में आने के बाद देश छोड़कर ब्रिटेन भाग गए कारोबारी विजय माल्या ने बुधवार को यह पेशकश की है कि उनके ब्रिटेन से भारत प्रत्यार्पण के मामले में कानून अपना जो भी काम करे, लेकिन वह जनता के पैसे का सौ प्रतिशत भुगतान करने को तैयार है। माल्या इस वक्त ब्रिटेन में प्रत्यार्पण को लेकर कानूनी लड़ रहे हैं और भारत सरकार ने उसके प्रत्यार्पण पर पूरा जोर लगा रखा है।
हम जानते हैं कि किसी मामले में जितनी भी बयानबाजी की जाएगी, उससे उस मामले का मूल भाव ही समाप्त हो जाएगा। और वह देश के रक्षा मामलों के साथ अन्याय ही कहा जाएगा। वास्तव में होना यह चाहिए कि ऐसे मामलों में जांच के लिए कांग्रेस की तरफ से सरकार को पूरा साथ देना चाहिए, लेकिन ऐसा होता नहीं दिखाई देता। बहुत पहले एक बात और सामने आई थी कि रक्षा उत्पाद बनाने वाली अगस्ता वेस्टलैंड की मातृ कंपनी फिनमेकैनिका के अधिकारियों द्वारा जब इस मामले की जांच की जा रही थी, तब इतालवी कोर्ट में ऐसे दस्तावेज सामने आए हैं, जिसमें ‘सिगनोरा गांधीÓ का नाम था। कांग्रेस क्या इस बात को बताने का प्रयास करेगी कि यह सिगनोरा गांधी कौन है? डील के समय जब कांग्रेस की सरकार थी, तब सरकार को यह तो पता ही होगा कि यह कौन है। क्योंकि अंतरराष्ट्रीय मामलों की डील करने में केन्द्र सरकार द्वारा नियुक्त व्यक्ति ही डील कर सकता है। हो सकता है कि सिगनोरा गांधी ने इस मामले में मध्यस्थ की भूमिका का निर्वाह किया हो। अगर मध्यस्थ की भूमिका में ही हो, तो भी यह तो प्रमाणित हो ही जाता है कि सिगनोरा गांधी की भूमिका से दोनों देशों की सरकारें वाकिफ थीं। एक दस्तावेज मार्च 2008 में इस सौदे के मुख्य बिचौलिये क्रिश्चिचन मिचेल द्वारा भारत में अगस्ता वेस्टलैंड के प्रमुख पीटर हुलेट को लिखी चि_ी थी, जिसमें ‘सिगनोरा गांधीÓ को ‘वीआईपी हेलीकॉप्टर सौदे में मुख्य कारकÓ बताया गया है।
अगस्ता वेस्टलैंड कंपनी से करार करते समय शर्तों का पूरी तरह से उल्लंघन भी सामने आया था। शर्तों में शामिल था कि कंपनी हैलीकाप्टर के मूल उपकरणों का निर्माण करने वाली हो, लेकिन अगस्ता वेस्टलैंड के साथ ऐसा कुछ भी नहीं था। वह न तो मूल उपकरणों का निर्माण करती थी, और न ही शर्तों को पूरा करती थी। तब यह सवाल भी उठता है कि फिर करार क्यों किया गया? कांग्रेस द्वारा जिस प्रकार से अगस्ता वेस्टलैंड को काली सूची में डालने की बात कही जा रही है, उसमें खास बात यह है कि उसको काली सूची में डालने का काम केन्द्र की कांग्रेस सरकार ने नहीं किया, बल्कि यह काम राजग की सरकार ने किया था।
अगस्ता वेस्टलैंड हैलीकाप्टर घोटाले में यह बात मानने योग्य है कि इसके करार में घोटाला हुआ है। इस बात से कांग्रेस पार्टी का कोई भी नेता इंकार नहीं कर सकता। इटली के न्यायालय में इस मामले में अपने देश के दोषी व्यक्तियों को सजा मिल गई है। इसके अलावा इटली की न्यायालय के आदेश में सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस नेता अहमद पटेल, ऑस्कर फर्नांडीस और पूर्व एनएसए एमके नारायणन का नाम भी लिया। फैसले में यह भी कहा गया था कि 12 हेलीकाप्टरों के इस करार को पूरा करवाने के लिए उस समय सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल को 18 मिलियन डॉलर दिए गए थे (फैसले के पेज संख्या 225)। जिसमें कांग्रेस के शीर्ष नेताओं को कुल 125 करोड़ रुपये रिश्वत के तौर पर मिले।
अगस्ता वेस्टलैंड मामले में आज कांग्रेस पूरी तरह से बैकफुट पर तो है ही, साथ ही अपने भविष्य को लेकर एक भय भी बना हुआ है। कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी समस्या यह है कि उसके राज में हुए घोटाले अब तक कांग्रेस का पीछा नहीं छोड़ रहे। पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की सबसे बड़ी पराजय का कारण भी भ्रष्टाचार ही था। कांग्रेस पार्टी का कोई भी नेता इस बात का दावा नहीं कर सकता कि उसके राज में भ्रष्टाचार नहीं हुआ। अब देखना है कि मिशेल की तरफ से क्या-क्या खुलासा होता है।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं)

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