जीवन परिचय … बसवण्णा के अवतार के रूप में लोकप्रिय थे डॉ. शिवकुमार

बेंगलुरू, 22 जनवरी (हि.स.)। डॉ. शिवकुमार स्वामी हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उन्होंने मानवता के लिए जो भी कुछ किया है, उसको भुलाया नहीं जा सकता है। उनके निधन से जो विरक्तता हुई है उसको भर पाना मुश्किल है। डॉ. शिवकुमार स्वामी जो लिंगायत धर्मगुरु, आध्यात्मिक नेता, मानवतावादी और शिक्षाविद होने के साथ कर्नाटक के तुमकुरु स्थित सिद्धगंगा मठ के प्रमुख थे। उन्होंने ही श्री सिद्धगंगा एजुकेशन सोसाइटी की स्थापना की थी। आज इस मठ के पूरे राज्य में 123 शैक्षणिक संस्थान हैं। अपने अनुयायियों के बीच वह समाज सुधारक बसवण्णा के अवतार के रूप में लोकप्रिय थे। भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने उनको ‘भगवान’ बताया था। एक अप्रैल 1907 को मागड़ी जिले के वीरपुर में पैदा हुए शिवकुमार अपने माता-पिता के सबसे बड़े पुत्र थे। उन्होंने अपने जीवन के 90 साल लोगों की सेवा में समर्पित किया। लिंगायत समुदाय का यह मठ करीब 300 साल पुराना है। लिंगायत समुदाय कर्नाटक की राजनीति में प्रभावशाली माना जाता रहा है।

स्वामीजी वर्ष 1922 में पढ़ने के लिए तुमकुरु आये थे। दसवीं कक्षा की पढाई पूरी करने के बाद बेंगलुरु कालेज में पढ़ने गए। उन्होंने वैकल्पिक विषयों के रूप में भौतिकी और गणित के साथ वर्ष 1930 में कला में स्नातक की डिग्री हासिल करने से पहले सेंट्रल कॉलेज ऑफ बैंगलोर में प्री-यूनिवर्सिटी कोर्स पूरा किया। वे कन्नड़, संस्कृत और अंग्रेजी भाषाओं में पारंगत थे। स्वामीजी को वर्ष 1965 में कर्नाटक विश्वविद्यालय द्वारा डॉक्टर ऑफ लिटरेचर की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया था। 2007 में कर्नाटक सरकार ने राज्य के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार कर्नाटक रत्न से सम्मानित किया था।

वर्ष 2015 में स्वामीजी को उनकी सेवाओं के लिए भारत के तीसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार ‘पद्मभूषण’ से सम्मानित किया गया था।

स्वामीजी के गुरुकुल में 5 से 16 वर्ष की आयु के 10,000 से अधिक बच्चे रहते हैं| यह गुरुकुल सभी धर्मों, जातियों और पंथों के बच्चों के लिए खुला है जिन्हें मुफ्त भोजन, शिक्षा और आश्रय प्रदान किया जाता है। हालांकि, उन्होंने योगीत्व को पसंद किया लेकिन घर वाले इसके खिलाफ थे। उनका यह फैसला पिता के लिए पीड़ादायक था। उद्दन्ना स्वामी जी का निधन उनके जीवन में एक भावनात्मक क्षण था। स्वामीजी ने किसानों के विकास के लिए काफी प्रयास किये हैं। बता दें कि बीते सोमवार सुबह 111 साल के स्वामी जी निधन हो गया।

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