प्रसिद्ध डायरेक्टर स्टीवेन स्पीलबर्ग मानते हैं कि अमरीश पुरी

तमाम विलेनों के इस ‘शहंशाह‘ ने फिल्म इंडस्ट्री में अपनी एक अमिट छाप छोड़ी थी। अपनी यादगार भूमिकाओं और मशहूर नेगेटिव किरदारों के जरिए उन्होंने एंटी हीरो के रोल को पुनः परिभाषित किया था। मशहुर डायरेक्टर स्टीवन स्पीलबर्ग ने इस पावरहाउस एक्टर को हॉलीवुड मूवी ‘इंडियाना जोन्स‘ में डायरेक्ट किया था, और इस एक्टर के साथ उनका एक खास रिश्ता था। वे मानते थे कि अमरीश पुरी अब तक के सबसे बेहतरीन विलेन हैं। ज़ी बॉलीवुड पर क्लासिक लीजेंड्स के आगामी एपिसोड में जावेद अख्तर दर्शकों को इसी महान अभिनेता के फिल्मी सफर पर ले जाएंगे और उनके बारे में कुछ अनसुनी बातें बताएंगे। अमरीश पुरी की 14वीं पुण्यतिथि पर उन्हें याद करते हुए क्लासिक लीजेंड्स सीजन 5, इस शनिवार 12 जनवरी को रात 8 बजे अमरीश पुरी की जिंदगी का सफर दिखाएगा।

बॉलीवुड में आने से पहले अमरीश पुरी एक माचिस के कारखाने में सेल्समैन की नौकरी करते थे। इसके बाद वो जल्द ही ऑल इंडिया रेडियो में अलग-अलग किरदारों की आवाजें निकालने लगे। उन्होंने रेडियो के पॉपुलर शो ‘हवा महल‘ को भी कुछ समय के लिए होस्ट किया था। उन्होंने पृथ्वी थिएटर से अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत की, जिससे उन्हें कुछ टेलीविजन विज्ञापन मिले और फिर वे फिल्मों में आ गए। उन्होंने अपने बड़े भाइयों – मदन पुरी और चमन पुरी के नक्शे कदम पर चलते हुए बॉलीवुड में अपना एक खास मुकाम बनाया। अमरीश पुरी के खाते में 400 से ज्यादा फिल्में हैं, जिसमें उन्होंने अपनी दमदार आवाज, आकर्षक आंखें और तीखे नैन नक्श के साथ दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचा। इसके चलते वे इंडस्ट्री के तमाम विलेनों में सबसे अलग नजर आते थे। साल 1987 में आई हिट फिल्म ‘मिस्टर इंडिया‘ में उनका किरदार बेहद मशहूर हुआ था और उनका संवाद ‘मोगैंबो खुश हुआ‘ आज भी सबसे मशहूर डायलॉग में से एक माना जाता है। वो न सिर्फ हिंदी फिल्मों में नजर आए बल्कि उन्होंने कन्नड, मराठी, हॉलीवुड, पंजाबी, मलयालम और तेलुगु फिल्मों में भी अभिनय किया था। 1980 से 1990 के दशक के दौरान खलनायकों के रोल में अमरीश पुरी की गिनती सबसे ऊपर होती थी। इन दशकों के दौरान शायद ही ऐसी कोई बॉलीवुड फिल्म रही होगी, जिसमें अमरीश पुरी विलेन के रोल में नहीं थे। पश्चिमी दर्शक उन्हें रिचर्ड ऐटनबरो की फिल्म ‘गांधी‘ में खान के किरदार में, स्टीवन स्पीलबर्ग की फिल्म ‘इंडियाना जोन्स‘ में मौला राम के किरदार में और द टेंपल ऑफ बूम जैसी फिल्मों के लिए याद करते हैं।
उन पुराने दिनों की यादें ताजा करते हुए जावेद अख्तर कहते हैं, ‘‘अमरीश पुरी हमेशा एक महान कलाकार के तौर पर याद किए जाएंगे, लेकिन मेरे जैसे लोग जो उन्हें व्यक्तिगत तौर पर जानते थे, उन्हें एक महान अभिनेता और एक महान इंसान के तौर पर याद रखेंगे। अमरीश पुरी यह दोनों ही थे। मशहूर फिल्मकार स्टीवेन स्पीलबर्ग ने एक बार कहा था कि उन्होंने अपनी जिंदगी में कई फिल्में देखी हैं लेकिन ऐसा बेहतरीन विलेन कभी नहीं देखा। हालांकि अमरीश पुरी को उनके खलनायक वाले किरदारों के लिए याद किया जाता है लेकिन इस एक्टर ने कुछ ब्लॉकबस्टर फिल्मों में यादगार सकारात्मक रोल भी निभाए थे। इन फिल्मों में दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे, फूल और कांटे, गर्दिश, परदेस, विरासत, घातक और चाइना गेट जैसी फिल्में शामिल हैं।

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