राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगे जनरेटर लोगों को दे रहे घुटन भरी बीमारियां

कानपुर । राष्ट्रीय राजमार्ग को रोशन करने के लिए दक्षिणवासियों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। शाम होते ही भौंती-चकेरी हाईवे के नीचे बने अंडरपास में रखे जनरेटर चालू कर दिए जाते हैं, जिससे हाईवे पर लगी सभी लाइट तो जलती हैं लेकिन जनरेटर से निकलने वाले जहर रूपी धुएं से वहां से निकलने वाले लोगों के फेफड़े फ्यूज होने लगते हैं। ऐसे में यदि अंडरपास पर जाम लग जाये तो धुएं से दम घुटने वाली स्थिति हो जाती है। यह सिलसिला पिछले दो महीने से चल रहा है। इसके बावजूद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
इटावा-चकेरी सिक्स लेन निर्माण के बाद नेशनल हाईवे टू को रोशन करने के लिए लाइट लगायी गई हैं। इसके तहत भौंती-चकेरी हाईवे पर भी लाइट लगायी गई हैं। इन सभी को जलाने की जिम्मेदारी निर्माण एजेंसी की है। हाईवे पर लाइट न जलने से आये दिन हादसे हो रहे थे, जिस पर एक्शन लेते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों ने निर्माण एजेंसी को किसी भी सूरत में हाईवे की सभी लाइट जलवाने के निर्देश दिये थे।
इस पर निर्माण एजेंसी ने इन्हें रोशन करने के लिए बिजली का कनेक्शन न लेते हुए हाईवे के नीचे बने अंडरपास पर बड़े-बड़े जनरेटर रखवा दिये। अब शाम होते ही इन जनरेटरों को चलवाकर हाईवे की लाइटें जलवाना शुरू कर दिया जाता है। वर्तमान समय में स्थिति यह है कि शाम होते ही भौंती से चकेरी तक बने अंडरपास में जनरेटर खतरनाक धुआं उगलने लगते हैं। अंडरपास से होकर निकलने वाले लोगों को काफी परेशानी होती है। धुएं से उनका दम घुटने लगता है। शाम के समय ट्रैफिक लोड बढ़ने पर अंडरपास पर जाम लगने लगता है। ऐसे में अंडरपास के नीचे जाम खुलने का इंतजार कर रहे लोगों को काफी परेशानी होती है।
लोगों का कहना है कि हाईवे पर लगी लाइट जलवानी हैं तो बिजली के कनेक्शन से जलवायें। अंडरपास में जनरेटर लगाकर चलाना कोई सही तरीका नहीं है। जनरेटर से निकलने वाला धुआं उन्हें बीमार कर रहा है। फेफड़ों पर असर डाल रहा है। जाम लगने पर तो दम घुटने वाली स्थिति हो जाती है। इस पर जब सोमवार को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के परियोजना निदेशक पुरुषोत्तम लाल चौधरी से बात की गयी तो उन्होंने कहा कि हाईवे पर लाइट जलवाने की जिम्मेदारी निर्माण एजेंसी की है, जिसके लिए प्राधिकरण द्वारा उनसे कहा गया है।
प्राधिकरण को हाईवे पर लाइट जलने से मतलब है। अब चाहे वह जैसे भी जले। हाईवे पर लाइट जल रही हैं, जिससे रात में होने वाले हादसों में भी कमी आयी है। वहीं क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी कुलदीप मिश्रा ने बताया कि हाईवे पर जनरेटर की जगह बिजली के कनेक्शन व सोलर सिस्टम से भी रोशनी की व्यवस्था हो सकती है। जनरेटर से निकलने वाले धुएं से लोगों को परेशानी होती है और पर्यावरण भी प्रदूषित होता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा इसकी रिपोर्ट बनाकर उच्च अधिकारियों को भेजी जायेगी। इसके साथ ही निर्माण एजेंसी के अधिकारियों से बात कर जनरेटर हटाने के लिए कहा जाएगा।

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