वनवासियों को नहीं मिल रहा योजनाओं का लाभ

झिरन्या । यहां से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम हेलापड़ाव के बाशिंदे कटोरी से पानी उलचकर पीने को मजबूर है। कहने को दो कुए हैं दो हेडपंप मौजूद है, परंतु वह किसी काम के नहीं। यहां पर बसे हुए लोगों को पीने के पानी के लिए आज भी मेहनत करना पड़ रही है। स्थिति यह है कि लोग पीने के पानी के लिए दो से ढाई किलो मीटर दूरी तय करना पड़ती है जब कहीं जाकर अपने कंठ को तर कर पाते हैं। वह भी झिरी से पानी उलचकर ला रहे हैं।
कहने को घर-घर पर नल लगे हुए हैं, परंतु उस नल के अंदर पानी नहीं आता ग्राम के ही अंबरसिंह पटेल भाजपा मंडल महामंत्री ने बताया 15 वर्ष पूर्व जब में सरपंच था दो मेरे द्वारा नल जल योजना करवाई गई थी जो बाकायदा सफल चल भी रही थी, परंतु किसी प्रकार से कोई ध्यान नहीं रखा गया। जिसके चलते यह समस्या बनी हुई है। नल जल योजना पर थोड़ा ध्यान दिया गया होता तो सदा चलती रहती, ग्राम की ही रहने वाली महिला शारदा अनिल वास्कले ने बताया हमको पीने के पानी के लिए काफी मेहनत करना पड़ता है।
जानकारी के अनुसार गांव में पानी नहीं होने के कारण हम यहां पर पीने के पानी के लिए आते है एवं गंदा पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
बबलू मोरे कक्षा दसवीं के छात्र ने बताया में यहां पर अपने कपड़े धोने के लिए आया था, परंतु पानी नहीं होने के कारण दो-तीन घंटे लग जाते हैं। जिसके चलते हुए क्लास में समय पर नहीं पहुंच पाता हूं। जनपद प्रतिनिधि लक्ष्मण मोरे के द्वारा जो मोटर लगाई गई थी उसे भी खरगोन के व्यापारी निकाल कर ले गए, क्योंकि उसकी राशि का भुगतान नहीं हुआ था।
वहीं बिहारी मोरे ने बताया कि सचिव यहां पर नहीं आता है लोग परेशान होते रहते हैं। ग्राम पंचायत के छोटे-मोटे कार्य रोजगार सहायक के द्वारा करा लिया जाता है। उन्होंने बताया कि यहां पर पीएचई विभाग के द्वारा हेड पंप लगाए गए थे वह भी ऐसे ही पड़े हुए हैं जिनके पाइप अन्य कही लगा दिए गए। ग्राम पंचायत सचिव नवल सिंह की राह देखते हुए कंचन बाई, राजू पाटील, इकराम पाटील, दशरथ भाई, सीताराम पाटील, रामबई आदि ने यही प्रश्न करते हुए कहा कि हम भी पीने के पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। यहां पर प्रशासन को ध्‍यान नहीं है, ना जाने कब प्रशासन का ध्यान हम पर होगा।
इस संबंध में मुख्य कार्यपालन अधिकारी महेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि ग्राम पंचायत जो पाली का सचिव बहुत ही अच्छा है। वर्तमान में पानी की स्थिति से निपटने के लिए कार्य कर रहे हैं।

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