छत्तीसगढ़ राज्य का बजट सात हजार करोड़ से बढ़कर पहुंचा एक लाख करोड़ से अधिक

रायपुर (हि.स.)। तीन अनुपूरक बजट के बाद छत्तीसगढ़ का चालू वित्त वर्ष का बजट एक लाख करोड़ से अधिक का हो गया है। 19 वर्ष पहले राज्य में जो पहला बजट प्रस्तुत किया गया था वह 7 हजार करोड़ का था। शुक्रवार को चालू वित्तीय वर्ष का बजट एक लाख करोड़ से अधिक का है। लेकिन मुख्य बजट 83 हजार करोड़ से कुछ अधिक का था। एक साथ बने तीनों राज्यों में से छत्तीसगढ़ का बजट तुलनात्मक रूप से अधिक है।

उल्लेखनीय है कि राज्य का बजट लगातार बढ़ने के बावजूद इसका पूरी तरह से उपयोग नहीं हो पा रहा है। इस पर कैग अपनी आपत्ति जतला चुका है। इसके पूर्व सत्ता पर कायम रह चुकी रमन सरकार बजट का लगातार आकार बढ़ा रही थी। मूल बजट के बाद तीन से चार अनुपूरक बजट प्रतिवर्ष पेश किए जा रहे थे। कैग ने अपनी रिपोर्ट में इस बात को लेकर आपत्ति की थी। बार-बार अनुपूरक बजट पेश करने को सरकार की कमजोर वित्तीय प्रबंधन का परिणाम बताते हुए उसने रिपोर्ट दी थी कि सरकार कुल बजट का 20 फ़ीसदी राशि खर्च नहीं कर पा रही थी। जब छत्तीसगढ़ राज्य बना था तो आबादी दो करोड़ थी और पहला बजट सात हजार करोड़ रुपए का था। अभी छत्तीसगढ़ की आबादी लगभग ढाई करोड़ है और बजट एक लाख करोड़ से अधिक का हो गया है।

छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद से अब तक 18 बजट पेश किए जा चुके हैं। जिसमें से 3 बजट कांग्रेस सरकार ने पेश किया था। छत्तीसगढ़ राज्य का पहला बजट कांग्रेस सरकार के वित्त मंत्री रामचंद्र सिंह देव ने प्रस्तुत किया था। बतौर वित्त मंत्री रह चुके पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने वर्ष 2007 में अपना पहला बजट प्रस्तुत किया था। छत्तीसगढ़ राज्य में भूपेश बघेल दूसरे मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने बतौर वित्त मंत्री बजट विधानसभा में प्रस्तुत किया है। उन्होंने सदन में वर्ष 2018-19 के लिए 1 लाख 50 हजार 170 करोड़ रुपये का बजट पेश किया है।

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