ब्रिटेन में स्वास्थ्य शुल्क में वृद्धि के खिलाफ भारतीय चिकित्सकों ने छेड़ा अभियान

लंदन (हि.स.)। ब्रिटेन में स्वास्थ्य शुल्क दोगुना किए जाने के विरोध में भारतीय डॉक्टरों और चिकित्सा सेवा से जुड़े पेशेवरों ने अभियान छेड़ दिया है। वे यूरोपीय संघ से बाहर के पेशेवरों पर थोपे गए इस शुल्क वृद्धि को अनुचित बता रहे हैं। उल्लेखनीय है कि ब्रिटेन ने अप्रैल, 2015 में इमिग्रेशन हेल्थ सरचार्ज शुरू किया था। दिसंबर, 2018 में सरचार्ज को 200 पौंड से बढ़ाकर 400 पौंड (करीब 36 हजार 800 रुपये) प्रति वर्ष कर दिया गया। यह सरचार्ज कामकाजी, शिक्षा और परिवार वीजा पर ब्रिटेन में छह माह से ज्यादा रहने वालों पर लगाया जाता है। ब्रिटेन में भारतवंशी डॉक्टरों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था ब्रिटिश एसोसिएशन ऑफ फिजीशियन ऑफ इंडियन ओरिजिन (बीएपीआइओ) सरचार्ज पर पुनर्विचार करने के लिए गृह विभाग में पैरवी कर रही है।

संस्था का तर्क है कि नेशनल हेल्थ सर्विस में स्टॉफ की कमी को पूरा करने के लिए भारत से स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों को भर्ती करने के प्रयास पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। बीएपीआइओ के अनुसार, नेशनल हेल्थ सर्विस के 11 क्लीनिकल पदों में से एक रिक्त है, जबकि नर्सिग में आठ में एक पद खाली है। रिक्तियों की यह संख्या साल 2030 तक ढाई लाख के करीब पहुंच सकती है। विदित हो कि भारत जैसे देशों के डॉक्टरों, नर्सों और दूसरे स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों को ब्रिटेन की चिकित्सा प्रणाली की रीढ़ कहा जाता है। 

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