माओवादी समर्थक नंदिनी सुन्दर को पुलिस ने दी क्लीन चिट

सुकमा, (हि.स.)।छत्तीसगढ़ पुलिस ने 2016 में सुकमा जिले में हुई एक हत्या के मामले में वामपंथी विचारधारा से जुडी दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर नंदिनी सुंदर और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की प्रोफेसर अर्चना प्रसाद सहित पांच अन्य लोगों को क्लीन चिट दे दी है। ये सभी पांचों लोग वामपंथी विचारधारा से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता हैं।

स्थानीय अदालत में इन सभी के खिलाफ चल रहे मामले की सुनवाई के दौरान सोमवार को छत्तीसगढ़ पुलिस ने कबूल किया कि उनके पास कोई सबूत नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह की सरकार में इन सभी पांच लोंगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। राज्य की नई कांग्रेस सरकार के इशारे पर की गई यह कार्रवाई ऐसे समय पर की गई है, जब एक दिन पहले ही केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने छत्तीसगढ़ सरकार पर माओवादियों के साथ विधानसभा चुनाव में गठजोड़ करने की बात कही थी।

पांचों आरोपियों से जुड़ा मामला 7 नवंबर 2016 का है, जब सुकमा जिले के नामा गांव के निवासी शामनत बघेल की हत्या कर दी गई थी। घटना के वक्त बस्तर क्षेत्र के आईजी रहे एसआरपी कल्लूरी ने बघेल की पत्नी के बयान के आधार पर पुलिस से दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर नंदिनी सुंदर, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की प्रोफेसर अर्चना प्रसाद, दिल्ली के जोशी अधिकार संस्थान के सदस्य विनीत तिवारी, सीपीएम के नेता संजय पाराटा, स्थानीय सरपंच मंजु कावासी और एक स्थानीय व्यक्ति मंगल राम वर्मा पर मामला दर्ज कराया था।

यह मामला सुकमा जिले के टोंगपाल पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज था। सोमवार को एक स्थानीय अदालत में दायर किए गए आरोप पत्र में पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान उन्हें मामले के आरोपी तमाम लोगों के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला है। इस बारे में सुकमा जिले के एसपी जितेन्द्र शुक्ला ने मंगलवार को हिन्दुस्थान समाचार को बताया कि “जांच के बाद हमें इस मामले में बनाए गए सभी आरोपितों खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले हैं। सभी गांव वालों का बयान लेने के बाद हमें ये मालूम हुआ है कि हत्या के समय आरोपितों में से कोई वहां मौजूद नहीं था। इसलिए हम उनके खिलाफ मामला वापस ले रहे हैं।” उन्होंने कहा कि हमने कोर्ट को बता दिया है कि आरोपितों के खिलाफ हमारे पास कोई सबूत नहीं मिले हैं। अब आगे क्या करना है, सका फैसला कोर्ट ही करेगी।

वहीं दूसरी तरफ, रमन सरकार के दौरान पकड़े गए माओवादियों के खिलाफ पुलिस द्वारा सबूत पेश नहीं किये जाने का प्रदेश कांग्रेस ने स्वागत किया है। प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री शैलेश नितिन त्रिवेदी ने मंगलवार को कहा कि रमन सिंह की सरकार में बस्तर में जो हालात थे, किसी से छिपा नहीं है। त्रिवेदी ने पूर्व की भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा, “रमन सिंह की सरकार ने बस्तर की वास्तविक स्थिति को उजागर करने वाले पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के ऊपर झूठे मुकदमें बनाने की साजिश रची गई। कांग्रेस ने जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभाते हुए उस समय भी लगातार इस बात को राज्य में और राष्ट्रीय मंच पर भी उजागर किया। इस साजिश का पर्दाफाश अब हुआ है। जो दोषी नहीं है उनके विरुद्ध मुकदमे हटाए जाने का कांग्रेस स्वागत करती है और आशा करती है कि इससे न केवल बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में और आगे चलकर लोकसभा चुनाव के बाद पूरे देश में एक बेहतर वातावरण बन सकेगा।”

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