ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के गर्भगृह की छत में सैकड़ों छेद

खंडवा (एजेंसी)। ओमकारेश्वर तीर्थ क्षेत्र में स्थित चतुर्थ ज्योतिर्लिंग भगवान ममलेश्वर के गर्भगृह की लोहे की छत पूरी तरह सड़ गई है, इसमें सैकड़ों छेद हो चुके हैं। जंग लगी हुई छत से रोजाना जंग लगे टुकड़े भगवान भोलेनाथ के दर्शन करने आने वाले यात्रियों पर गिरते रहते हैं। इसी तरह इस मंदिर में विगत उज्जैन सिंहस्थ महापर्व 2016 के दौरान दर्शन करने आने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए जो रेलिंग मध्यप्रदेश शासन द्वारा लगाई गई थी उसमें भी जंग लग रही है।
ममलेश्वर मंदिर के इन दोनों स्थानों पर ध्यान देने की जरूरत है। कहने अथवा देखने को इस पुरातन मंदिर के तीन-तीन देखरेख करने वाले हैं लेकिन उपरोक्त परिस्थिति पर कोई भी ध्यान देने को तैयार नहीं है। इस संबंध में प्राप्त जानकारी के अनुसार ओंकारेश्वर में स्थित देश का यह चौथा ज्योतिर्लिंग मंदिर हमेशा से ही अव्यवस्थाओं के घेरे में रहता है। इसका मुख्य कारण इस मंदिर का ट्रस्ट नहीं बनाया जाना है। भारतवर्ष में स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एकादश ज्योतिर्लिंगों में बकायदा उन मंदिरों का ट्रस्ट बना हुआ है लेकिन ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर की स्थिति राज्य एवं केंद्र सरकार एवं क्षेत्रीय सांसद एवं विधायक द्वारा ध्यान नहीं दिए जाने के कारण इस मंदिर में हमेशा ही अव्यवस्थाएं बनी रहती है। जिसका मुख्य कारण इसके प्रबंधन व्यवस्था देखने वाला कोई जिम्मेदार संस्थान नहीं है। कब होगा व्यवस्था में बदलाव ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर की लंगडी लूली व्यवस्था जैसे तैसे चल रही है। जिसमें समय के परिवर्तन एवं लगातार बढ़ रही यात्रियों की संख्या के साथ पर्याप्त बदलाव किया जाना आवश्यक है। स्थानीय धार्मिक जानकार एवं विद्वान पंडितों का कहना है कि देश के अन्य ज्योतिर्लिंग मंदिरों में भगवान भोलेनाथ की दो समय का भोग एवं आरती पूर्ण आस्था एवं जिम्मेदारी से वहां के ट्रस्ट अथवा संस्थान द्वारा निर्धारित की गई है और इसका प्रति पालन भी होता है। इसके लिए दूर जाने की जरूरत नहीं है भगवान ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के नर्मदा तट के उस पार भगवान ओमकारेश्वर प्रणव लिंग विराजमान है। जिनके तीन समय की आरती एवं भोग अलग अलग संस्था के पुजारियों द्वारा प्रतिदिन समय पर किए जाते हैं लेकिन ममलेश्वर मंदिर में सिर्फ काम चलाओ व्यवस्था के नाम पर दो समय की आरती पुजारी सेवा भाव से करते हैं और एक समय का भोग भगवान को दोपहर 11.30 बजे लगाया जाता है। मंदिर के तीसरे रक्षक इसके पुजारी परिवार है जो प्रतिदिन से लेकर धार्मिक पर्व कालों में एवं पूरे वर्ष भर दर्शना से यात्रियों द्वारा भगवान भोलेनाथ को जो चढ़ावा जाता है। उसके मालिक है करोड़ों की आय में से उन्हें मंदिर के रखरखाव अथवा यात्रियों की सुविधा के लिए किसी भी तरह का कोई खर्च नहीं करना पड़ता, यानी सारी आय उनके जेब में ही चली जाती है। मंदिर आय से होनी चाहिए उचित व्यवस्थाएं जबकि यह अत्यंत अनिवार्य है कि मंदिर के रखरखाव देखरेख अथवा दर्शनार्थ यात्रियों के हित में जो भी सर्वसम्मति से किया जाना चाहिए उसके खर्च की व्यवस्था मंदिर की आय से होना चाहिए। ऐसा अन्य मंदिर संस्थानों की व्यवस्था में हो रहा है लेकिन यहां किसी भी तरह की अव्यवस्था अथवा परंपरा नहीं बनाए जाने के कारण जैसे-तैसे काम चलाया जा रहा है। इसके लिए कोई भी सरकार चुने हुए विधायक अथवा सांसद एवं जिला कलेक्टर आगे आने को तैयार नहीं है। जबकि सार्वजनिक हित में ऐसा किया जाना ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर एवं दर्शनार्थ यात्रियों के हित में होगा।
इनका कहना
गर्भगृह की छत के सड़ जाने एवं बाहर की रेलिंग पर जंग लगे होने की आपने जो बात बताई है। उसको मैं देखता हूं और वरिष्ठ अधिकारियों से सलाह मशवरा करके इस संबंध में क्या किया जा सकता है आपको बताऊंगा। -सुभाष कुमार, क्षेत्रीय सहायक केंद्रीय पुरातत्व विभाग बुरहानपुर
/हिस

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