हवा से बिजली बनाएगा भारत, नीदरलैंड्स करेगा तकनीकी मदद

नई दिल्ली (एजेंसी)। केंद्र सरकार अब पूरे देश में पवन ऊर्जा के लिए तटीय एवं देश के अंदरूनी हिस्सों में पवन ऊर्जा पार्क स्थापित करेगी। इसके लिए केंद्र सरकार यूरोपीय देश नीदरलैंड्स से मदद लेगी। नीदरलैंड्स पूरी दुनिया मे पवन ऊर्जा उत्पादन में अपने श्रेष्ठतम प्रयोगों के लिए जाना जाता है। इसी क्रम में भारत सरकार ने अपतटीय पवन ऊर्जा पर विशेष ध्‍यान के साथ नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत और डेनमार्क के बीच सहयोग समझौते को मंजूरी दे दी। मंत्रिमंडल ने भारत में ‘भारत-डेनमार्क सेंटर ऑफ एक्‍सिलेंस फॉर रिन्‍यूएबल एनर्जी’ की स्‍थापना के आशय-पत्र को भी मंजूरी प्रदान की।

प्रवक्ता ने बताया कि सोमवार को नई दिल्ली में कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने अपतटीय पवन ऊर्जा पर विशेष ध्‍यान के साथ नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय तथा डेनमार्क के ऊर्जा, उपयोग एवं जलवायु मंत्रालय के बीच रणनीतिक सहयोग समझौते को मंजूरी दी। इस समझौते पर मार्च-2019 में नई दिल्‍ली में हस्‍ताक्षर किए गए थे। सहयोग समझौते का उद्देश्‍य अपतटीय पवन ऊर्जा पर विशेष ध्‍यान देते हुए नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है। सहयोग के क्षेत्रों में अपतटीय पवन परियोजनाओं के प्रबंधन के लिए तकनीकी क्षमता विकसित करना, उच्‍च कार्यकुशलता के साथ पवन ऊर्जा उद्योग(तटीय व अपतटीय दोनों) को विकसित करने के उपाय, पवन टर्बाइन, कलपु और प्रमाणीकरण की उच्‍च गुणवत्‍ता सुनिश्चित करने के उपाय तथा अपतटीय पवन के बारे में भविष्‍यवाणी करना व समयसारणी बनाना आदि शामिल हैं।

भारत-डेनमार्क सेंटर ऑफ एक्‍सिलेंस नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों के मूल्‍यांकन का काम करेगा। अपतटीय और तटवर्ती पवन पर विशेष ध्‍यान दिया जाएगा। इसके अतिरिक्‍त यह केन्‍द्र पवन, सौर, जल-विद्युत और भंडारण तकनीक को आपस में जोड़ने, नवीकरणीय ऊर्जा को उच्‍च स्‍तर के पवन ऊर्जा से एकीकृत करने, जांच और अनुसंधान तथा कौशल विकास/क्षमता निर्माण करने पर भी विशेष ध्‍यान देगा। दस्‍तावेजों पर हस्‍ताक्षर से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग को मजबूती प्रदान करने में सहायता मिलेगी। हि.स.

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY