कल्पना श्रीवास्तव : खुली आंखों से देखे सपने को पूरा करने में जुट जाओ भोपाल

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भोपाल की पहचान, शायर दुष्यंत कुमार ने लिखा है- ‘वो मुतमइन हैं कि पत्थर पिघल नहीं सकता/ मैं बेक़रार हूँ आवाज़ में असर के लिए।’ कुछ इसी तर्ज पर भोपाल की संभागायुक्त कल्पना श्रीवास्तव ने हरियाली और झीलों के लिए प्रसिद्ध इस शहर की पहचान को बनाए रखने का सपना देखा है। वे नित उग आते कांक्रीट के जंगल में पेड़ और बाग की बहारों को बचाए रखने का जतन कर रही हैं। बीते कई सालों में विकास के लिए हजारों पेड़ों की बलि ली गई है। गुजरे सालों में मप्र में हरियाली महोत्सव के तहत करोड़ों पौधों को लगाने का अभियान चला। गिनीज बुक ऑफ रिकार्ड में एक दिन में सर्वाधिक पौधों का कीर्तिमान दर्ज करने के ख्वाब देखे गए। भोपाल में एक-दो बार बरगद जैसे पेड़ों के विस्थापन का प्रयोग भी किया गया, लेकिन अपनी जमीन से उखड़ी जड़ें नई जगह पर पोषित ही नहीं हो पाई और इस तरह लाखों रुपयों के साथ कीमती हरियाली भी उजड़ गई। अब कमिश्नर श्रीवास्तव हरियाली बढ़ाने के परंपरागत तरीके यानि पौधरोपण को ही आजमाने जा रही हैं। वे खुली आंखों से संभाग में 11 लाख पौधे लगाने का स्वप्न देख चुकी हैं और भोपाल यदि इन पौधों को बचाने का जतन कर सके तो बाजी को पलटा जा सकता है। 
ताल, तलैयों, पहाड़ों के शहर भोपाल में हरियाली बचाए रखने का सपना खुली आंखों से देखना इसलिए जरूरी है कि यहां शहर के विस्तार के साथ पेड़ों पर ही सबसे ज्यादा आरियां चली हैं। विकास के बदले मिले इस खतरे के प्रति हम अधिक समय तक आंखें मूंदे नहीं रह सकते। क्या आप इन तथ्यों को नजरअंदाज कर सकते हैं कि भोपाल का वन क्षेत्र पिछले 20 सालों में 44 प्रतिशत तक कम हुआ है और अब भी नहीं जागे तो 2030 में भोपाल में लगभग 4 फीसदी ही वन आच्छादित क्षेत्र रह जाएगा। हरियाली घटने का असर सीधे-सीधे तापमान बढ़ने के रूप में दिखाई दिया है। अध्ययन के अनुसार अप्रैल 2011 में तापमान 32.33, अप्रैल 12 में 37.9 डिग्री, 2018 में 40.6 डिग्री तथा वर्ष 2019 में तापमान बढ़कर 42.0 डिग्री तक पहुंच गया है।

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ सांइस बेंगलुरू की इस रिपोर्ट को कल्पना श्रीवास्तव जैसा अफसर नजरअंदाज नहीं कर सकता था। उन्होंने अपनी तमाम सरकारी व्ययस्तताओं के बीच भोपाल की हरियाली बचाए रखने को अपना मिशन बना लिया है। तय किया गया है कि पूरे संभाग में पौधरोपण कर लक्ष्य ‘हरा भोपाल-ठंडा भोपाल’ का संकल्प पूरा किया जाए। जनता को जोड़ने के लिए भोपाल में ‘ऑन ए ट्री चैलेंज’ तथा ‘गिफ्ट ए ट्री’ जैसे जवाबदेही वाले कार्यक्रम चलाए जाएंगे। सोशल मीडिया पर तस्वीरों को शेयर कर जागरूकता बढ़ाई जाएगी। हरित एक्सप्रेस के मार्फत सस्ते में फलदार और छायादार पौधे उपलब्ध करवाए जाएंगे। तय किया गया कि भोपाल शहर में पांच लाख पौधे रहवासियों द्वारा व्यक्तिगत या उनकी सोसायटी द्वारा लगाए जाएं। ये पौधे मात्र 12 रुपये प्रति पौधे की कीमत उपलब्ध करवाए जाएंगे। विभिन्न विभागों को अलग-अलग पहाड़ियों को हरा-भरा बनाने का जिम्मा दिया जाएगा। बारिश में निर्जन पहाड़ियों पर विभिन्न प्रजातियों के बीज बिखराए जाएंगे। शहर में 25 एकड़ भूमि पर वन विकसित किया जाएगा।

यह योजना बहुत अच्छी है, मगर है तो सरकारी ही। इसे ‘असरकारी’ बनाने के लिए भोपाल को प्राण-प्रण से जुटना होगा। कमिश्नर श्रीवास्तव व्यक्तिगत रुचि लेकर 11 लाख पौधे लगवा देंगी मगर उनकी परवरिश की जिम्मेदारी हम सभी को लेनी होगी। क्या सोचते हैं आप?… भोपाल अपनी आवाज का असर देखने को मुंतजिर है।

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