राफेल सौदे पर प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की दलील

नई दिल्ली, (एजेंसी)। राफेल डील मामले में दायर रिव्यू पिटीशन पर आज प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में लिखित दलील दाखिल की। प्रशांत भूषण ने कहा है कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को ग़लत जानकारी दी है और कोर्ट को गुमराह किया। ग़लत जानकारी के आधार पर सौदे को सही ठहराया गया है।
कोर्ट इस मामले में सीबीआई को केस दर्ज करने की हिदायत दे।
10 मई को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने फ्रांस के साथ हुए विमान सौदे को संदेहास्पद बताते हुए जहां जांच की मांग की वहीं केंद्र की ओर से अटार्नी जनरल ने कहा कि याचिकाकर्ता कोर्ट को गुमराह कर रहे हैं। इसलिए दिसंबर में आया फैसला बदलने की जरूरत नहीं है।
सुनवाई के दौरान प्रशांत भूषण ने कहा था कि हम चाहते हैं कि सीबीआई राफेल डील को लेकर जांच करे। हम राफेल डील को रद्द नहीं करना चाहते।
उन्होंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जांच की मांग पर सुनवाई नहीं की बल्कि इस आधार पर सुनवाई की कि हम कॉन्ट्रैक्ट रद्द कराना चाहते हैं। प्रशांत भूषण ने कहा था कि केंद्र ने कोर्ट के समक्ष उस समय सीएजी की उस रिपोर्ट का हवाला दिया, जो उस समय अस्तित्व में ही नहीं थी। उस जानकारी के आधार पर कोर्ट ने फैसला दिया।

प्रशांत भूषण ने कहा कि 18 सितंबर को सीसीएस की मीटिंग में डिफेंस डील के आठ महत्वपूर्ण क्लॉज को अनदेखा किया गया था। यहां तक कि एंटी करप्शन क्लॉज को भी अनदेखा किया गया।
केंद्र ने यह महत्वपूर्ण जानकारी कोर्ट से छिपाई। उन्होंने कहा कि राफेल विमानों का बेंचमार्क मूल्य तय था। यह पांच बिलियन यूरो तय किया गया था परंतु राफेल का फाइनल प्राइस उसके बेंचमार्क मूल्य से 55.6% अधिक था और यह समय के साथ बढ़ता गया। प्रशांत भूषण ने कहा कि इस मामले में कोई बैंक गारंटी भी नहीं है। इसमे केवल फ्रांस द्वारा जारी एक लेटर ऑफ कम्फर्ट है। प्रशांत भूषण ने राफेल डील में प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा की जाने वाली समानांतर बातचीत पर भी सवाल उठाया।
अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सीएजी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि राफेल सस्ती दर में खरीदा गया है। उन्होंने कहा कि क्या ये कोर्ट रेट तय करने का कंप्युटेशन देखने के लिए बैठी है और उसके बाद क्या कोर्ट एयरक्राफ्ट वगैरह के रेट भी फिक्स करेगी। इस केस में ये जरूरी नहीं है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में सभी फाइल नोटिंग्स और दस्तावेज रखे। इस कोर्ट ने फैसला लेने की प्रक्रिया को सही बताया है। इसलिए रिव्यू का सवाल ही नहीं उठता है।

जस्टिस जोसेफ ने पूछा था कि इस मामले में तीन विशेषज्ञों की असहमति पर क्या कहना है। तब अटार्नी जनरल ने कहा था कि उन्हीं अफसरों ने बाद में सभी क्लॉज पर सहमति दी। फैसले सर्वसम्मति से लिये गए औऱ उसे सुरक्षा के लिए बनी मंत्रिमंडलीय समिति के समक्ष रखे गए। जस्टिस जोसेफ ने पूछा था कि क्या आपको उनकी सहमति रिकॉर्ड पर रखने या सार्वजनिक करने में कोई समस्या है । तब अटार्नी जनरल ने कहा कि हां। क्या हम पुल या रोड बनाने के कांट्रैक्ट पर विचार कर रहे हैं। हम डिफेंस कांट्रैक्ट पर विचार कर रहे हैं। हिस

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