बांधवगढ़ की बाघिन के शिकार न करने से बढ़ी रिजर्व अधिकारियों की चिंता

होशंगाबाद (हि.स.)। बांधवगढ़ से सतपुड़ा टाइगर रिजर्व लाई गई बाघिन को रिजर्व में छोड़े हुए तीन सप्ताह होने जा रहे हैं। लेकिन शिकार करने में जितनी चुस्ती दिखानी चाहिए, उतनी यह बाघिन नहीं दिखा रही है। इसे लेकर रिजर्व प्रबंधन चिंतित दिखाई दे रहा है।

बांधवगढ़ से लाई गई बाघिन को गत 19 जून को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के चूरना क्षेत्र में छोड़ा गया था। उसके बाद से बाघिन के मूवमेंट वाला क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है। रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर एस.के.सिंह ने बताया कि बाघिन का मूवमेंट अब रिजर्व के 14-15 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में हो गया है। उन्होंने बताया कि रेडियो कॉलर के जरिए बाघिन के मूवमेंट पर लगातार नजर रखी जा रही है।

शिकार करने में चुस्ती नहीं
बांधवगढ़ की जिस बाघिन को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में छोड़ा गया है, उसे बांधवगढ़ में भी एन्क्लोजर में रखा गया था। उसके बाद सतपुड़ा लाए जाने के बाद यहां भी उसे 4 माह तक एनक्लोजर में ही रखा गया। उसके व्यवहार एवं स्वास्थ्य आदि के प्रति पूरी तरह आश्वस्त होने के बाद उसे 19 जून को छोड़ा गया था। छोड़े जाने के बाद से बाघिन ने अपने पूरी तरह अपने बलबूते पर सिर्फ एक चीतल का शिकार किया है। इसके अलावा उसने दो पाड़ों का शिकार भी किया है, लेकिन ये पाड़े उसे रिजर्व प्रबंधन द्वारा उपलब्ध कराए गए थे। रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर एस.के.सिंह का कहना है कि एक बार शिकार करने के 10-12 दिन बाद तक बाघिन को शिकार की जरूरत नहीं होती। अभी उसने 5 जुलाई को पाड़े का शिकार किया है। उन्होंने कहा कि अब यदि बाघिन खुद शिकार कर लेती है, तो ठीक है अन्यथा उसे फिर से शिकार उपलब्ध कराया जाएगा। एजेंसी

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