परिजनों ने लगाया अधिकारियों पर हत्या का आरोप, हाईकोर्ट के आदेश पर मिली थी नौकरी

रीवा। यह कैसा लोकतंत्र है जहां पर अपने अधिकारों की लड़ाई लडऩे वालों की पुलिस सहायता करने की बजाय उन्ही पर अपनी अपना पुलिसिया रौब दिखा रही है। जिसने भी उक्त घटना सुनी वह पुलिस की इस कार्यप्रणाली पर प्रश्रचिन्ह करती रही। बताया गया है कि मृतक ने हाईकोर्ट से मुकदमा जीतकर कंपनी में नौकरी पाई थी। जिससे प्रबंधन उसके खिलाफ भड़का हुआ था। परिजनों का कहना है कि अधिकारियों ने उनके बेटे की हत्या करवा दी है। फिलहाल पुलिस मामले को लेकर छानबीन कर रही है। अब देखना है कि असली वजह क्या निकलकर सामने आते है। गौरतलब है कि जमीन अधिग्रहण के मामले में जयप्रकाश एसोसिऐट्स लिमिटेड रीवा में जूनियर इंजीनियर को नौकरी मिली थी। लेकिन कंपनी के प्रबंधन के द्वारा जूनियर इंजीनियर का स्थानान्तरण हैदराबाद में कर दिया गया था। जबकि यह गलत है। क्योंकि नियमानुसार जिसकी जहां पर जमीन फंसी है उसी स्थान पर नौकरी दिये जाने का प्रावधान होता है। लेकिन फैक्ट्री प्रबंधन के द्वारा युवक को परेशान करने के उद्देश्य से उसे हैदराबाद स्थानान्तरित किया जहां संदिग्ध परिस्थतियों में उसकी मौत हो गई। मौत हो जाने के बाद परिजनों ने उसका शव रीवा लाकर जेपी सीमेंट प्लांट के समीप शव रखकर धरना प्रदर्शन कर अपने अधिकारों की मांग कर रही थी कि प्रबंधन के इसारे पर पहुंची पुलिस ने जबरन रात्रि के समय फ्रीजर में रखे शव को उठाकर अपने साथ ले आई और संजय गांधी अस्पताल में रखवा दिया है। इसके साथ ही परिजनों को भी गिरफ्तार करके सिटी कोतवाली में रखा गया है। पुलिस का यह अवानवीय कृत्य लोगों के समझ से परे है।
इस संबंध में सूत्रों से हासिल जानकारी के अनुसार सुनील पाण्डेय जो रीवा स्थति जेपी प्लांट में जूनियर इंजीनियर के पद पर कार्यरत था। उसे यह नौकरी उसकी भूमि अधिग्रहण के मामले में मिली थी। लेकिन सुनील का स्थानान्तरण रीवा से हैदराबाद श्रीशैलम थर्मल पावर प्लांट में कर दिया गया था। जहां उसकी संदिग्ध परिस्थिति में मौत हो गई। मौत के बाद परिजन नौकरी सहित मुआवाजे की मांग को लेकर बेतवा गेट पर शव रखकर आंदोलन कर रहे थे। शनिवार को दिन भर चले आंदोलन के बाद रात्रि के समय पुलिस पहुंची और फ्रीजर में रखे सुनील के शव को अनशनकारियों से जबरन छीनकर संजय गांधी अस्पताल के मर्चुरी में पहुंचाकर उसकी निगरानी कर रही है। आखिर पुलिस यह सब किसके इसारे पर कर रही है और क्यों कर रही है। क्यों पुलिस पूंजीपतियों की गुलाम है या फिर पैसे के दम पर लोकतंत्र का कुचला जा रहा है। पुलिस की रात्रि में शव ले जाने की कार्यप्रणाली का विरोध रविवार को भी चलता रहा और भारी संख्या में प्रदर्शन कारी उपस्थित रहे। जिससे दिन भर तनाव की स्थिति निर्मित रही। फिलहाल पुलिस मामले में नजर बनाये हुए है। अब देखना है कि इस मामले में क्या निष्कर्ष निकलता है। फिलहाल विवि थाना के एसओ ने प्रदर्शन कारियों को 151 के तहत लाकर कोतवाली थाने में रखा था जहां से उन्हे एसडीम कोर्ट के लिए ले जाया गया है। इस संबंध में जब चोरहटा थाना प्रभारी से संपर्क करना चाहा गया तो उनका मोबाइल कवरेज क्षेत्र के बाहर होना बताया।
दबंगों के कहर से पत्नी सहित पति की मौत
जिले के सेमरिया थानान्तर्गत आने वाले कौडि़हाई गांव में एक माह पूर्व घर में घुसकर दबांगों ने एक परिवार के ऊपर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया था जिसकी पत्नी की मौके पर ही मौत हो गई थी जबकि पति का इलाज संजय गांधी अस्पताल में चल रहा था। जहां से उसकी हालत में सुधार होता नहीं देखकर उसे दिल्ली इलाज के लिए रेफर किया गया था जहां उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। मौत होने के बाद शव को लेकर वापस लौटे परिजनों ने थाने के सामने शव को रखकर आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। प्रदर्शन और स्थिति बिगड़ती हुई देख जिला मुख्यालय से पुलिस बल रवाना किया गया है। धरना प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे वरिष्ठ अधिकारियों और पुलिस के अधिकारियों के द्वारा लगातार परिजनों को समझाईस दी जा रही है। लेकिन प्रदर्शन कारी गिरफ्तारी की मांग को लेकर अड़े रहे तथा आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने की मांग करते हुए प्रदर्शनन में जुटे हुए थे। पुलिस लगातार समझाईस का प्रयास में जुटी रही। वहा पर लगातार तनाव की स्थिति निर्मित है। सैकडों की संख्या में प्रदर्शन कारी और पुलिस बल उपस्थित है।

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